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    BHU ट्रॉमा सेंटर ने कुलपति और निदेशक को भेजा रिपोर्ट:मरीज शिफ्टिंग में नियम का नहीं हुआ था पालन,बारकोड आधारित रिस्टबैंड सख्ती से किया जाएगा लागू

    3 hours ago

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    बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में न्यूरो के मरीज के ऑर्थों में ऑपरेशन के बाद मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ट्रॉमा सेंटर से कुलपति और आईएमएस बीएचयू के निदेशक को एक आंतरिक रिपोर्ट भेजी गई है। इसमें लिखा है कि मरीज को शिफ्ट करने के दौरान सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही, शिफ्टिंग जूनियर रेजिडेंट ने बिना फैकल्टी से उचित समन्वय के कर दी। हैंडओवर के समय पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक नर्सिंग अधिकारी ने मरीज की पहचान में गड़बड़ी पाई, जिसे तुरंत ऑपरेटिंग टीम के संज्ञान में लाया गया। अब जानिए रिपोर्ट में क्या रहा रिपोर्ट में कहा गया है कि यह त्रुटि मरीज को स्थानांतरित करने और प्री-ऑपरेटिव तैयारी के दौरान हुई, जिसमें न्यूरो की मरीज को गलती से सर्जरी के लिए भेज दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक एनेस्थीसिया देने के बाद सर्जिकल टीम ने चीरा लगाना शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान सीनियर रेजिडेंट को ऑपरेशन स्थल पर फ्रैक्चर नहीं मिला, जिससे संदेह उत्पन्न हुआ। इसके बाद प्रो. अमित रस्तोगी को आगे के मूल्यांकन के लिए ऑपरेशन थिएटर में बुलाया गया। ये है किसी मरीज की सर्जरी की प्रक्रिया • जिस वार्ड में डॉक्टर के अंडर में मरीज भर्ती रहता है, वहां से ऑपरेशन की डेट तय होती है। इसके बाद टीम बनती है। • मरीज की सर्जरी से पहले बीपी, पल्स, ब्लड, एक्सरे सहित अन्य जरूरी जांच कराई जाती है। • रिपोर्ट सामान्य रहती है तो वार्ड से उसे ओटी में लाया जाता है। यहां भी बीपी की जांच होती है। • फाइनल ओटी में जाने के बाद जरूरत के हिसाब से एनीस्थीसिया भी देना पड़ता है। • कंसल्टेंट के निर्देशन में मरीज की सर्जरी शुरू होती है। रेजिडेंट, नर्सिंग, पैरामेडिकल स्टाफ भी रहते हैं। • ऑपरेशन के बाद कुछ समय तक महिला को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में रखा जाता है। • सब कुछ सामान्य रहता है तो डॉक्टर के निर्देश पर मरीज को वार्ड में भर्ती किया जाता है। बारकोड आधारित रिस्टबैंड सख्ती से किया जाएगा लागू वाराणसी। घटना के बाद अब ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। मरीज का सही सत्यापन हो, इसके लिए पहचान प्रक्रिया मजबूत की गई है। यहां कम से कम दो पहचान चिह्नों (नाम और यूएचआईडी) का उपयोग अनिवार्य होगा। बारकोड आधारित मरीज पहचान रिस्टबैंड लगेंगे। सर्जिकल सेफ्टी चेकलिस्ट को सख्ती से लागू किया जाएगा। ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह ने कहा कि एनेस्थीसिया देने से पहले चेकलिस्ट में ‘साइन-इन’ प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरा करनी होगी।
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