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    अपर्णा यादव ने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग:प्रधानमंत्री का नाम लेने पर लोगों ने किया विरोध ;बोले प्रधानमंत्री यूजीसी के नाम पर समाज को बाँटने का काम किया

    2 hours ago

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    राजधानी लखनऊ में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन में सावरकर विचार मंच ने एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस अवसर पर महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और महिला सशक्तिकरण पर अपना संबोधन दिया। उन्होंने वीर सावरकर को महान क्रांतिकारी बताते हुए उन्हें 'भारत रत्न' देने की मांग की। अपर्णा यादव ने कहा कि उन्होंने अंडमान की सेल्युलर जेल का दौरा किया है। वहां की कोठरियों को देखकर ही भय का एहसास होता है, ऐसे में यातनाओं की कल्पना करना भी कठिन है। उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सावरकर ने 'हिंदुत्व' जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक लिखी, जिससे आज भी लोग प्रेरणा लेते हैं। यादव ने जोर दिया कि सावरकर को केवल दया याचिका (मर्सी पिटिशन) के नजरिए से नहीं, बल्कि उनकी क्रांतिकारी सोच के लिए देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र की मजबूत नींव का विचार वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से सावरकर को 'भारत रत्न' से सम्मानित करने की अपनी मांग दोहराई। अपने भाषण में अपर्णा यादव ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का जिक्र करते हुए उन्हें नारी शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने 'अयिगिरि नंदिनी' स्तुति की पंक्तियां गुनगुनाते हुए कहा कि प्रज्ञा ने षड्यंत्र और कठिन परिस्थितियां झेलीं, लेकिन देश उनका बलिदान कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में 'मिशन शक्ति' के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा मजबूत हुई है। अपर्णा यादव ने सभा में सावरकर की प्रतिमा स्थापित कराने की घोषणा की और इसके लिए जनसमर्थन की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रवाद और परिवारवाद को समाप्त करने के उद्देश्य से जॉइन की थी। भाषण के दौरान प्रधानमंत्री के नाम लेने पर लोगों ने विरोध किया। कहा आप यहां प्रधानमंत्री का नाम न ले यह बीजेपी का मंच नहीं हैं ।लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने यूजीसी (UGC) के नाम पर समाज को बांटने का काम कर रहे है।
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