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    बीमारियां नहीं, बिगड़ती लाइफस्टाइल है असली परेशानी:फिजियोलॉजी से शरीर को 'सुपर नॉर्मल' बनाने की तैयारी

    7 hours ago

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    कानपुर में एक विशेष कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर हमने अपनी जीवनशैली (लाइफस्टाइल) नहीं बदली, तो बीमारियां हमें घेर लेंगी। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के फिजियोलॉजी विभाग से आई प्रोफेसर पारुल और डॉक्टर बरुन शर्मा ने सेहत के बिगड़ते गणित और इसके बचाव के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। भागदौड़ ने बिगाड़ा सेहत का बैलेंस प्रोफेसर पारुल का कहना है कि फिजियोलॉजी को किसी भी बीमारी से बचाव की पहली ढाल के रूप में देखा जाना चाहिए। यह तभी मुमकिन है जब हमारी दिनचर्या संतुलित हो। पिछले कुछ सालों में लोगों की जीवनशैली काफी हद तक बिगड़ी है। देर से सोना, खान-पान में लापरवाही और शारीरिक सक्रियता में कमी की वजह से बीमारियां शरीर में घर बना रही हैं। जब तक हम अपनी बेसिक लाइफस्टाइल को ठीक नहीं करेंगे, तब तक दवाओं के भरोसे पूरी तरह स्वस्थ रहना मुमकिन नहीं है। बीमार नहीं, 'सुपर नॉर्मल' बनने का लक्ष्य रखें बीएचयू से आए डॉ. बरुन शर्मा ने फिजियोलॉजी को गहराई से समझाते हुए कहा कि, इसका असली मतलब इंसान का 'नॉर्मल' होना है। फिलहाल स्थिति यह है कि जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है, तब वह खुद को नॉर्मल करने की कोशिश करता है। लेकिन हमें अपनी सोच बदलनी होगी। हमारा लक्ष्य सिर्फ स्वस्थ होना नहीं, बल्कि 'सुपर नॉर्मल' होना होना चाहिए। यानी हमारा शरीर इतना फिट और मजबूत हो कि बीमारियां हमारे पास आने से भी डरें। शरीर की कार्यक्षमता को इतना बढ़ा लेना चाहिए कि बाहरी संक्रमण या लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं हमें छू भी न सकें। फिजियोलॉजी को समझें, दवाओं से बचें विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर की आंतरिक क्रियाओं यानी फिजियोलॉजी को समझना ही बचाव का सबसे बड़ा रास्ता है। अगर हम समय पर सोएं, संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें, तो शरीर का सिस्टम खुद-ब-खुद बीमारियों को रोकने में सक्षम हो जाता है। कॉन्फ्रेंस में इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान में बढ़ते ब्लड प्रेशर, शुगर और मानसिक तनाव की मुख्य वजह खराब लाइफस्टाइल ही है। इसे सुधार कर ही हम एक बेहतर और लंबी जिंदगी जी सकते हैं।
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