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    बिजनौर डीएम का सख्त रुख:बोले- सरकारी योजनाओं में असहयोगी बैंकर्स को जिले में नहीं रहने दिया जाएगा

    7 hours ago

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    बिजनौर की जिलाधिकारी जसजीत कौर ने सरकारी योजनाओं में असहयोग करने वाले बैंकर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसे बैंकर्स को जिले में नहीं रहने दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने राष्ट्रीयकृत बैंकों जैसे भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और निजी बैंकों की उन शाखाओं के प्रबंधकों के नाम मांगे हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत लाभार्थियों को अब तक ऋण स्वीकृत नहीं किया है। इन शाखा प्रबंधकों के विरुद्ध शासन और संबंधित बैंक के उच्च अधिकारियों को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। उन्होंने बैंक नोडल अधिकारियों को डीएलआरसी (जिला स्तरीय समीक्षा समिति) की बैठक में स्वयं उपस्थित रहने या पूरी जानकारी के साथ नामित अधिकारी को भेजने का निर्देश दिया। समीक्षा के दौरान, दिसंबर 2025 तक एसीपी (वार्षिक ऋण योजना) के तहत 2025-26 के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष यूको बैंक और इंडियन बैंक की उपलब्धि 40 प्रतिशत से कम पाई गई। निजी क्षेत्र के बैंकों में नैनीताल बैंक ने मात्र 3 प्रतिशत, यस बैंक ने 4 प्रतिशत और आईडीबीआई ने 11 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की, जिस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी बैंकों को निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए। ऋण जमा अनुपात (सीडी रेश्यो) की समीक्षा करते हुए, 40 प्रतिशत से कम लक्ष्य प्राप्त करने वाले बैंकर्स को राष्ट्रीय लक्ष्य के सापेक्ष सीडी रेश्यो पूरा करने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि उन्होंने डीएलआरसी की प्रत्येक बैठक में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को लाभान्वित करने के लिए लगातार निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद, कुछ बैंकों ने अभी तक एक भी युवा को इस योजना से नहीं जोड़ा है। उन्होंने बैंकर्स के इस कृत्य को 'अत्यंत आपत्तिजनक और अशोभनीय' बताया। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि महत्वपूर्ण रोजगारपरक शासकीय योजनाओं में मनमानी करने वाले बैंकर्स को जिले में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 1750 के लक्ष्य के सापेक्ष वर्तमान तक 2563 आवेदन बैंकों को प्रेषित किए गए। इनमें से 1026 स्वीकृत आवेदनों में से 1008 पर ऋण वितरण किया जा चुका है। 597 आवेदन स्वीकृति के लिए तथा 110 आवेदन ऋण वितरण के लिए लंबित हैं, जबकि 1220 आवेदन निरस्त किए गए हैं। योजना अंतर्गत 1001 ऋण खातों में रुपए 429.36 लाख मार्जिन मनी के रूप में क्लेम भी किए गए। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि बैंकर्स सरकार द्वारा संचालित योजनाओं में ऋण देने में लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों के स्वरोजगार के लिए जो योजनाएं चला रही हैं उसमें बैंकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है, इसलिए बैंकर्स सरकारी योजनाओं के ऋणों की फाइलों को पूरी गुणवत्ता के आधार पर स्वीकृत कर लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने समीक्षा करते हुए पाया कि वार्षिक ऋण योजना के अंतर्गत माह जून, 2025 तक प्रथमिकता क्षेत्र में वार्षिक लक्ष्य 10010.59 करोड़ के सापेक्ष 2850.65 करोड़ की उपलब्धि प्राप्त हुई, जो कि वार्षिक लक्ष्य का 28.47 प्रतिशत है। व्यवसायिक बैंकों ने 23.52 प्रतिशत, ग्रामीण बैंकों ने 22.29 तथा सहकारी बैंकों ने लक्ष्य के सापेक्ष 70.19 की उपलब्धि प्राप्त की। बैठक में उन्होंने राष्ट्रीय शहरी एवं ग्रामीण आजीविका, जिला उद्योग केंद्र की योजनाएं, पीएम विश्वकर्मा योजना, अटल पेंशन योजना, ओ0डी0ओ0पी0, मुख्यमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना सहित सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं में उपलब्धि की समीक्षा की। उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिये कि बैंकर्स गरीबों के कल्याणार्थ योजनाओं पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित करें और उनके स्वरोजगार जो प्रकरण लम्बित है, उनका पूरी गुणवत्ता के आधार पर शत प्रतिशत रूप से निस्तारण करना सुनिश्चित करें। इस अवसर पर जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अखिल कुमार सिंह, खादी ग्रामोद्योग, डीडीएम नाबार्ड सहित समस्त बैंकर्स एवं संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
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