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    BHU में प्रशासनिक नियुक्तियों की नई कवायद:वार्डन और पीआईसी पदों के लिए बनेगी सर्च कमेटी, 21 फरवरी तक जमा होगा आवेदन

    8 hours ago

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    काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में विश्वविद्यालय प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। विभिन्न संस्थानों और विभागों में वार्डन तथा प्रभारी अधिकारी (पीआईसी) के पदों पर नई नियुक्तियों की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में कुलपति की ओर से सभी संस्थानों के निदेशकों को उच्च स्तरीय नामांकन समिति गठित कर योग्य संकाय सदस्यों के नाम प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए हैं। चार प्रमुख श्रेणियों में होंगी नियुक्तियां विश्वविद्यालय प्रशासन ने चार प्रमुख श्रेणियों के अंतर्गत नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की है। इनमें मुख्य वार्डन एवं अतिथि गृहों के वार्डन, प्रभारी अधिकारी एलुमनाई अफेयर्स, प्रभारी अधिकारी शोध एवं औद्योगिक परामर्श सेल तथा प्रभारी अधिकारी संपदा शामिल हैं। मुख्य वार्डन और गेस्ट हाउस वार्डन को विश्वविद्यालय के छात्रावासों एवं अतिथि गृहों के समुचित प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। वहीं एलुमनाई अफेयर्स के प्रभारी अधिकारी को पूर्व छात्रों के साथ समन्वय स्थापित करने और विश्वविद्यालय से उनके संबंध मजबूत करने का दायित्व दिया जाएगा। शोध एवं औद्योगिक परामर्श सेल के प्रभारी को अनुसंधान गतिविधियों और उद्योग जगत से तालमेल बढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी होगी, जबकि संपदा प्रभारी को विश्वविद्यालय की परिसंपत्तियों के प्रबंधन का दायित्व सौंपा जाएगा। नामांकन समिति करेगी सिफारिश इन पदों के लिए संस्थान स्तर पर नामों की सिफारिश करने हेतु एक नामांकन समिति गठित की जाएगी। समिति के अध्यक्ष संबंधित संस्थान के निदेशक होंगे, जबकि डीन और वरिष्ठतम प्रोफेसर सदस्य के रूप में शामिल किए जाएंगे। प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर के योग्य शिक्षकों के नामों पर विचार किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग पैनल तैयार किया जाएगा और एक पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति दूसरे पद के लिए अनिवार्य रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। हर पद के लिए अधिकतम तीन नामों का पैनल बनाकर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। 21 फरवरी तक जमा करनी होंगी सिफारिशें चिकित्सा विज्ञान संस्थान, इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के निदेशकों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे 21 फरवरी तक अपनी सिफारिशें सीलबंद लिफाफे में प्रशासन को उपलब्ध कराएं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नामांकन का आधार केवल योग्यता और पद के अनुरूप उपयुक्तता होगी। नई प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल हालांकि, विश्वविद्यालय में चल रही इस नई नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कैंपस में चर्चा और असंतोष भी देखने को मिल रहा है। शिक्षकों का एक वर्ग इस प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर आशंकित है। उनका कहना है कि पूर्व में भी चीफ प्राक्टर और डीन ऑफ स्टूडेंट्स जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए गाइडलाइन जारी की गई थी, जिसके तहत विभिन्न संकायों से 50 से अधिक वरिष्ठ शिक्षकों के नाम प्रस्तावित हुए थे। चयन प्रक्रिया के बाद कई शिक्षकों ने आरोप लगाया था कि सुझाए गए नामों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। कुछ का यह भी आरोप है कि प्रशासन ने या तो बिल्कुल नए चेहरों को जिम्मेदारी दे दी या ऐसे नामों को चुना जिन्हें अकादमिक समुदाय में अपेक्षाकृत कम समर्थन प्राप्त था।
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