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    भाकियू ने जंगल के रास्ते खोलने, फेंसिंग की मांग की:पीलीभीत में किसानों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, डीएफओ के खिलाफ नारेबाजी

    1 hour ago

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    भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने पीलीभीत के किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को संगठन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर जंगल से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आवाजाही से जुड़ी गंभीर समस्याओं के समाधान की मांग की। यूनियन द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में चार मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है। इसमें वन विभाग द्वारा जंगल से गुजरने वाले कई पारंपरिक रास्तों को रात के समय बंद करने का मुद्दा उठाया गया है। इससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने और ग्रामीणों की सामान्य आवाजाही में भारी बाधा आ रही है। संगठन ने इन रास्तों को तुरंत चौबीसों घंटे खोलने की मांग की है। किसानों ने टाइगर रिजर्व की फेंसिंग का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि वर्ष 2012 में जब पीलीभीत को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, तब जंगल के चारों ओर फेंसिंग करने की योजना बनी थी। लेकिन गिजरौला, माधवपुर, अबेपुर और सेगरिया जैसे क्षेत्रों में आज तक यह कार्य अधूरा है। फेंसिंग न होने के कारण नीलगाय, भालू और अन्य जंगली जानवर लगातार किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। जानवर आसानी से खेतों में घुस जाते हैं, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल रही है। संगठन ने मांग की है कि जंगली जानवरों द्वारा नष्ट की गई फसलों का वन विभाग द्वारा तत्काल और उचित मुआवजा किसानों को दिया जाए। ज्ञापन पर रणजीत सिंह कहलो (जिला अध्यक्ष), जोगा सिंह विर्क (जिला उपाध्यक्ष) और अमरजीत सिंह (जिला सचिव) समेत दर्जनों किसानों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि इन मांगों पर जल्द ही ठोस कार्यवाही नहीं की गई, तो ग्रामीण और किसान संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। किसानों का कहना है कि वे एक तरफ जंगली जानवरों के हमले के डर में जी रहे हैं, तो दूसरी तरफ वन विभाग के कड़े नियमों ने उनके दैनिक जीवन को दूभर कर दिया है। प्रशासन से जल्द से जल्द सकारात्मक हस्तक्षेप की उम्मीद जताई गई है।
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