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    अयोध्या में किसान कर पाएंगे आड़ू की खेती:कृषि विश्वविद्यालय ने किया शोध, आय बढ़ाने में मिलेगी मदद

    2 hours ago

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    अयोध्या में अब आड़ू की खेती संभव हो गई है, जो अब तक केवल पहाड़ी इलाकों का फल माना जाता था। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज के वैज्ञानिकों ने इस पारंपरिक धारणा को चुनौती देते हुए पूर्वांचल के मैदानी क्षेत्रों में आड़ू उगाने में सफलता हासिल की है। यह शोध किसानों की आय बढ़ाने का नया रास्ता खोल सकता है। परंपरागत रूप से, भारत में आड़ू की खेती जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे राज्यों तक सीमित रही है, जहां लंबे समय तक 'चिलिंग' यानी ठंड का प्रभाव रहता है। हालांकि, बदलती कृषि तकनीक और वैज्ञानिक नवाचारों के कारण अब पूर्वांचल जैसे मैदानी इलाकों में भी इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। विश्वविद्यालय के उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के प्रक्षेत्र में वैज्ञानिकों द्वारा आड़ू की विभिन्न प्रजातियों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ. भानु प्रताप के नेतृत्व में डॉ. निरंजन सिंह इस दिशा में महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं। डॉ. निरंजन सिंह ने बताया कि वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश के यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना से आड़ू की उन्नत प्रजातियों के पौधे मंगाकर रोपित किए गए थे। रोपण के दूसरे ही वर्ष इन पौधों में फल आने शुरू हो गए, जो अब पकने की अवस्था में पहुंच चुके हैं। डॉ. निरंजन सिंह के अनुसार, अगले दो वर्षों में इस शोध के आधार पर पूर्वांचल के किसानों के लिए उपयुक्त उत्पादन तकनीक विकसित कर ली जाएगी। इससे किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ आड़ू की बागवानी कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पोषण की दृष्टि से भी आड़ू बेहद लाभकारी फल है। इसमें आयरन, पोटेशियम, फास्फोरस विटामिन C, विटामिन A (बीटा-कैरोटीन), विटामिन E, विटामिन K और विटामिन B समूह प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी, रोग प्रतिरोधक क्षमता और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज का यह प्रयास क्षेत्रीय बागवानी को नई दिशा देगा और पूर्वांचल को फल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा।
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