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    बरेली में आज निकलेगी 166वीं ऐतिहासिक राम बारात:यूनेस्को की विश्व धरोहर राम बारात में होगी मोर्चेबंदी, 50 हजार बाराती बनेंगे गवाह

    4 hours ago

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    यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल बरेली की ऐतिहासिक रामलीला के तहत आज, 2 मार्च को भव्य राम बारात निकाली जाएगी। 166 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को संजोए यह बारात सुबह 10 बजे बमनपुरी स्थित नृसिंह मंदिर से शुरू होगी। इस बार ग्रहण के चलते तिथि में विशेष बदलाव किया गया है। शाम 7 बजे तक पूरे शहर का भ्रमण कर यह शोभायात्रा वापस मंदिर पहुंचेगी। सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम हैं कि पुलिस, पीएसी और पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान भी रामभक्ति के रंग में रंगे नजर आएंगे। 50 हजार भक्त और पंपों से 'रंगीन मोर्चेबंदी' बरेली की इस ऐतिहासिक राम बारात का दृश्य किसी अलौकिक उत्सव से कम नहीं होता, जहाँ भक्ति और होली के हुड़दंग का अनूठा संगम देखने को मिलता है। आज बारात में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। शोभायात्रा में 100 से अधिक झांकियां शामिल होंगी, जिनमें मुख्य आकर्षण वह रथ होगा जिस पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता विराजमान होंगे। इस बारात की सबसे रोमांचक परंपरा इसकी 'रंगीन मोर्चेबंदी' है; जहाँ हुरियारे पीतल के पंपों से रंगों की ऐसी बौछार करते हैं कि पूरा आसमान सतरंगी हो जाता है। राम बारात का रूट मैप: इन रास्तों से गुजरेगा कारवां ऐतिहासिक राम बारात आज सुबह 10 बजे बड़ी बमनपुरी स्थित नृसिंह मंदिर से पारंपरिक पूजन के साथ शुरू होकर मलूकपुर, बिहारीपुर ढाल और कुतुबखाना पहुँचेगी। इसके बाद घंटाघर, नावेल्टी चौराहा और बरेली कॉलेज गेट होते हुए भक्त कालीबाड़ी पहुँचेंगे। बारात का भव्य स्वागत श्यामगंज चौराहा, साहू गोपीनाथ, मठकी चौकी और शिवाजी मार्ग पर होगा। यहाँ से कारवां पुनः कुतुबखाना चौराहा और बड़ा बाजार की ओर मुड़ेगा। अंतिम चरण में किला चौराहा और सिटी सब्जी मंडी होते हुए करीब 9 घंटे के भ्रमण के बाद शाम 7 बजे बारात वापस नृसिंह मंदिर पर संपन्न होगी। यूनेस्को की विश्व धरोहर: 1861 से जारी है सफर बरेली की ऐतिहासिक रामलीला को वर्ष 2008 में यूनेस्को की 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' की सूची में शामिल किया गया था। यह देश की इकलौती ऐसी लीला है जो शरद ऋतु के बजाय फाल्गुन (होली) के महीने में आयोजित होती है। यूनेस्को ने इसकी सांस्कृतिक निरंतरता, सामुदायिक एकता और जीवंत विरासत को देखते हुए इसे यह वैश्विक सम्मान दिया है। आज का यह आयोजन उसी 166 साल पुराने गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है। यूनेस्को की विश्व धरोहर का 19 दिवसीय उत्सव ​​बरेली की यह रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 1861 से चली आ रही एक जीवंत परंपरा है। इसे यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी विश्व धरोहर (अमूर्त सांस्कृतिक विरासत) की सूची में स्थान दिया है। ब्रिटिश काल में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए शुरू हुई यह 'चलती-फिरती' रामलीला देश की इकलौती ऐसी लीला है जो शरद ऋतु के बजाय फाल्गुन (होली) के महीने में आयोजित होती है। इस वर्ष हम इसका 166वां वार्षिकोत्सव मना रहे हैं। ​लीला का पूरा शेड्यूल: 25 फरवरी से 16 मार्च तक ​बड़ी बमनपुरी स्थित नृसिंह मंदिर इस भव्य आयोजन का मुख्य केंद्र है। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है: लीला का कार्यक्रम इस प्रकार है: ​25 फरवरी: श्रीगणेश पूजन और भव्य पताका यात्रा (नृसिंह मंदिर)। ​26 फरवरी: नारद मोह और राम जन्म की लीला। ​27 फरवरी: सीता जन्म, विश्वामित्र आगमन और ताड़का-सुबाहु वध। ​28 फरवरी: अहिल्या उद्धार और नगर दिखावा (फूल बगिया)। ​01 मार्च: भव्य धनुष यज्ञ। ​02 मार्च (राम बारात): सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक प्रभु राम की भव्य बारात निकलेगी। ​03 - 05 मार्च: भजन संध्या, नृसिंह भगवान शोभायात्रा, राम विवाह और भावुक कर देने वाला राम वनवास प्रसंग। ​06 - 09 मार्च: निषाद गंगाघाट शोभायात्रा, दशरथ मरण, भरत मिलाप और सीता हरण की लीलाएं। ​10 - 12 मार्च: लंका दहन, अंगद-रावण संवाद और मेघनाथ वध। ​13 मार्च (रावण वध): अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व 'दशहरा' मनाया जाएगा। ​14 मार्च (श्री राम शोभा यात्रा): साहूकारा में ऐतिहासिक भरत मिलाप का आयोजन। ​15 मार्च: प्रभु श्रीराम का भव्य राज्याभिषेक। ​राम बारात और शोभा यात्रा का रूट (मार्ग) ​बरेली के मुख्य मार्गों से गुजरने वाली यह यात्राएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी: ​प्रस्थान: नृसिंह मंदिर, मलूकपुर। ​मुख्य मार्ग: बिहारीपुर ढाल, कुतुबखाना, घंटाघर, नावेल्टी चौराहा, बरेली कॉलेज गेट, कालीबाड़ी, श्यामगंज, साहू गोपीनाथ, मठकी चौकी, शिवाजी मार्ग। ​वापसी मार्ग: बड़ा बाजार, किला चौराहा, सिटी सब्जी मंडी और जसौली होते हुए पुनः नृसिंह मंदिर पर समापन। ​विशेष: 14 मार्च को साहूकारा में होने वाला 'भरत मिलाप' इस पूरी यात्रा का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। ​लीला स्थल: बड़ी बमनपुरी ​इस ऐतिहासिक आयोजन की सभी मुख्य लीलाएं बड़ी बमनपुरी में आयोजित की जा रही हैं, जो वर्षों से इस सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र रहा है।
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