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    असम में भारत का सबसे लंबा भूकंप रोधी एक्स्ट्राडोसेड ब्रिज:100 साल तक चलेगा, चीन से सटे सीमाई इलाकों तक कनेक्टिविटी और मजबूत होगी

    7 hours ago

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    असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर उत्तरी और दक्षिणी गुवाहाटी को जोड़ने वाला पहला 6-लेन एक्स्ट्राडोसेड ब्रिज या ‘महासेतु’ बनकर तैयार है। यह पुल न केवल असम बल्कि देश के लिए भी खास है, क्योंकि यह भारत का सबसे लंबा एक्स्ट्राडोसेड पुल होगा। पुल को भूकंप-रोधी तकनीक से डिजाइन किया गया है और इसकी अनुमानित उम्र 100 वर्ष है। असम का यह क्षेत्र भूकंप जोन-6 में आता है, ऐसे में पुल में विशेष पेंडुलम सिस्टम लगाया है, जो भूकंप के झटकों को सहन कर उन्हें नीचे की ओर स्थानांतरित कर देता है। एक्स्ट्राडोसेड पुल गर्डर और केबल दोनों तकनीक पर आधारित होता है। इससे पारंपरिक पुलों की तुलना में ज्यादा मजबूत और किफायती भी होता है। पुल का निर्माण कार्य करीब 99% पूरा हो गया है। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने इसका उद्धाटन करेंगे। ब्रिज की 2 तस्वीरें… देश के अन्य ब्रिज के बारे में जानिए… तमिलनाडु: एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट स्पैन रेलवे ब्रिज तमिलनाडु के रामेश्वरम में एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट स्पैन रेलवे ब्रिज (नए पम्बन ब्रिज) है। 2.08 किमी लंबे ब्रिज की नींव नवंबर 2019 में रखी गई थी। 2025 में इसका उद्घाटन किया गया था। ब्रिज रामेश्वरम (पम्बन द्वीप) को भारत की मुख्य भूमि तमिलनाडु के मंडपम से जोड़ता है। भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसे डबल ट्रैक और हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए डिजाइन किया गया है। स्टील से बने नए ब्रिज पर पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग की गई है, जो इसे जंग और समुद्र के नमकीन पानी से बचाती है। 5 मिनट में ऊपर उठ जाता है ब्रिज पुराना पम्बन ब्रिज साल 2022 में जंग लगने की वजह से बंद कर दिया गया था। इसके बाद से रामेश्वरम और मंडपम के बीच रेल कनेक्टिविटी खत्म हो गई थी। नया पम्बन ब्रिज 100 स्पैन यानी हिस्सों से मिलकर बनाया गया है। जब समुद्री जहाज को निकलना होता है तो इस नेविगेशन ब्रिज (समुद्री जहाजों के लिए खुलने वाले ब्रिज) का सेंटर स्पैन (बीच वाला हिस्सा) ऊपर उठ जाता है। यह इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम पर काम करता है। इस वजह से इसका सेंटर स्पैन सिर्फ 5 मिनट में 22 मीटर तक ऊपर उठ सकता है। इसके लिए सिर्फ एक आदमी की जरूरत होगी। वहीं, पुराना पुल कैंटिलीवर पुल था। इसे लीवर के जरिए मैन्युअली खोला जाता था, जिसमें 14 लोगों की जरूरत होती थी। हालांकि समुद्री हवा की गति 58 किमी प्रति घंटे या उससे ज्यादा हो जाने पर वर्टिकल सिस्टम काम नहीं करेगा और ऑटोमैटिक रेड सिग्नल हो जाएगा। हवा की गति सामान्य होने तक ट्रेन की आवाजाही बंद रहेगी। ऐसा अक्सर अक्टूबर से फरवरी के बीच होता है। इन महीनों में तेज हवाएं चलती हैं। जम्मू-कश्मीर: नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज का पिछले उद्घाटन हुआ था। चिनाब आर्च ब्रिज रियासी जिले में बक्कल और कौड़ी के बीच बना है। इसे 2003 में मंजूरी मिली थी। शुरुआती प्लान के मुताबिक इसे 2009 तक तैयार हो जाना था, लेकिन इसे पूरा होने में 22 साल लग गए। यह सवा किमी से ज्यादा लंबा है और नदी से ऊंचाई 359 मीटर है। यह पेरिस के एफिल टावर (330 मीटर) से 29 मीटर ऊंचा है। लागत 1486 करोड़ रुपए है। यह पुल नदी तल से 331 मीटर की ऊंचाई पर बना है। 1086 फीट ऊंचा एक टावर इसे सहारा देने के लिए बनाया गया है, जो करीब 77 मंजिला बिल्डिंग जितना ऊंचा है। इसमें से 472.25 मीटर का हिस्सा केबल्स पर टिका हुआ है। यह ब्रिज अंजी नदी पर बना है जो रियासी जिले के कटरा को बनिहाल से जोड़ता है। चिनाब ब्रिज से इसकी दूरी महज 7 किमी है। इस पुल की लंबाई 725.5 मीटर है।
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