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    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भाकियू (टिकैत) का विरोध:पीलीभीत से राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, किसान विरोधी बताया

    3 hours ago

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    पीलीभीत में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते का विरोध किया है। यूनियन ने इस समझौते को किसान विरोधी करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को जनपद इकाई के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन यूनियन के जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में दिया गया। यूनियन का स्पष्ट कहना है कि यदि यह समझौता लागू होता है, तो इससे देश का अन्नदाता पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। ज्ञापन में समझौते से होने वाले नुकसानों को चार प्रमुख बिंदुओं में रेखांकित किया गया है। किसानों का तर्क है कि अमेरिका अपनी खेती पर भारी सब्सिडी देता है और वहां बड़े स्तर पर मशीनीकृत खेती होती है। यदि भारत सोयाबीन, मक्का, गेहूं और दालों पर आयात शुल्क घटाता है, तो अमेरिकी फसलें भारतीय मंडियों में भर जाएंगी, जिससे स्थानीय किसानों को उनकी उपज का सही दाम (एमएसपी) मिलना असंभव हो जाएगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि भारत का डेयरी उद्योग छोटे और सीमांत किसानों पर टिका है। अमेरिकी डेयरी उत्पादों के प्रवेश से लाखों दुग्ध उत्पादक परिवारों की आजीविका छिन जाएगी, जिससे यह क्षेत्र संकट में आ जाएगा। व्यापार संतुलन के नाम पर भारत की सार्वजनिक खरीद प्रणाली (पब्लिक प्रोक्योरमेंट सिस्टम) को कमजोर करने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे राशन प्रणाली और देश की खाद्य आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी कंपनियों के पेटेंट आधारित बीजों के कारण किसानों की पारंपरिक बीजों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। इससे खेती पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथ में चली जाने की आशंका है। भाकियू नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या इस तरह के समझौतों से पहले किसानों की सहमति ली गई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ किसान पहले से ही एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह के समझौते किसानों के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करेंगे। इस दौरान जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा, जिला महासचिव नेम चंद वर्मा, और युवा विंग के पदाधिकारियों सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों के हितों की अनदेखी कर इस समझौते को रद्द नहीं किया गया, तो देशभर में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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