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    BHU में 2 साल बाद पुनः खुलेगा नेपाली अध्ययन केंद्र:कुलपति ने लिया फैसला, राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष को मिली जिम्मेदारी

    7 hours ago

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    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संसाधनों की कमी के कारण लगभग दो साल पहले बंद कर दी गई नेपाली लाइब्रेरी अब अपने पुराने स्थान पर फिर से संचालित की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं और लाइब्रेरी को दोबारा शुरू करने की जिम्मेदारी राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष को सौंपी गई है। केंद्रीय ग्रंथालय में किया गया था विलय सितंबर 2024 में विश्वविद्यालय की ग्रंथालयों के लिए गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर तत्कालीन कुलपति ने नेपाल अध्ययन केंद्र की लाइब्रेरी और महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र की लाइब्रेरी का विलय बीएचयू के केंद्रीय ग्रंथालय में कर दिया था। यह दोनों पुस्तकालय सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत संचालित होते थे। उस समय इस निर्णय के खिलाफ छात्रों ने विरोध भी जताया था और अलग से लाइब्रेरी बनाए रखने की मांग की थी। संकाय प्रमुख के पत्र के बाद बदला फैसला हाल ही में सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख ने कुलपति को पत्र लिखकर नेपाली लाइब्रेरी को पुनः शुरू करने की मांग की। इसके बाद कुलपति ने दो वर्ष पुराने आदेश में बदलाव करते हुए नेपाल अध्ययन केंद्र की लाइब्रेरी को पुनः संचालित करने की अनुमति दे दी। बीएचयू के कुलसचिव कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, लाइब्रेरी को शुरू करने में केंद्रीय ग्रंथालय तकनीकी और कार्मिक सहायता प्रदान करेगा। नेपाल से बीएचयू का पुराना संबंध नेपाल और बीएचयू का संबंध काफी पुराना और मजबूत रहा है। नेपाल के कई प्रमुख राजनीतिक नेता और बुद्धिजीवी यहां शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। इनमें नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बी.पी. कोइराला, नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की, वरिष्ठ नेता प्रदीप गिरि और रेवती रमण जैसे नाम शामिल हैं। सुशीला कार्की ने 1975 में बीएचयू से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की थी। उनके पति और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दुर्गा प्रसाद सुबेदी भी बीएचयू के पूर्व छात्र रहे हैं। आज भी बीएचयू में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों में सबसे अधिक संख्या नेपाल से आने वाले विद्यार्थियों की होती है। 50वें वर्ष में मिला नया जीवन नेपाल अध्ययन केंद्र की स्थापना वर्ष 1976 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के क्षेत्रीय अध्ययन कार्यक्रम के तहत सामाजिक विज्ञान संकाय में की गई थी। शुरुआत में यह केंद्र केवल नेपाल के अध्ययन तक सीमित था, लेकिन बाद में इसमें ट्रांस-हिमालय क्षेत्र और भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य देशों के अध्ययन को भी शामिल किया गया। समय के साथ इस केंद्र की शैक्षणिक गतिविधियों का दायरा बढ़ता गया और यहां हर वर्ष भारत के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थी अध्ययन के लिए प्रवेश लेते हैं।
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