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    BJP सहयोगी दलों को 80 सीटें दे सकती है:खुद 328 सीटों पर लड़ेगी; रालोद, सुभासपा, अपना दल इतने अहम क्यों?

    7 hours ago

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    भाजपा पिछले 4 चुनाव के इतिहास में पहली बार सबसे कम सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 403 विधानसभा सीटों में 75 से 80 सीटें अपने सहयोगी दलों को दे सकती है। भाजपा खुद 323 से 328 सीटों पर कैंडिडेट उतार सकती है। संगठन में सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और महामंत्री संगठन बीएल संतोष 4 और 5 जुलाई को लखनऊ दौरे पर थे। उन्होंने होटल ताज में NDA के सहयोगी दलों के साथ मुलाकात की थी। रालोद, अपना दल (एस), सुभासपा और निषाद पार्टी के नेताओं ने सीट शेयरिंग पर कहा था- चुनाव आने वाले हैं। अगर सीटों का बंटवारा थोड़ा पहले किया जाए, तो जमीन पर टकराव की स्थिति नहीं बनेगी। तैयारी का वक्त मिलेगा। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। चुनाव के बाद सुभासपा और रालोद NDA में शामिल हो गए थे। अब 4 सहयोगी दल हैं। भाजपा नेतृत्व नहीं चाहता कि सीटों के बंटवारे में कोई असंतोष बने या सहयोगी दल दूर जाएं। सीटों पर दावेदारी, सहयोगी दलों को कितनी मिल सकती हैं… रालोद- रालोद ने सपा के साथ गठबंधन में 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 8 कैंडिडेट जीते थे। उपचुनाव में एक और सीट रालोद को मिली थी। अब पार्टी 9 मौजूदा सीटों के साथ लगभग 20 अन्य सीटों पर दावा कर रही है। सीटें मिलने की संभावना- 20 सीटें मिल सकती हैं। अपना दल (एस)- 2022 विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) 17 सीटों पर लड़ी। 12 सीटें जीती थीं। एक और सीट उपचुनाव में हासिल की थी। अब 13 मौजूदा सीटों के अलावा 25 अतिरिक्त सीटों पर दावेदारी की है। सीटें मिलने की संभावना- 25 सीटें मिल सकती हैं। सुभासपा- 2022 में सपा गठबंधन में 17 सीटों पर लड़ी थी। 6 सीटें जीती थीं। अब 65 सीटों पर तैयारी कर रही है। सीटें मिलने की संभावना- गठबंधन में 15 से 17 सीटें मिल सकती हैं। निषाद पार्टी- 2022 में पार्टी 16 सीटों पर लड़ी, 6 सीटें जीती थीं। अब 30 सीटों पर दावेदारी कर रही है। सीटें मिलने की संभावना- गठबंधन में 15 से 18 सीटें मिल सकती हैं। इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- सहयोगी दलों को नाराज न करने की मजबूरी क्या? पश्चिमी यूपी में जाट वोटबैंक के लिए भाजपा पूरी तरह रालोद पर निर्भर है। वहीं, पूर्वांचल के अति-पिछड़े वोटबैंक को साधे रखने के लिए राजभर और निषाद पार्टी की रैलियां भाजपा पर दबाव बना रही हैं। सपा के PDA की काट के लिए ये सहयोगी दल अहम हो जाते हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा सहयोगी दलों को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती। सीट बंटवारे में टकराव टालने और सहयोगियों के बगावती तेवरों को रोकने के लिए भाजपा को 70 से 90 सीटें देने पर मजबूर होना पड़ रहा है। भाजपा का प्लान- हारी हुई सीटें देकर साधेंगे सहयोगी दल भाजपा अपनी मौजूदा 258 सीटों को बचाकर रखने की रणनीति पर काम कर रही है। योगी सरकार के मंत्रियों के अनुसार, 2022 में भाजपा जिन 115 सीटों पर हारी थी, उनमें से 65 से 70 सीटें 'C' श्रेणी की हैं। यानी जहां सामाजिक समीकरणों के कारण जीत कठिन मानी जाती है। भाजपा सहयोगियों को यही सीटें देना चाहती है, जिन पर वह 2017 या 2022 में चुनाव हारी थी। भाजपा के सामने मुश्किल क्या? रालोद 33 सीटों पर लड़कर 8 जीती थी। जिन 25 सीटों पर वह हारी, वहां उनका कैंडिडेट नंबर- 2 की पोजिशन पर था। जिन 8 सीटों पर वह जीती, वहां भाजपा का कैंडिडेट नंबर- 2 पर था। कम अंतर से हार-जीत वाली सीटों पर प्रत्याशी तय करते वक्त बगावत का खतरा हो सकता है। पूर्वांचल की जिन सीटों पर सुभासपा और निषाद पार्टी दावा ठोक रहे हैं, उनमें कई सीटें भाजपा के लिए आसान मानी जाती हैं। अगर ये सहयोगी दलों को दी जाती है, तो यहां भी पार्टी को अपने नेताओं की नाराजगी को संभालना होगा। बगावत रोकने के लिए कार्यकर्ताओं का समायोजन जिन क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ताओं की सीटें सहयोगी दलों के पास जाएंगी, वहां बगावत रोकने के लिए खास योजना बनाई गई है। ऐसे कार्यकर्ताओं को सरकार बनने पर विधान परिषद (MLC) भेजने या राजनीतिक नियुक्तियों और आयोगों में समायोजित करने का आश्वासन दिया जा रहा है। सिंबल और प्रत्याशी को लेकर रणनीति क्या कहते हैं सहयोगी नेता? ------------------------------- यह खबर भी पढ़ें - अखिलेश के सहयोगी दल चवन्नी से रुपया बने या नहीं, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 1 से 6, बसपा 0 से 10 हुई कुछ गठबंधन ऐसे किए हम लोगों ने, जाने कहां-कहां से आ गए थे गठबंधन वाले। बताओ, हमने चवन्नी का रुपया बना दिया, तब भी हमें छोड़कर चले गए। - अखिलेश यादव, 16 अगस्त सपा प्रमुख का यह बयान राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी पर तंज था। अब जयंत के समर्थक विरोध कर रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…
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