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    Katra Ropeway Project पर विवाद और बढ़ा, CM Omar Abdullah ने LG पर लगाया मंजूरी देने का आरोप, BJP भड़की

    3 hours from now

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    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में श्री माता वैष्णो देवी आधार शिविर कटरा में प्रस्तावित रोपवे परियोजना को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ा हुआ है। सोमवार को शुरू हुआ विवाद आज भी जोरदार बहस और आरोप-प्रत्यारोप के साथ जारी रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने खड़े होकर स्पष्ट किया कि रोपवे परियोजना को उनकी कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जांच कराई गई है और पाया गया कि सितंबर 2024 में इस परियोजना को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वीकृति दी थी, न कि कैबिनेट ने। मुख्यमंत्री के बयान पर भाजपा विधायकों ने आपत्ति जताई। एक विधायक ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि उसमें कैबिनेट की मंजूरी का उल्लेख है और वह कागज स्पीकर को भी सौंपा गया। इसके बाद सदन में माहौल और गरमा गया।उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने इस मुद्दे को सिर्फ किसी क्षेत्र का नहीं बल्कि माता वैष्णो देवी के करोड़ों श्रद्धालुओं से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कुछ विधायकों पर लोगों को गुमराह करने और झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग भी कर डाली।इसे भी पढ़ें: Chief Of Army Staff General Upendra Dwivedi ने किया LoC Sector का दौरा, Pakistan में मचा हड़कंपहम आपको बता दें कि यह विवाद सोमवार को बजट पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ था, जब बनी के विधायक रामेश्वर ने रोपवे परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में आस्था है कि हम पैदल चलकर माता के दर्शन के लिए जाते हैं। इसी दौरान भाजपा विधायक बलदेव शर्मा ने दावा किया कि परियोजना को कैबिनेट ने मंजूरी दी है, जिसे उपमुख्यमंत्री ने तुरंत खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। उपमुख्यमंत्री ने भाजपा पर माता के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कटरा के स्थानीय लोगों, दुकानदारों और पिट्ठू कामगारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है और उनकी आवाज भी सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि फैसला लोगों की मांग और हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।वहीं भाजपा विधायकों ने भी जोरदार नारेबाजी की और सरकार पर सवाल उठाए। हालात ऐसे बने कि स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्पीकर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के व्यवहार से केवल सदन का समय बर्बाद होता है और कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता। देखा जाये तो रोपवे परियोजना अब आस्था, आजीविका और राजनीति, तीनों के बीच घिरा एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।
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