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    फिर टली सबा और मसूद की जमानत याचिका पर सुनवाई:रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किए जाने पर पुलिस को लगी फटकार, अगली तिथि 18 मार्च निर्धारित

    2 hours ago

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    जिला कारागार मेरठ में बंद पाकिस्तान मूल की सबा फरहत की जमानत याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई नहीं हो सकी। पुलिस ने इस बार भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की, जिस पर कोर्ट भी सख्त दिखाई दी। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए अगली तिथि पर विवेचक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। याचिका पर सुनवाई की अगली तिथि 18 मार्च निर्धारित की गई है। पहले जानते हैं क्या है मामला देहलीगेट निवासी रुकसाना ने इसी क्षेत्र में परिवार संग रह रही पाकिस्तान मूल की महिला सबा फरहत पर गैरकानूनी तरीके से भारत में रहकर यात्रा करने व फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनवाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के आधार पर पुलिस ने सबा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज सबा फरहत की गिरफ्तारी के बाद उनके एडवोकेट वीके शर्मा ने कोर्ट में बहस की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कुछ साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट भी किया कि सबा की तरफ से कभी वोटर आईडी कार्ड के लिए आवेदन नहीं किया गया है। यह भी बताया कि कभी कोई यात्रा भी नहीं की है। उन्होंने सबा फरहत को जमानत दिए जाने की अपील की हालांकि कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। मसूद को मुलजिम बनाने की तैयारी इस मुकदमे में सबा फरहत के अलावा उनकी बेटी एमन को नामजद किया गया था लेकिन जल्द ही एमन का नाम केस से वापस ले लिया गया। कोर्ट के सामने इसकी पुष्टि की गई। सूत्र बताते हैं कि हाल ही में मुकदमे में सबा फरहत के पति मसूद फरहत का नाम शामिल किया गया है। मसूद का नाम एमन के जन्म प्रमाण पत्र से जोड़ा गया है। आरोप है कि मसूद ने पाकिस्तान में जन्मी अपनी बेटी एमन का मेरठ के एक निजी अस्पताल से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था। अग्रिम जमानत के लिए आवेदन सबा के एडवोकेट वीके शर्मा ने बताया कि मसूद के नाम की चर्चा होते ही उन्होंने उनकी अग्रिम जमानत याचिका के लिए आवेदन कर दिया। मंगलवार को सुनवाई होती लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं भेजी। नतीजा यह हुआ कि कोर्ट ने 12 मार्च की तिथि निर्धारित कर दी। अब की गई 18 मार्च तिथि निर्धारित गुरुवार को सबा फरहत की जमानत व उनके पति मसूद की अग्रिम जमानत पर सुनवाई होनी थी लेकिन इस बार भी पुलिस की तरफ से कोर्ट में रिपोर्ट नहीं भेजी गई। इसका हवाला देकर वादी पक्ष के एडवोकेट ने स्थगन की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर 18 मार्च तिथि निर्धारित कर दी। विवेचक को किया गया तलब सबा फरहत व मसूद के एडवोकेट वीके शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई। बताया कि उनके पास जो दस्तावेज हैं, वह विभाग से सर्टिफाइड हैं। फिर पुलिस उस काम को कराने में इतना समय क्यों लगा रही है? वीके शर्मा ने बताया कि उनका पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने एक लिखित टिप्पणी की है और अगली तिथि पर इस मुकदमे के विवेचक को संपूर्ण दस्तावेजों के साथ तलब किया है।
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