Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ब्रिटेन की नागरिकता लेने वाले मौलाना के घर ED रेड:आजमगढ़ में 10 साल तक ली सैलरी, अब भी खातों में चल रहा अवैध ट्रांजैक्शन

    13 hours ago

    1

    0

    आजमगढ़ में मदरसा टीचर मौलाना शमशुलहुदा के घर पर ED की छापेमारी जारी है। मौलाना के खातों में अवैध ट्रांजैक्शन की जानकारी मिली थी। जिसके बाद ईडी के अधिकारी आज सुबह 6 बजे से ही उनके घर पहुंच गए। फिलहाल वो इस समय भारत में नहीं है। दरअसल शमशुलहुदा ने ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बाद भी अवैध रूप से सैलरी और रिटायरमेंट लाभ लिया। इस मामले में उत्तर प्रदेश की सरकार ने मदरसे की मान्यता को रद्द करते हुए कई अधिकारियों पर निलंबन की भी कार्रवाई की थी। जिसमें शासन ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एसएन पांडे, गाजियाबाद के डीएमओ साहित्य निकट सिंह, बरेली के लालमन, अमेठी के प्रभात कुमार को निलंबित भी किया था। इन सभी पर आजमगढ़ में पोस्टिंग के दौरान मौलाना को लाभ देने का आरोप लगा था। मौलाना के खिलाफ एटीएस ने भी जांच की थी। जांच में सामने आया था कि मौलाना शमसुल हुदा खान 2007 से ही संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। इस्लामी प्रचार के नाम पर वह पाकिस्तान के कई शहरों में जाता था। वहां के मौलवियों और धार्मिक संगठनों के संपर्क में था। पाकिस्तानी कनेक्शन के साथ ही उसने विदेशी फंडिंग से मदरसा का संचालन किया और भारत में कट्टरपंथी नेटवर्क को ऑपरेट करने का मॉड्यूल तैयार किया था। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला... ब्रिटेन में रहता था, लेकिन भारत में वेतन ले रहा था संतकबीरनगर का शमसुल हुदा खान 12 जुलाई 1984 को आजमगढ़ के मदरसा 'दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम' में सहायक अध्यापक नियुक्त हुआ था। वर्ष 2007 में वह ब्रिटेन चला गया। वहां की नागरिकता भी 2013 में हासिल कर ली। ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी वह भारत के मदरसे से वेतन लेता रहा। उसने मदरसे से 31 जुलाई 2017 तक वेतन लिया। विभागीय मिलीभगत से उसे अनियमित चिकित्सा अवकाश स्वीकृत होते रहे। लगभग 16 लाख रुपये वेतन उसने अवैध रूप से प्राप्त किए। 2017 में उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) दे दी गई। हद तो यह कि उसके जीपीएफ व पेंशन का लाभ भी विभाग ने दिया। पाकिस्तान कनेक्शन और कट्टरपंथी लिंक दरअसल, मौलाना के खिलाफ एटीएस ने भी जांच की। जांच में सामने आया कि मौलाना शमसुल हुदा खान 2007 से ही संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। इस्लामी प्रचार के नाम पर वह पाकिस्तान के कई शहरों में जाता था। वहां के मौलवियों और धार्मिक संगठनों के संपर्क में था। भारत में वह जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं और कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में रहा। आरोप है कि वह 'दावते इस्लाम’ नाम की प्रतिबंधित गतिविधि भी चलाता था। विदेशों से मिली फंडिंग का उसने उपयोग और स्रोत छिपाने की कोशिश की। एटीएस के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का प्रयास था। दो बार सील हुआ गर्ल्स मदरसा मौलाना, खलीलाबाद में ‘कुलियातुल बनातिर रजबिया’ नाम से एक गर्ल्स मदरसा चला रहा था। 2024 में प्रशासन ने पहला मदरसा सील किया। मौलाना ने तुरंत पास की बाउंड्री में उसी नाम से दूसरा मदरसा खोल लिया। 3 नवंबर को दूसरा मदरसा भी सील कर दिया गया। प्रशासन को शक है कि फंडिंग और नेटवर्क इन्हीं संस्थानों से संचालित हो रहे थे। एक मकान में गर्ल्स हॉस्टल भी चला रहा था जिसमें संतकबीरनगर, बस्ती, आजमगढ़ और अन्य प्रांतों की लड़कियां रहती थीं। रिश्तेदार की शिकायत पर दो बार हुई जांच शमशुल हुदा खान के रिश्तेदार करीम खान की शिकायत पर जिला स्तर पर दो बार जांच हुई। पहली जांच तत्कालीन एडीएम प्रशासन अनिल कुमार मिश्र ने की, जबकि दूसरी जांच वर्तमान एडीएम प्रशासन राहुल विश्वकर्मा ने की। जांच के बाद 2013 से 2017 तक पांच साल में दिए गए 16 लाख 59 हजार 555 रुपये वेतन की वसूली के लिए संतकबीर नगर प्रशासन को पत्र भेजा गया। शमशुल हुदा का वेतन और अन्य भुगतान संतकबीर नगर के एक बैंक खाते में ही जमा होता था। मेडिकल लीव लेकर ब्रिटेन जाते थे मदरसे के प्रबंधक सरफराज ने बताया- शमशुल हुदा खान जब यहां पढ़ाते थे, तब वो आंख और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल लीव लेकर ब्रिटेन जाते थे। इसी दौरान उन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता भी ले ली। इस तरह 2013 से 2017 तक भारत और ब्रिटेन, दोनों देशों की नागरिकता रखते हुए वेतन लेते रहे। बाद में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और अपने पैतृक घर चले गए। वहां रिश्तेदार करीम खान से विवाद के बाद यह मामला सामने आया कि वह 2013 में ब्रिटेन के नागरिक बन चुके थे। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने बताया कि इस मामले में जिला स्तर पर दो बार जांच हुई, जिसमें तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही सामने आई। मदरसा प्रबंधक ने 9 जून को मुबारकपुर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। तीन मामले दर्ज; दो में चार्जशीट दाखिल मौलाना के खिलाफ अब तक तीन मुकदमे दर्ज हैं। इसमें विदेशी फंडिंग व संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े होने का केस संतकबीरनगर में तो धोखाधड़ी व आर्थिक गड़बड़ी से जुड़ा केस आजमगढ़ में दर्ज हैं। तीसरा केस 2 नवंबर 2024 खलीलाबाद कोतवाली में दर्ज कराया गया। इसमें धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा अधिनियम का दुरुपयोग, अवैध आर्थिक लाभ और अन्य गंभीर आरोप हैं। पहले दो मामलों में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। SIT कर रही है पूरी फाइल की छानबीन इस मामले की जांच अब SIT कर रही है। एसआईटी, उससे जुड़े दस्तावेज, विदेशी यात्रा रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन, मदरसे की फंडिंग, विभागीय अनुमोदन फाइलें, सबकी जांच कर रही है। माना जा रहा है कि कई अधिकारी और मदरसा प्रबंधक जांच की जद में आ सकते हैं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    UGC रेगुलेशन के समर्थन में वकील एकजुट:लखनऊ में कैसरबाग चौराहे से परिवर्तन चौक तक नारेबाजी करते हुए निकाला मार्च
    Next Article
    लखनऊ में VHRP का विरोध प्रदर्शन:हुमायूं कबीर का पुतला फूंका, मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण के खिलाफ नारेबाजी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment