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    पोप लियो को लंग कैंसर, निचला हिस्सा निकाला गया:ट्यूमर की सर्जरी के दौरान पता चला; मई 2025 में सर्वोच्च धर्मगुरु चुने गए थे

    2 hours ago

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    पोप लियो XIV को लंग कैंसर होने की पुष्टि हुई है। वेटिकन ने मंगलवार को मेडिकल बुलेटिन जारी कर इसकी जानकारी दी। दरअसल 71 साल के पोप के फेफड़े में ट्यूमर मिला था, जिसे निकालने के लिए रोम के एक अस्पताल में उनकी 90 मिनट तक सर्जरी की गई। सर्जरी के दौरान उनके दाएं फेफड़े का निचला हिस्सा निकाला गया। जांच में इसमें कैंसर होने की पुष्टि हुई। वेटिकन के मुताबिक, सर्जरी सफल रही और इस दौरान कोई परेशानी नहीं आई। सर्जरी के बाद पोप को होश भी आ गया था। पोप लियो XIV को 8 मई 2025 को कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था। वे अमेरिका से आने वाले पहले पोप हैं। ऑपरेशन से पहले भी कैंसर का शक था पोप लियो XIV ने रविवार को अपनी सर्जरी की जानकारी दी थी। उन्होंने रोम में सेंट पीटर्स स्क्वायर के सामने बालकनी से लोगों को संबोधित किया था। पोप ने बताया था कि उनके फेफड़े की गांठ सीमित है और शुरुआती चरण में ही इसका पता चल गया। डॉक्टरों ने उन्हें गांठ हटाने के लिए सर्जरी कराने की सलाह दी थी। फेफड़ों में बनने वाली छोटी गांठों को पल्मोनरी नोड्यूल कहा जाता है। ये गांठें आम होती हैं और जरूरी नहीं कि कैंसर वाली हों। वेटिकन ने बताया कि पोप के फेफड़े में गांठ मिलने के बाद हुई जांच में पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा यानी कैंसर की पुष्टि हुई। ऑपरेशन से पहले की जांच में भी इसी तरह के कैंसर का शक था। कैंसर फैलने की जांच कर रहे डॉक्टर पोप के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सुनकर बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचे। लोगों ने घंटों इंतजार किया। पोप की कार पहुंचने पर उन्होंने उनका स्वागत किया। पोप ने भी कार की खिड़की से हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया।ट AFP के मुताबिक, उनकी सफल सर्जरी के बाद डॉक्टर अब जांच कर रहे हैं कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में तो नहीं फैला है। पोप को उनके स्वास्थ के चलते आराम करने की सलाह दी गई है। उनके सार्वजनिक कार्यक्रम भी 20 अक्टूबर तक रद्द कर दिया गया है। जानिए पोप कौन होते हैं और कैसे चुने जाते हैं… पोप कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्मगुरु होते हैं। उन्हें दुनिया भर के कैथोलिक ईसाइयों का आध्यात्मिक नेता माना जाता है। जिस तरह हिंदू धर्म में शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक गुरु होते हैं, उसी तरह कैथोलिक ईसाई धर्म में पोप का बहुत अहम स्थान है। हालांकि, दोनों की भूमिका और अधिकार अलग-अलग हैं। पोप वेटिकन सिटी में रहते हैं। यह इटली की राजधानी रोम के अंदर बसा दुनिया का सबसे छोटा देश है। पोप कैथोलिक चर्च के प्रमुख होते हैं और दुनिया भर के चर्चों, पादरियों और बिशपों का मार्गदर्शन करते हैं। वे धार्मिक नियमों, ईसाई शिक्षाओं और नैतिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। वे युद्ध, गरीबी और शांति जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी लोगों से अपील करते हैं। गुप्त मतदान से चुने जाते हैं पोप जब किसी पोप की मृत्यु हो जाती है या वे अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं, तब नए पोप को चुनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके लिए 80 साल से कम उम्र के धर्मगुरु वेटिकन में इकट्ठा होते हैं और गुप्त मतदान करते हैं। इस प्रक्रिया को कॉन्क्लेव कहते हैं। दो-तिहाई वोट मिलने पर नए पोप का चुनाव होता है। चुनाव की खबर वेटिकन की सिस्टीन चैपल की चिमनी से निकलने वाले सफेद धुएं के जरिए दुनिया को दी जाती है। काला धुआं निकलने का मतलब है कि अभी नया पोप नहीं चुना गया है। पोप लियो का जन्म अमेरिका के शिकागो में हुआ था पोप लियो XIV का असली नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रेवोस्ट है। उनका जन्म 14 सितंबर 1955 को अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था। वे कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धार्मिक पद पर हैं। 8 मई 2025 को उन्हें कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था। उनसे पहले पोप फ्रांसिस इस पद पर थे। पोप बनने से पहले लियो XIV ने कई साल तक पादरी, मिशनरी और बिशप के रूप में काम किया। उन्होंने अपनी जिंदगी का लंबा समय दक्षिण अमेरिका के पेरू में बिताया। वहां उन्होंने लोगों के बीच रहकर धार्मिक और सामाजिक काम किए। उन्होंने पेरू के चिक्लायो इलाके में बिशप के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। 2023 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें वेटिकन में बिशप चुनने से जुड़े अहम विभाग का प्रमुख बनाया था। बाद में उन्हें कार्डिनल भी बनाया गया। कार्डिनल कैथोलिक चर्च के वरिष्ठ धर्मगुरु होते हैं, जो नए पोप को चुनने में हिस्सा लेते हैं। ------------------------ यह खबर भी पढ़ें… अजरबैजान में 96% मुस्लिम, फिर भी हिजाब बैन हुआ मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सरकार ने स्कूलों के ड्रेस कोड में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत ऐसे कपड़े पहनने पर रोक लगाई गई है, जिन्हें सरकार धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ मानती है। पूरी खबर पढ़ें…
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