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    धड़ ठिकाने लगाने को कार की साइज का ड्रम लाया:लखनऊ पुलिस को गुमराह करने के लिए 135 कॉल की, सामने आया बाप-बेटे के खराब रिश्ते का सच

    1 hour ago

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    लखनऊ में वर्धमान पैथोलॉजी मालिक मानवेंद्र सिंह की हत्या करने के बाद बेटे अक्षत प्रताप सिंह उर्फ राजा ने बचने के लिए कई शातिर चालें चलीं। ऑनलाइन चाकू और आरी मंगाकर शव के टुकड़े किए। हाथ-पैर काटकर फेंकने के बाद धड़ को ठिकाने लगाने के लिए ब्रेजा कार में रखने लायक साइज का नीला ड्रम खरीदकर लाया। आर्मी पैटर्न की मोटी पॉलिथीन और 20 लीटर तारपिन का तेल लाया। इस बीच उसे लगा कि वह धड़ को ठिकाने नहीं लगा पाएगा तो पारिवारिक वकील को कॉल करके मिलने की कोशिश की। हालांकि, कोर्ट के कामों की व्यस्तता के कारण वकील उससे मिल नहीं पाए। इतना ही नहीं, पुलिस और परिजनों को गुमराह करने के लिए पिता को ढूंढ़ने का नाटक भी करता रहा। खुद को परेशान दिखाने के लिए अलग-अलग लोगों को 135 कॉल भी किए, ताकि लोगों को लगे कि वह पिता की तलाश कर रहा है। उस पर किसी को शक न हो। यह बातें अक्षत ने पुलिस पूछताछ में बताई हैं। पुलिस 25 फरवरी को उसे जेल भेजकर मामले का खुलासा कर चुकी है, लेकिन यह हत्याकांड अब भी चर्चा का केंद्र बना है। कॉलोनी के अलावा सोशल मीडिया पर भी लोग तरह-तरह के पोस्ट और कमेंट कर रहे हैं। मानवेंद्र के परिवार के करीब रहने वाले लोगों की पोस्ट भी सामने आ रही हैं, जिनमें पारिवारिक रिश्तों में वर्षों से चली आ रही खटास का सच सामने आया है। धड़ को ठिकाने लगाने के लिए कार की साइज का ड्रम खरीदा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 20 फरवरी को तड़के 4:30 बजे पिता की हत्या करने के बाद अक्षत ने शव को ठिकाने लगाने के लिए 2 दिन तक जुगाड़ किया। हाथ-पैर को ठिकाने लगाने के बाद बाजार में ड्रम तलाशता रहा। पूछताछ में उसने बताया कि वह अपनी ब्रेजा कार लेकर 3 अलग-अलग दुकानों पर गया। एक दुकान पर उसे कार में रखने लायक साइज का ड्रम मिला। उसे खरीदकर कार में रखकर घर लाया। घर और मोहल्ले में सुनसान होने का इंतजार करता रहा, ताकि धड़ को ड्रम में भरकर बाहर ले जा सके। इतना ही नहीं, उसने धड़ पैक करने के लिए मोटी पॉलीथिन भी खरीदी। पुलिस बाजार से खरीदी गई वस्तुओं के सीसीटीवी फुटेज और बिलिंग डिटेल्स जुटा रही है। यूट्यूब में देखा, ऑनलाइन भी मंगवाए सामान पुलिस सूत्रों के अनुसार, अक्षत ने पिता की हत्या के बाद यूट्यूब के जरिए शव ठिकाने लगाने के लिए वीडियो भी देखें। अक्षत को यह नहीं समझ में आ रहा था कि वह पिता के शव को कैसे ठिकाने लगाए? उनका वजन करीब 110 किलो था। उसे वह अकेले उठा भी नहीं सकता था। इस वजह से शव के टुकड़े करने के लिए ऑनलाइन चाकू और आरी मंगाई। गुमराह करने के लिए 135 कॉल की पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पिता की हत्या करने के बाद शक से बचने के लिए अक्षत ने एक और चाल चली। वह अपने एक साथी के साथ पिता की गुमशुदगी दर्ज कराने आशियाना थाने पहुंचा। इस दौरान उसने कई लोगों को फोन किए, ताकि यह आभास न हो कि वही हत्यारा है। पुलिस के अनुसार, घटना के दिन से लेकर गिरफ्तारी तक उसके मोबाइल से 135 कॉल की गईं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले जा रहे हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने किन-किन लोगों से बात की? किससे मदद लेने की कोशिश की? उनमें से किसी ने उसकी किसी तरह की मदद तो नहीं की। वकील अंकल आप से अकेले मिलना है… पुलिस सूत्रों ने बताया, हत्या करने के बाद अक्षत को अहसास हो गया कि वह पकड़ा जा सकता है। इस पर उसने परिवार से जुड़े एक वकील से मिलने की कोशिश की। उन्हें फोन करके अकेले मिलने की जिद की। कहा- बहुत जरूरी बात करनी है। हालांकि, कोर्ट में व्यस्त होने के कारण वकील उससे मिल नहीं पाए। इस बीच अक्षत ने कुछ करीबी लोगों के सामने पिता की हत्या की बात स्वीकार भी कर ली थी। दोस्त ने फेसबुक पर किया पोस्ट- ‘बच्चों के मन में जहर भरा गया’ मानवेंद्र के पड़ोसी मित्र अंशुमान दुबे ने फेसबुक पर लंबा पोस्ट लिखकर रिश्तों की कड़वाहट की ओर इशारा किया है। उन्होंने लिखा कि अक्षत 11 साल का था जब उसकी मां ने आत्महत्या की थी। उस घटना के बाद ससुराल पक्ष ने मानवेंद्र को ही दोषी ठहराया और यह धारणा कभी बदली नहीं। पिता और बच्चों के बीच दूरी बनी रही। रिश्तेदारों और करीबियों ने बच्चों के मन में पिता के प्रति जहर भरा। मानवेंद्र का एक महिला मित्र से संबंध भी चर्चा में रहा, जिससे उनकी छवि बच्चों की नजर में और खराब हुई। पोस्ट में यह भी इशारा है कि बेटे की एक लड़की से नजदीकियां थीं। उसने घर के लाखों रुपए संभवतः उसी पर खर्च किए गए। पिता-पुत्र के बीच पैसों और रिश्तों को लेकर तनाव था। जेल में नहीं खाया खाना, पूरी रात जागता रहा 25 फरवरी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद अक्षत पूरी रात नहीं सोया। जेल सूत्रों के मुताबिक, उसने खाना भी नहीं खाया। वह बेचैन नजर आया और पूरी रात तक जागता रहा। अब पढ़िए क्या है पूरा मामला ---------------- संबंधित खबर भी पढ़िए… हत्या से पहले मानवेंद्र ने अक्षत को जड़ा था थप्पड़:50 लाख के लिए बाप-बेटे में बहस हुई थी; फूफा बोले- वजह कुछ और लखनऊ की जानी-मानी पैथोलॉजी के मालिक की हत्या के मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि हत्या से एक दिन पहले यानी 19 फरवरी को वर्धमान पैथोलॉजी के मालिक मानवेंद्र सिंह और उनके बेटे की बीच पैसों को लेकर बहस हुई थी। पूरी खबर पढ़ें
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