Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    भारत ने निभाई पक्की यारी, नेपाल की आर्मी को दिया गजब का तोहफा!

    14 hours ago

    1

    0

    हिमालय की गोद में बसा नेपाल जहां की राजनीति में इन दिनों एक नई हलचल है। इस साल मार्च में जब काठमांडू की सत्ता में बालन शाह और बालेन का राज्याभिषेक हुआ तो इसे एक नए युग की शुरुआत मानी गई। प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आए बालेन शाह से काठमांडू के युवाओं को बहुत ज्यादा उम्मीदें थी। तो नई दिल्ली को भी यह लगा कि शायद अब पुरानी कड़वाहट खत्म होगी। लेकिन सत्ता संभालने के महज छ हफ्तों के भीतर बालेन शाह के रुख ने सबको हैरान कर दिया। एक तरफ जहां नेपाल सरकार के कुछ फैसले रिश्तों में दरार डाल रहे थे, वहीं दूसरी तरफ भारत अपनी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी पर अडिग है।इसे भी पढ़ें: बालेन शाह ने मांगी मदद, भारत ने लिया बड़ा फैसला दरअसल नेपाल के वीरगंज से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने दुनिया को बताया कि भारत के लिए नेपाल सिर्फ एक पड़ोसी नहीं बल्कि एक भाई है। भारत सरकार ने नेपाल की कानून व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए उभार के रूप में 10 विशेष कैदी वाहन सौंपे हैं। वीरगंज में आयोजित एक भव्य समारोह में भारत के वाणिज्य दूतावास के महाप्रबंधक देवी सहाय मीणा ने इन गाड़ियों की चाबियां परसा जिले के सीडीओ भोला दहाल को सौंप दी। यह वाहन महज गाड़ियां नहीं बल्कि भारत की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसमें वह नेपाल की शांति और सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता मानता है। इसे भी पढ़ें: भारत से पंगा पड़ा बहुत महंगा, ब्लैकलिस्ट की कगार पर पहुंचा नेपालबता दें यह 10 विशेष वाहन नेपाल के सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता को नई धार देंगे। अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह कैदी वाहन चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में भी काम करने में सक्षम है। नेपाल की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अक्सर दुर्गम इलाकों में कैदियों के परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब भारत के इस तोहफे से उनकी लॉजिस्टिक ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। नेपाल सरकार के अधिकारियों ने भी भारत के इस कदम की सराहना की। उनका मानना है कि इस तरह का सहयोग दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच आपसी विश्वास को और गहरा करेगा। यह पहली बात नहीं है जब भारत ने नेपाल का हाथ थामा है। अगर इतिहास के पन्नों को पलटे तो भारत ने हमेशा नेपाल की प्रशासनिक जरूरतों का ख्याल रखा है। 5 मार्च 2026 को हुए प्रतिनिधि सभा के चुनाव को ही ले लीजिए। तब भारत ने नेपाल के अनुरोध पर 640 से अधिक वाहन उपहार में दिए थे। जिनमें एसयूवी, पिकअप और ट्रक शामिल थे। अब तक भारत नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना को 2000 से अधिक गाड़ियां दे चुका है। इतना ही नहीं नेपाल के सुदूर गांव में चलने वाली सैकड़ों एंबुलेंस और बच्चों को स्कूल ले जाने वाली बसें भी भारत की दोस्ती का सबसे बड़ा उपहार है। इसे भी पढ़ें: Kathmandu Airport पर लैंडिंग के वक्त Turkish Airlines के विमान में लगी भीषण आग, 277 यात्री बाल-बाल बचेवैसे बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उम्मीद थी कि कूटनीतिक संवाद बढ़ेगा। लेकिन हकीकत इसके उलट दिख रही है। सूत्रों की मानें तो बालन शाह ने किसी भी अधिकारी से मिलने तक की दिलचस्पी नहीं दिखाई है। खासकर भारत के इतना ही नहीं उन्होंने नेपाल भारत सीमा पर नए कस्टम ड्यूटी लगा दिए थे। जिससे सदियों से चले आ रहे स्थानीय व्यापार पर संकट के बादल मंडाने लगे थे। और तनाव की सबसे बड़ी वजह बनी लिपुलेख। भारत द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए बनाए जा रहे रास्ते पर बालन शाह ने ना केवल आपत्ति जताई बल्कि चीन और भारत को औपचारिक पत्र भेजकर अपना विरोध भी दर्ज कराया। यह वही इलाका है जिस पर नेपाल अपना दावा करता है। खैर, भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वे नेपाल के विकास और सुरक्षा के मुद्दे पर हमेशा साथ खड़े रहेंगे। भले ही राजनीति के गलियारों में कभी-कभी खिसदान दिखे लेकिन जमीन पर भारत और नेपाल का रिश्ता अटूट है। लिपुलेख या फिर सीमा शुल्क जैसे मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी। लेकिन भारत की यह गिफ्ट डिप्लोमेसी यह मैसेज देता है कि भारत अपने पड़ोसियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Middle East में बड़ा उलटफेर? US-Iran के बीच Peace Deal, होर्मुज से हटेंगे अमेरिकी सैनिक
    Next Article
    सामान भी नहीं बांध पाए, UAE ने पाकिस्तानियों को रातों-रात धक्के मार कर बाहर निकाला

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment