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    BBAU में 'स्टूडेंट चार्टर' से दूर होगी छात्रों की समस्या:कुलपति ने बड़े अफसरों के साथ की बैठक, SOP तैयार करने के दिए निर्देश

    3 hours ago

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    लखनऊ के बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (BBAU) में कुलपति की अगुवाई में अध्यक्षता में सभी डीन, HOD, निदेशकों और अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी ‘सेवा संकल्प संकल्पना’ को लेकर बुलाई गई थी। ‘कर्मयोगी’ भावना से विश्वविद्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ बनाने का अपने संबोधन में कुलपति प्रो.राज कुमार मित्तल ने सभी सदस्यों से ‘कर्मयोगी’ भावना के साथ कार्य करने और विश्वविद्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में विकसित करने को कहा। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने, नियमों और प्रक्रियाओं को सरल और प्रभावी बनाने तथा निर्णयों के त्वरित क्रियान्वयन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित में एक स्पष्ट ‘सेवा चार्टर’ तैयार किया जाना चाहिए, जिससे शिक्षण, अध्ययन और विस्तार गतिविधियों से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सके। उन्होंने शिक्षकों से अपने पेशे को समाज सेवा का माध्यम मानते हुए ‘सेवा भाव’ के साथ कार्य करने का आग्रह किया। अधिकारियों से पारदर्शिता, जवाबदेही और जन-प्रतिक्रिया को प्राथमिकता देने की बात करते हुए उन्होंने विकसित और समावेशी भारत-2047 के लक्ष्य में सक्रिय योगदान देने की बात कही। शिकायत निवारण, शोध पर फोकस रही बैठक बैठक में शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए SOP तैयार करने, अनावश्यक प्रक्रियाओं से बचने और वर्क कल्चर में दक्षता बढ़ाने पर चर्चा हुई। शिक्षकों को छात्रों में उद्यमिता कौशल, मानवीय मूल्यों और समस्या-समाधान क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। कुलपति ने शोध परिणामों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विकास को समान महत्व देने की आवश्यकता बताई, ताकि वे जिम्मेदार और आदर्श नागरिक बन सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता से आगे बढ़कर कार्य करना चाहिए और विश्वविद्यालय और राष्ट्र की सेवा में पूर्ण समर्पण के साथ योगदान देना चाहिए। ‘सेवा भाव’ से काम करने का दिया आश्वासन बैठक के सभी अधिकारियों और शिक्षकों ने ‘सेवा भाव’ की भावना से कार्य करने का आश्वासन दिया और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए।
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