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    अयोध्या में अमरूद की सघन बागवानी पर दो दिवसीय प्रशिक्षण:3 जिलों के किसानों को मिली वैज्ञानिक तकनीक, आय बढ़ाने पर जोर

    3 hours ago

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    आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में अमरूद की सघन बागवानी विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के डिक्शनरी ऑडिटोरियम में किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के दिशा-निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें अयोध्या, अमेठी और सुल्तानपुर जनपदों से आए किसानों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण का संचालन उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. निरंजन कुमार सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने “अमरूद की सघन बागवानी: पूर्वी उत्तर प्रदेश में सतत आजीविका के अवसर, संभावनाएं और प्रबंधन रणनीतियां” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को 10 प्रमुख बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया गया, जिसमें प्रति हेक्टेयर खाद एवं उर्वरक की सही मात्रा, पौधों की रोपाई की वैज्ञानिक विधि, समय-समय पर सिंचाई, तथा पौधों की कटाई-छंटाई के तरीके शामिल रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. प्रमाणिक उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डीजी उपकार लखनऊ डॉ. संजय सिंह ने सहभागिता की। अपने संबोधन में कुलपति डॉ. प्रमाणिक ने कहा कि सघन बागवानी पद्धति में सीमित भूमि पर अधिक पौधे लगाकर उच्च गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए पौधों का संतुलित आकार बनाए रखना, नियमित सिंचाई और उचित छंटाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अमरूद को “गरीबों का फल” बताते हुए कहा कि इसमें शरीर के लिए आवश्यक लगभग सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं वहीं डीजी उपकार डॉ. संजय सिंह ने किसानों को अमरूद के मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि अमरूद से विभिन्न उत्पाद बनाकर किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है। साथ ही अमरूद आधारित मिश्रित खेती को अपनाने से लागत कम और लाभ अधिक संभव है। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की तकनीकों से अवगत कराया। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वांचल के किसानों के लिए अमरूद की सघन बागवानी आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम साबित हो सकती है।
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