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    पीलीभीत जिला पंचायत में 20 करोड़ के टेंडर पर विवाद:सार्वजनिक अवकाश पर अंतिम तिथि तय करने से AMA धर्मेंद्र कुमार सवालों में

    1 hour ago

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    पीलीभीत जिला पंचायत में लगभग 20 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) धर्मेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक अवकाश के दिन टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने चौथे शनिवार और रविवार के बाद 2, 3 और 4 मार्च को प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। नियमों के अनुसार, सरकारी प्रक्रियाओं के लिए कार्यदिवस का चयन किया जाता है ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि, पीलीभीत जिला पंचायत के एएमए धर्मेंद्र कुमार ने जानबूझकर 2 मार्च, जो एक सार्वजनिक अवकाश था, को ई-टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि तय कर दी। जानकारों का मानना है कि यह कदम स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया था। ठेकेदारों के एक गुट का आरोप है कि इस 'डेडलाइन गेम' की जानकारी अपने चहेते ठेकेदारों को पहले ही दे दी गई थी। इससे आम ठेकेदार तकनीकी दिक्कतों और बैंक बंद होने के कारण टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले पाए।यह पहली बार नहीं है जब एएमए धर्मेंद्र कुमार विवादों में आए हों। इससे पहले भी वह छुट्टी पर गए एक इंजीनियर का डिजिटल डोंगल लगाकर टेंडर खोलने के मामले में फंस चुके हैं। करोड़ों रुपये के टेंडर मैनेजमेंट के इस खेल को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी ने भी उजागर किया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने शासन को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की थी। हालांकि, प्रशासनिक गलियारों में मजबूत पकड़ के चलते यह मामला अब तक फाइलों में दबा हुआ है। ठेकेदारों का आरोप है कि सार्वजनिक अवकाश के दिन टेंडर की अंतिम तिथि रखना एएमए और कुछ रसूखदार लोगों के बीच बंदरबांट की बड़ी साजिश का हिस्सा है। अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार से जब पूरे मामले पर फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन ही नहीं उठा।
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