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    बलूच आर्मी ने कमांडर इन चीफ बशीर को निकाला:पाकिस्तान में बड़े हमलों को अंजाम दिया; फिल्म धुरंधर के किरदार हमजा से होती थी तुलना

    22 hours ago

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    बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के कमांडर-इन-चीफ बशीर जेब को पद से हटा दिया गया है। बशीर जेब ने पाकिस्तान में कई बड़े हमलों की साजिश रचकर पहचान बनाई थी। बलूचिस्तान में हथियारबंद लड़ाकों के साथ बशीर जेब के वीडियो वायरल हुए तो उनकी तुलना फिल्म 'धुरंधर' के किरदार हमजा अली मजारी से होने लगी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नाकाम ऑपरेशन और महिला आत्मघाती हमलावरों के इस्तेमाल को लेकर संगठन में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ रही थी। पिछले महीने ही हटाए गए, खबर अब आई BLA ने 3 नवंबर को प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि बशीर जेब अब संगठन के कमांडर-इन-चीफ नहीं रहेंगे। यह बयान बलूचिस्तान पोस्ट में प्रकाशित हुआ था। संगठन ने कहा कि बशीर जेब के पास मौजूद सभी प्रशासनिक, सैन्य और नीतिगत फैसले लेने के अधिकार अब सीनियर कमांड काउंसिल को सौंप दिए गए हैं। नया कमांडर नियुक्त होने तक संगठन के सभी बड़े फैसले यही परिषद लेगी। बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, बशीर जेब को हटाने का फैसला 16 अक्टूबर को हुई BLA की शीर्ष समितियों की बैठक में लिया गया था। बैठक में शामिल कमांडरों ने सर्वसम्मति से नेतृत्व में बदलाव को मंजूरी दी थी। BLA ने इस बदलाव को संगठन के नियमों के मुताबिक शांतिपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन बताया। संगठन का दावा है कि बशीर जेब को हटाने के फैसले से न तो संगठन में कोई बंटवारा हुआ और न ही कमांडरों के बीच टकराव की स्थिति बनी। हटाने की वजह और बशीर जेब का ठिकाना साफ नहीं BLA ने बशीर जेब को पद से हटाने के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई है। संगठन ने सिर्फ इतना कहा कि यह फैसला उसके 2018 में बनाए गए संवैधानिक नियमों के तहत लिया गया है। इन नियमों के मुताबिक, कोई भी कमांडर जीवनभर संगठन के शीर्ष पद पर नहीं रह सकता। वहीं, बशीर जेब के मौजूदा ठिकाने के बारे में भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि वे अभी आजाद हैं, हिरासत में हैं या कहीं और चले गए हैं। उनके घायल होने या किसी दूसरी जगह इलाज कराने की खबरों की भी पुष्टि नहीं हुई है। बशीर जेब की लीडरशिप में BLA के बड़े हमले BLA के लगातार हमलों से बलूचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पाकिस्तान की सेना और सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। सेना प्रमुख असीम मुनीर के नेतृत्व में सुरक्षा बलों को संगठन के खिलाफ लगातार अभियान चलाने पड़े। ऐसे में बशीर जेब को अचानक पद से हटाए जाने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑपरेशन हेरोफ-2 की नाकामी से BLA में बढ़े मतभेद बशीर जेब को हटाने की एक वजह संगठन की सैन्य रणनीति को लेकर अंदरूनी मतभेद भी हो सकती है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन हेरोफ-2 के नतीजों को लेकर BLA के शीर्ष कमांडरों में कई महीनों से नाराजगी थी। ऑपरेशन हेरोफ-2 की शुरुआत 31 जनवरी 2026 को हुई थी। इसके तहत BLA ने बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी ठिकानों पर एक साथ कई हमले किए थे। लेकिन पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई में संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बड़ी संख्या में लड़ाकों को एक साथ उतारने पर विवाद PICSS के मुताबिक, ऑपरेशन के नतीजों को लेकर बशीर जेब और BLA की विशेष आत्मघाती इकाई मजीद ब्रिगेड के प्रमुख कैप्टन रहमान गुल के बीच मतभेद पैदा हो गए थे। संगठन के अंदरूनी मामलों की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से PICSS ने बताया कि रहमान गुल ने बशीर जेब की हमले करने की रणनीति पर सवाल उठाए थे। उनका मानना था कि एक साथ कई जगहों पर बड़ी संख्या में लड़ाकों को भेजने से वे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के निशाने पर आसानी से आ गए। रहमान गुल इसके बजाय छोटे-छोटे समूहों में लड़ाकों को भेजने के पक्ष में थे। उनका मानना था कि ऐसे समूह अचानक हमला करके तुरंत अपनी जगह बदल सकते हैं। इससे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए उन्हें पकड़ना मुश्किल होता। एक हफ्ते में 215 लड़ाके मारे जाने का दावा ऑपरेशन हेरोफ-2 के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने BLA के खिलाफ जवाबी अभियान चलाए। PICSS के अनुमान के मुताबिक, इन कार्रवाइयों में एक हफ्ते के भीतर BLA के कम से कम 215 लड़ाके मारे गए थे। वहीं, संगठन ने 96 लड़ाकों की मौत स्वीकार की थी। थिंक टैंक के मुताबिक, एक साथ बड़ी संख्या में लड़ाकों को अलग-अलग जगहों पर तैनात करने से पाकिस्तानी सेना को उनके ठिकानों और गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिली। इससे सुरक्षा बलों के लिए उन पर कार्रवाई करना आसान हो गया। महिला आत्मघाती हमलावरों के इस्तेमाल पर भी नाराजगी बशीर जेब के नेतृत्व में BLA ने आत्मघाती हमलों का इस्तेमाल बढ़ा दिया था। इनमें महिला आत्मघाती हमलावरों को भी शामिल किया गया। इस रणनीति की संगठन के बाहर और अंदर दोनों जगह आलोचना हुई। BBC उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन में लोगों का मानना था कि महिला आत्मघाती हमलावरों के इस्तेमाल से पूरे बलोच आंदोलन को नुकसान पहुंचा। खासकर बलोचिस्तान के बाहर इस आंदोलन को मिलने वाला समर्थन कमजोर हुआ। पाकिस्तानी रिसर्चर मलिक सिराज अकबर के मुताबिक BLA ऐसा जानबूझकर कर रहा था, क्योंकि महिला हमलावरों वाले हमलों को मीडिया में ज्यादा जगह मिलती है। कायद-ए-आजम यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ खुर्रम इकबाल ने बीबीसी उर्दू से कहा कि BLA के हमले जितने हिंसक होते गए, बलोचिस्तान के बाहर उसे मिलने वाला समर्थन उतना ही कम होता गया। उनके मुताबिक, आत्मघाती हमलों को दुनिया में अच्छा नहीं माना जाता। फरवरी से ही फैसलों में घटने लगा था जेब का दखल PICSS की रिपोर्ट के मुताबिक, इन मतभेदों का असर फरवरी 2026 से ही दिखने लगा था। बशीर जेब को धीरे-धीरे संगठन के बड़े फैसले लेने की प्रक्रिया से अलग किया जाने लगा। इसके बाद कैप्टन रहमान गुल की सैन्य अभियानों और संगठन के दूसरे कामकाज में भूमिका बढ़ गई। हालांकि, BLA ने बशीर जेब को हटाने की वजह के तौर पर ऑपरेशन हेरोफ-2 या कमांडरों के बीच किसी विवाद का जिक्र नहीं किया है। यह जानकारी थिंक टैंक की रिपोर्ट और उसके सूत्रों पर आधारित है। ---------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… ईरान ने अमेरिका को 7 शर्तों वाला नया प्रस्ताव भेजा:कहा- ये पूरी हुई तभी बातचीत करेंगे, होर्मुज खोलने से भी इनकार अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के बीच ईरान ने अमेरिका को नया परमाणु प्रस्ताव भेजा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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