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    बृजभूषण बोले- अखिलेश यादव ने बड़प्पन दिखाया:कहा- बीजेपी के दिन बहुरे तो बहुत से लोग किनारे किए गए, नए लोग पुरानों को विरोधी मानते हैं

    1 hour ago

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    भारतीय जनता पार्टी जब तक बैक फुट पर थी तब तक लल्लू राम जी नेता थे, जब से बीजेपी के दिन बहुरे तो लल्लू राम ही नहीं बहुत से लोग किनारे कर दिए गए। पार्टी में जो नए लोग आए हैं वो पुराने कार्यकर्ताओं को अपना नहीं मानते, विरोधी मानते हैं। अखिलेश यादव भाजपा विधायक से मिलने अस्पताल गए, जिससे उन्होंने बड़प्पन का परिचय दिया है। उनके जाने के बाद अब बीजेपी के नेताओं की कतार लग गई है। ये बातें कैसरगंज लोकसभा सीट से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहीं। पश्चिम बंगाल में हो रहे को लेकर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि बंगाल का मुझे बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है, लेकिन सूचना मिली है कि बीजेपी वहां अच्छा चुनाव लड़ रही है। अब पढ़िए सांसद ने क्या कहा… पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने आज अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत की। अखिलेश यादव का पुतला जलाते समय भाजपा विधायक अनुपमा जायसवाल झुलस गई थीं। उनसे मिलने अखिलेश अस्पताल पहुंचे थे। इस पर पूर्व सांसद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी से अनुपमा जायसवाल पूर्व में मंत्री भी रह चुकी हैं। दुर्भाग्य से एक प्रोटेस्ट के दौरान वह झुलस गई थीं। मुझे जानकारी है कि शायद अखिलेश यादव का ही पुतला बीजेपी के कार्यकर्ता जल रहे थे। विधायक के लिए मेरी संवेदना है कि वह जल्दी स्वस्थ होकर के आएं। मौका मिलेगा तो हम भी उनसे मिलने जाएंगे। दूसरा, जहां तक अखिलेश यादव के मुलाकात की बात है तो राजनीति की यही एक स्वस्थ परंपरा है। बोले- अब बीजेपी नेताओं की वहां कतार लग रही यह परंपरा पहले से रही है। एक दूसरे के सुख-दुख में हाल-चाल लेना। अखिलेश यादव ने वहां जाकर के अपने बड़प्पन का परिचय दिया है। उसके बाद से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की भी वहां कतार लग गई है। सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना अखिलेश यादव से पहले महिला नेता से मिलने गए थे। अब जैसे-जैसे लोग खाली हो रहे हैं तो शायद मिलने जाएंगे। अभी तक कोई बंगाल में था, कोई कहीं था। मौका मिलेगा तो हम भी जाएंगे। लेकिन, अखिलेश यादव ने जाकर के वहां अपने बड़प्पन का परिचय दिया है। कहा- बंगाल में बीजेपी अच्छा चुनाव लड़ रही वहीं, पश्चिम बंगाल में हो रहे दूसरे चरण के चुनाव को लेकर कहा कि बंगाल का मुझे बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है। लेकिन समाचार जो निकल कर के आ रहे हैं बीजेपी वहां पर बहुत अच्छी लड़ाई लड़ रही है। गृह मंत्री अमित शाह वहां पर डेरा डाले हुए हैं। एक वर्ग ऐसा है जिसे आप कह सकते हैं 10, 20, 30 साल से वहां पर परेशान चल रहा है। वहां पर तुष्टिकरण की राजनीति होती है। यही काम वहां पर कम्युनिस्ट पार्टी करती थी। यही काम कांग्रेस करती थी, यही काम ममता बनर्जी कर रही हैं। अब देखिए वहां पर क्या होता है, लेकिन लड़ाई अच्छी है। मारपीट वहां पर छोटी बात है सेंट्रल की फोर्स अगर ना होती वहां पर तो चुनाव न हो पता। पुराने नेताओं को विरोधी मानते हैं नए कार्यकर्ता वहीं, दलित नेता लल्लू राम कनौजिया के निधन पर बीजेपी के बड़े नेताओं के न पहुंचने पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह बड़े दलित नेता थे। तीन बार चुनाव लड़े थे जब तक भारतीय जनता पार्टी बैक फुट पर थी तब तक लल्लू राम जी नेता थे, जब भारतीय जनता पार्टी का दिन बहुरा तो लल्लू राम ही नहीं बहुत से लोग किनारे कर दिए गए। लालू राम जी का निधन हुआ तो मैं गया था। सब लोग जानते हैं अगर मैं घर पर हूं गोंडा, बलरामपुर बहराइच अयोध्या में जो भी पुराने कार्यकर्ता हैं उनके किसी के यहां कुछ होता है तो मैं जाता हूं और परिवार को सांत्वना देता हूं। लेकिन, जो नए लोग आए हैं यह भारतीय जनता पार्टी में वो पुराने कार्यकर्ताओं को अपना आदमी नहीं मानते हैं बल्कि विरोधी मानते हैं। वहीं, लगातार मंचों से क्षत्रिय नेताओं के सम्मान और 2027 में आजमाने वाले बयान पर बृजभूषण ने कहा कि उस बात का भाव समझिए, जो बोलना था बोल गए। अब उस पर चर्चा चल रही है बहस हो रही है। -------------------- यह खबर भी पढ़ें… क्या फिर से सपाई होंगे बृजभूषण सिंह?:अयोध्या और देवीपाटन मंडल की सीटों पर मांग रहे हिस्सेदारी, बेटों पर फंसा पेंच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह सपा का दामन थाम सकते हैं। अखिलेश यादव के साथ उनकी बातचीत आखिरी दौर में चल रही है। सब कुछ ठीक रहा, तो सितंबर-अक्टूबर तक बृजभूषण सपा के मंच पर दिखाई देंगे। अब सवाल ये है कि आखिर बृजभूषण पाला क्यों बदलना चाहते हैं? सपा में आने की उनकी शर्त क्या है? बृजभूषण का प्रभाव किन जिलों में है? वे कितने टिकट में दखलअंदाजी चाहते हैं? सबसे जरूरी यह कि अखिलेश यादव क्या चाहते हैं? इन तमाम सवालों के जवाब खोजती पढ़िए ये रिपोर्ट…
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