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    पॉलीग्राफी टेस्ट के खौफ ने उगले दो कत्ल के राज:कंपाउंडर ने 13 महीने पहले प्रेमिका और डॉक्टर ने 9 साल पहले पत्नी को मार कर गाड़ा

    1 hour ago

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    अपराध की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि 'कातिल कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है।' लेकिन बरेली के क्योलड़िया और भुता इलाके की इस दास्तां में सुराग नहीं, बल्कि मौत की वो चीखें वापस लौटी हैं जिन्हें सालों पहले खामोश कर दिया गया था। यह कहानी एक ऐसे सनसनीखेज खुलासे की है, जहां एक नाबालिग की तलाश शुरू हुई और खत्म हुई दो बेगुनाह औरतों की कत्लगाह पर। एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा और सीओ निलेश मिश्रा ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस 'डबल मर्डर मिस्ट्री' की परतों को उखाड़ा, तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। आधी रात का सस्पेंस: 16 साल की किशोरी और वो 'अज्ञात' फोन कॉल तारीख थी 8 जनवरी 2025। क्योलड़िया के ग्राम सतवन पट्टी में सन्नाटा पसरा था, लेकिन अजीज अहमद के घर में कोहराम मच गया जब उन्हें पता चला कि उनकी 16 साल की बेटी गायब है। पिता ने थाने की चौखट पर माथा टेका, गुहार लगाई और अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज हुआ। महीने बीतते गए, पुलिस की फाइलें धूल फांकती रहीं, लेकिन लड़की का कोई सुराग नहीं मिला। पिता अपनी बेटी की बरामदगी के लिए हाईकोर्ट तक गए, हैबियस कॉर्पस याचिका दायर हुई। दबाव बढ़ा तो पुलिस की टीमें सक्रिय हुईं। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इस गुमशुदगी के पीछे एक ऐसा राज छुपा है जो 9 साल पुराने एक और खौफनाक कत्ल की कब्र खोद देगा। कैलाश नदी के किनारे मिला वो ‘खौफनाक सच’ विवेचना का जिम्मा जब बदला, तो पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया। सितंबर 2025 में कैलाश नदी के किनारे एक गन्ने के खेत में कुछ ऐसा मिला जिसने पुलिस के होश उड़ा दिए। वहां बिखरी पड़ी थीं कुछ हड्डियां, कपड़ों के चिथड़े और सिर के बालों की एक गुथी हुई चोटी। पुलिस को शक हुआ कि ये उसी नाबालिग के अवशेष हो सकते हैं। डीएनए टेस्ट कराया गया। मां मुन्नी बेगम और पिता का ब्लड सैंपल मुरादाबाद लैब भेजा गया। रिपोर्ट आई तो पुष्टि हो गई-वो हड्डियां अजीज अहमद की बेटी की ही थीं। अब सवाल था कि कातिल कौन? पॉलीग्राफी टेस्ट का वो 'खौफनाक' नोटिस और टूटता हौसला जांच की सुई गांव के ही सलीम हुसैन पर टिकी। सलीम का मोबाइल रिकॉर्ड बता रहा था कि गायब होने वाली रात 1 बजे तक वह लड़की के संपर्क में था। सलीम शातिर अपराधी था, लूट और डकैती के केसों में जेल जा चुका था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की लेकिन वह टूट नहीं रहा था। तब पुलिस ने 'ब्रह्मास्त्र' चलाया-पॉलीग्राफी टेस्ट। बरेली कोर्ट से अनुमति लेकर जब सलीम को नोटिस थमाया गया कि उसे दिल्ली की सीएफएसएल लैब में टेस्ट देना होगा, तो उसके पैर उखड़ गए। उसे डर था कि 'सच उगलने वाले इंजेक्शन' के सामने उसका हर राज बाहर आ जाएगा। इसी डर ने उसे अपने 'उस्ताद' डॉ. बंगाली के पास भेजा और यहीं से पूरी कहानी पलट गई। मर्डर मिस्ट्री-1: प्रेमिका ने मांगी शादी, तो मिली मौत सलीम ने पुलिस के सामने टूटकर वो सच बताया जो रूह कपा देने वाला था। उसने बताया कि वह लड़की से प्यार करता था। उस रात लड़की ने उसे बुलाया और साथ ले जाने की जिद करने लगी। उसे डर था कि गांव वाले देख लेंगे। जब लड़की वापस घर जाने को तैयार नहीं हुई और शादी की जिद पर अड़ी रही, तो सलीम ने उसे रास्ते का कांटा समझ लिया। उसने उसी गन्ने के खेत में अपनी प्रेमिका का गला घोंट दिया। पहचान मिटाने के लिए उसने खोपड़ी को नदी में फेंक दिया और बाकी शरीर वहीं छोड़ दिया। वह अक्सर उस खेत में जाकर देखता था कि कहीं राज तो नहीं खुल गया। मर्डर मिस्ट्री-2: उस्ताद 'बंगाली' और 2017 का वो ‘दफन राज’ सलीम की गिरफ्तारी के बाद जो दूसरा खुलासा हुआ, उसने पुलिस के भी पैरों तले जमीन खिसका दी। सलीम ने बताया कि वह 2016 से ग्राम पडोली के डॉ. बंगाली (आसिम उर्फ अमित) के पास काम सीखता था। जब सलीम ने डॉक्टर को बताया कि वह पॉलीग्राफी टेस्ट से डर रहा है, तो डॉक्टर ने उसे भागने की सलाह दी। पूछताछ में पता चला कि 2017 में डॉक्टर बंगाली ने खुद अपनी पत्नी रजनी की हत्या की थी। डॉक्टर को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। उसने सलीम के साथ मिलकर साजिश रची। दोनों ने मिलकर रजनी को शराब पिलाई और चुनरी से गला दबाकर उसे कैलाश नदी की रेत में दफन कर दिया। 9 साल तक दुनिया को लगा कि रजनी कहीं भाग गई है, लेकिन सच तो डॉक्टर की क्लीनिक और सलीम की यादों में कैद था। जुर्म की पूरी टाइमलाइन: साल-दर-साल खुला खौफनाक राज साल 2006: पश्चिम बंगाल का रहने वाला आरोपी आसिम उर्फ डॉ. बंगाली दिल्ली से बरेली के पडोली गांव आया और यहां रजनी से शादी कर रहने लगा। साल 2016: अपराधी प्रवृत्ति का सलीम हुसैन डॉ. बंगाली के संपर्क में आया और उसके क्लीनिक पर कंपाउंडरी का काम सीखने लगा। यहीं से दोनों के बीच जुर्म की दोस्ती शुरू हुई। साल 2017: डॉ. बंगाली ने अपनी पत्नी रजनी के चरित्र पर शक होने के कारण सलीम के साथ मिलकर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। शव को कैलाश नदी के किनारे रेत में दफन कर दिया गया। 08 जनवरी 2025: सलीम ने अपनी नाबालिग प्रेमिका को मिलने बुलाया। शादी की जिद करने पर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और शव को गन्ने के खेत में फेंक दिया। सितंबर 2025: पुलिस को गन्ने के खेत से हड्डियां और चोटी बरामद हुई। डीएनए टेस्ट के जरिए मृतका की पहचान अजीज अहमद की बेटी के रूप में हुई। 03 फरवरी 2026: पुलिस ने सलीम को दिल्ली में पॉलीग्राफी टेस्ट कराने का नोटिस दिया। पकड़े जाने के डर से सलीम अपने साथी डॉ. बंगाली के पास पहुंचा। 11 फरवरी 2026: पुलिस ने सटीक सूचना पर घेराबंदी की और दोनों आरोपियों को कोलकाता भागने से पहले भौआ बाजार के पास से दबोच लिया। महत्वपूर्ण 10 बिंदु पुलिस टीम की जांबाजी एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा और सीओ निलेश मिश्रा ने बताया कि यह खुलासा क्योलड़िया पुलिस की कड़ी मेहनत का नतीजा है। प्रभारी निरीक्षक वेद सिंह, सब इंस्पेक्टर अरिमर्दन सिंह,सब इंस्पेक्टर अर्जित कुमार, सब इंस्पेक्टर मुकेश कुमार और उनकी टीम ने संदिग्धों का पीछा तब तक नहीं छोड़ा जब तक उन्होंने सच नहीं उगल दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को धारा 103(1) और 238 बीएनएस के तहत जेल भेज दिया है।
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