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    बुलंदशहर गैंगरेप-हत्या में चश्मदीद बयान से पलटी:कोर्ट में आरोपियों को पहचानने से इनकार, दोस्त को फेंकने, चलती कार में दरिंदगी का आरोप लगाया था

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    बुलंदशहर के चर्चित चलती कार में गैंगरेप और युवती की हत्या के मामले में पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य पीड़िता और चश्मदीद गवाह अपने बयान से पलट गई है। अदालत में गवाही के दौरान पीड़िता ने आरोपियों को पहचानने से साफ इनकार कर दिया, जिससे पुलिस और अभियोजन पक्ष की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। ​यह पूरा घटनाक्रम गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर से शुरू हुआ था। प्रतापगढ़ की रहने वाली 17 वर्षीय किशोरी अपनी सहेली के साथ नौकरी के सिलसिले में अमित नाम के युवक के बुलावे पर कार में सवार हुई थी। आरोप है कि कार में अमित और उसके साथी संदीप ने दोनों युवतियों को जबरन बीयर पिलाई और विरोध करने पर मारपीट की। इसके बाद मेरठ के जानी थाना क्षेत्र में चलती कार से पीड़िता की सहेली को धक्का देकर नीचे फेंक दिया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने नाबालिग किशोरी के साथ चलती कार में गैंगरेप किया। ​सात मई 2025 की सुबह जब आरोपी खुर्जा क्षेत्र में रुके तो किशोरी किसी तरह जान बचाकर भागी और खुर्जा नगर कोतवाली पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपियों अमित और संदीप समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जांच के दौरान पुलिस ने दरोगा के भाई रिंकू को भी गिरफ्तार किया था, जो वीडियो कॉल के जरिए आरोपियों के संपर्क में था और ब्लैकमेलिंग के लिए पीड़िता के आपत्तिजनक फोटो अपने पास रखे थे। ​पुलिस ने सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया था, लेकिन कोर्ट में मुख्य पीड़िता के होस्टाइल होने से अभियोजन पक्ष के सामने कड़ा संकट खड़ा हो गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार राघव का कहना है कि मुख्य गवाह के मुकर जाने का केस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, हालांकि अब पुलिस और अभियोजन को फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल रिकॉर्डिंग और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के दम पर अदालत में दोष सिद्ध करना होगा।
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