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    बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ ठगे:नोएडा में सिम के गलत इस्तेमाल का डर दिखाया, 13 से 25 फरवरी के बीच पैसे किए ट्रासंफर

    5 hours ago

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    साइबर ठगों ने एक कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर करीब 1 करोड़ 29 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी है। मामला सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाने का है। पुलिस को दी शिकायत में ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर निवासी ने बताया कि इसी साल छह फरवरी को उनके पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताया और कहा कि पीड़ित के नाम पर एक सिम कार्ड जारी हुआ है, जिसका इस्तेमाल गैरकानूनी कामों में हो रहा है। इसके बाद ठग ने डराते हुए कहा कि मामला गंभीर है और जांच एजेंसियां इसमें लगी हुई हैं। वीडियो कॉल में कोर्ट जैसी सेटिंग दिखी कुछ ही देर बाद ठगों ने वीडियो कॉल कर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट में होने की बात कही। वीडियो कॉल में उन्होंने कोर्ट जैसी सेटिंग दिखाई, जहां एक व्यक्ति जज की तरह बैठा था और उसके पास एक अन्य व्यक्ति पुलिस अधिकारी की वर्दी में खड़ा था। इस दौरान पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि अगर वह सहयोग नहीं करेगा तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बैंक खातों की जांच का होगी ठगों ने पीड़ित पर लगातार दबाव बनाया और कहा कि उसके बैंक खातों की जांच होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक उसे घर से बाहर नहीं जाना है और फोन कॉल चालू रखना है। इसके बाद ठगों ने पीड़ित से कहा कि वह अपने खाते का पैसा वेरिफिकेशन के लिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दे। यह भरोसा भी दिलाया गया कि जांच के बाद पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा। 13 से 25 फरवरी तक पैसे किए ट्रांसफर डर के कारण पीड़ित ने अलग-अलग तारीखों में कई बार पैसे ट्रांसफर किए। 13 फरवरी 2026 को करीब 51.95 लाख रुपये, 19 फरवरी को 48.95 लाख रुपये, 21 फरवरी को 10.95 लाख रुपये, 25 फरवरी को 17.20 लाख रुपये और 26 फरवरी को 56 हजार 962 रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 1 करोड़ 29 लाख 61 हजार 962 रुपये ठगों के खातों में चले गए। 12 मार्च को दी शिकायत कुछ दिन बाद ठगों ने पीड़ित को सुप्रीम कोर्ट और मुंबई पुलिस के नाम से फर्जी लेटर भी भेजे और कहा कि उसे नो ड्यूज सर्टिफिकेट मिल गया है और पैसा जल्द वापस कर दिया जाएगा। लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी पैसा वापस नहीं आया, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने 12 मार्च को ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और पुलिस से मदद मांगी। नोएडा में डिजिटल अरेस्ट के पुराने मामले
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