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    बस्ती के SSI की मौत...मिस्ट्री सुलझाने में जुटे विदेशी एक्सपर्ट:दोनों मोबाइल गायब, बाइक लाने वाले शख्स के सिर पर हेलमेट से चेहरा नहीं दिखा

    8 hours ago

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    बस्ती के परशुरामपुर थाने के एएसआई अजय गोंड की मौत की मिस्ट्री उलझती जा रही है। पुलिस अब इसे सुलझाने के लिए विदेशी एक्सपर्ट की मदद ले रही है। फॉरेंसिक लैब में ये एक्सपर्ट मौत की वजह तलाशने में मदद करेंगे। पुलिस बस्ती से अयोध्या तक हाईवे पर लगे 100 सीसीटीवी फुटेज खंगाल चुकी है, इनमें जो सबसे अहम सबूत मिला वो है इंस्पेक्टर की बाइक लाता एक शख्स। लेकिन उसके सिर पर लगे हेलमेट से चेहरा पहचान में नहीं आ रहा है, जिसने पुलिस की टेंशन बढ़ा दी है। इसके अलावा घटना के 5 दिन बाद भी इंस्पेक्टर के दोनों मोबाइल फोन गायब हैं। अयोध्या में जहां लाश मिली वहां मोबाइन नहीं मिले तो पुलिस ने जहां बाइक मिली, वहां भी तलाशी अभियान चलाया लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। एसपी यशवीर सिंह खुद केस को सुलझाने में जुटे हैं। उनके साथ स्वाट, सर्विलांस, एसओजी, क्राइम ब्रांच और एलआईयू की टीम लगी हुई है। डीजीपी स्तर से इस केस की लगातार मनीटरिंग की जा रही है। अब आपको अबतक इस केस की पुलिस फाइंडिंग्स पढ़वाते हैं… मामले से जुड़ी तीन तस्वीरें पहले जानिए पूरा मामला बस्ती जिले के परशुरामपुर थाने में तैनात सीनियर दरोगा अजय कुमार गोंड का शव 8 फरवरी को अयोध्या की सरयू नदी में मिला था। अजय पत्नी और 2 बच्चों के साथ बस्ती में रहते थे। ड्यूटी के दौरान 5 फरवरी की शाम थाने से निकले थे। इसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चला। लापता होने के अगले दिन 6 फरवरी को दरोगा की बाइक बस्ती के कुआनो नदी के पास मिली थी। दरोगा अजय आखिरी बार एक सीसीटीवी फुटेज में सफाईकर्मी के साथ बाइक पर जाते हुए दिखे थे। दरोगा की पत्नी रंजीता गोंड ने बताया- अजय 5 फरवरी को सुबह चाय-नाश्ता करके थाने के लिए निकले थे। परशुरामपुर थानाध्यक्ष विश्व मोहन राय के अवकाश पर जाने के बाद पति के पास ही थाने का प्रभार था। उन्होंने दोपहर साढ़े 3 बजे मुझसे बात की थी। थाने के सिपाहियों के मुताबिक, शाम करीब 5 बजे दरोगा अजय थाने में तैनात सफाईकर्मी के साथ बाइक से कहीं निकले थे। थाने से बाहर जाते हुए उनका एक वीडियो भी सामने आया है। पत्नी ने रात 8 से 9 बजे के बीच उन्होंने कॉल किया, लेकिन फोन बंद मिला था। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। 6 फरवरी को दरोगा अजय की बाइक मिलने के बाद पुलिस को उनके डूबने की आशंका थी। इसको देखते हुए पुलिस ने SDRF गोरखपुर की टीम के साथ कुआनो नदी में लगातार 3 दिन तक सर्च अभियान चलाया। अमहट घाट से भद्रेश्वरनाथ तक करीब 2 किमी क्षेत्र में मोटर बोट से 8 राउंड सर्च किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 8 फरवरी की शाम करीब 4 बजे अभियान रोक दिया गया था। सर्च अभियान बंद होने के करीब 3 घंटे बाद शाम 7 बजे सूचना मिली कि अयोध्या के दर्शननगर चौकी क्षेत्र अंतर्गत तिघुरा माझा गांव में सरयू नदी में एक शव देखा गया है। शव की पहचान दरोगा अजय गोंड के रूप में हुई। दरोगा की बाइक बस्ती जिले के कुआनो नदी के किनारे मिली। जबकि शव बाइक मिलने की लोकेशन से 75 किमी दूर अयोध्या जिले के बॉर्डर पर सरयू नदी में मिला। दोनों ही लोकेशन एक-दूसरे के उल्टा है। दोनों नदियां कहीं नहीं मिलती। बस यहीं से केस उलझ गया। पत्नी रंजीता और उनके ADM भाई ने इसे प्लांड मर्डर बताया है। हालांकि, हत्या का आरोप किसी पर नहीं लगाया है। लेकिन पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। परिवार का कहना है कि गुमशुदगी दर्ज कराने के तत्काल बाद पुलिस एक्शन लेती, तो शायद अजय जिंदा होते। बस्ती में थाना सस्पेंड करने और सीओ पर कार्रवाई के लिए एडीएम भाई अरुण कुमार और उनकी PCS भाभी ने सोमवार को धरना भी दिया था। सोमवार की देरशाम देवरिया में एसएसआई का अंतिम संस्कार किया गया। अब पढ़िए अब तक की फाइंडिंग्स पुलिस की जांच में सामने आया है कि दरोगा अजय गौंड दो मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे - एक उनका निजी फोन और दूसरा सीयूजी (क्लोज्ड यूजर ग्रुप) फोन। इन दोनों मोबाइल फोन की अंतिम लोकेशन अमहटघाट पर मिली थी, यहीं पर उनकी बाइक मिली है। लेकिन फोन का अभी तक पता नहीं चल सका है। बस्ती-अयोध्या हाईवे पर लगे 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज पुलिस ने खंगाले। जिसमें दरोगा की बाइक वापस लाते हुए एक शख्स नजर आया है। लेकिन उसके हेलमेट पहने होने की वजह से चेहरा साफ नजर नहीं आ रहा है। उसकी सिर्फ आंखें, नाक ही दिख रही है, बाकी चेहरा हेलमेट से कवर है। दरोगा की लाश पुलिस की वर्दी में मिली है, उन्होंने भी नीली जैकेट पहन रखी थी। जो शख्स दरोगा की पल्सर बाइक लेकर लौटा है, उसने भी नीली जैकेट पहन रखी है। पैंट का कलर भी पुलिस की वर्दी से मैच करता हुआ नजर आ रहा है। लेकिन ये दरोगा अजय ही हैं या कोई और ये क्लीयर नहीं हो पाया है। 9 फरवरी को हुए पोस्टमार्टम में दरोगा के चेहरे पर चोट के निशान मिले। लेकिन उनके फेफड़ों में न तो पानी पाया गया और न ही गले में बालू। इस रिपोर्ट के बाद मौत का राज गहरा गया है। सीओ स्वर्णिमा सिंह ने बताया- दरोगा के विसरा की गहन जांच के लिए इंडियन एक्सपर्ट के साथ-साथ विदेशी तकनीक और विदेशी एक्सपर्ट की मदद भी जा रहा है। ताकि मौत का सही समय और कारण जल्द से जल्द पता चल सके। इसमें एफएसएल विशेषज्ञ, सर्विलांस टीम, स्वाट टीम और खुफिया तंत्र मिलकर काम कर रहा है। दरोगा की मौत से जुड़े 4 सवाल 1. अगर दरोगा बाइक मिलने वाली जगह नदी में कूदे तो शव दूसरी नदी सरयू में कैसे मिला? दरोगा अजय गोंड की बाइक बस्ती जिले के कुआनो नदी के किनारे मिली। जबकि दरोगा का शव, बाइक मिलने की लोकेशन से 75 किमी दूर अयोध्या जिले के बॉर्डर पर सरयू नदी में मिला। दोनों ही लोकेशन एक-दूसरे के उल्टा है। दोनों नदियां कहीं नहीं मिलती। 2. 100 CCTV पुलिस ने खंगाले, कई में दरोगा अजय अयोध्या की ओर जाते दिखे हर्रैया की सीओ स्वर्णिमा सिंह ने बताया कि पुलिस ने दरोगा की मौत मामले में अभी तक 100 से ज्यादा सीसीटीवी खंगाले। कुछ सीसीटीनी में अजय अकेले ही अयोध्या की तरफ जाते दिखे। उनकी बाइक और लाश मिलने के बीच की करीब 75 किमी दूरी ने गुत्थी को उलझा दिया है। बाइक बस्ती कैसे आई, पुलिस इस सवाल का जवाब तलाश रही है। 3. पीएम रिपोर्टः गले में बालू और फेफड़े में पानी नहीं मिला, चेहरे पर चोट के निशान पोस्टमार्टम एक्सपर्ट के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पानी में कूदता है, तो उसे चेहरे और कान पर चोट नहीं लगती, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पूरे चेहरे पर चोट के निशान मिले हैं। नाक और दोनों कानों पर भी चोट के निशान हैं। यदि तैरना नहीं आता है, तो वह तड़पता है और अपने बचाव के लिए हाथ-पैर चलाता है। मृतक दरोगा के पेट और गले में बालू नहीं पाया गया, इसके साथ ही फेफड़ों में भी पानी नहीं मिला। 4. दोनों मोबाइल कहां गए अयोध्या के दर्शननगर चौकी क्षेत्र के तिघुरा माझा गांव में सरयू नदी में दरोगा की लाश मिली लेकिन उनके दोनों मोबाइल नहीं मिले। ये मोबाइल कहां हैं ये अब तक पता नहीं चल सका है। अभी तक एफआईआर नहीं दरोगा अजय के साले विजय कुमार ने बताया कि डीआईजी ने एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर मांगी थी, लेकिन उस समय हम लोग ऐसी स्थिति में नहीं थे कि तहरीर दे पाएं। आज तहरीर देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अब पढ़िए पत्नी रंजीता गोंड ने क्या कहा… मेरे पति एसएसआई अजय कुमार गोंड परशुरामपुर थाने में तैनात थे। 5 फरवरी की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच लापता हो गए। अमहट घाट पर जो उनकी बाइक मिली, वह पुलिस को गुमराह करने के लिए वहां रखी गई। मुझे आशंका है कि मेरे पति को बंधक बनाया गया था। वह थाना क्षेत्र या उसके आसपास ही थे, क्योंकि वह कहीं और नहीं गए थे। इसी इलाके में उनके साथ किसी भरोसेमंद व्यक्ति ने धोखा किया है। सबसे दुखद बात यह है कि उनके लापता होने की जानकारी मुझे थाने की ओर से नहीं दी गई। अगले दिन सुबह 9 से 10 बजे जब मैंने उन्हें रोज की तरह फोन किया, तब मुझे पता चला कि वह तो पिछली शाम से ही गायब हैं। जब मैंने थाने के कर्मचारियों से पूछा कि उनकी लोकेशन या कॉल डिटेल क्यों नहीं निकाली गई, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब पढ़िए दरोगा के छोटे भाई ADM अरुण कुमार ने जो बताया मैं एसडीएम रह चुका हूं और वर्तमान में एडीएम हूं। इसके बावजूद मुझे कोई सहयोग नहीं मिला। मेरी मांग है कि पूरे थाने को सस्पेंड किया जाए। 4 लोगों के खिलाफ हत्या (धारा- 302) का मुकदमा दर्ज हो और हर्रैया के सीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सीओ ने मुझसे जिस तरह से बात की और मेरे भाई को जिस तरह से फंसाने की कोशिश की, उसे मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। यह आत्महत्या नहीं, प्लांड मर्डर है। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री तक जाऊंगा, यह बात नोट कर लीजिए। मुझे कप्तान से बात नहीं करनी। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, मैं यहां से नहीं जाऊंगा। मेरा भाई मरा है, आपका नहीं। मुझे दर्द है, बहुत दर्द है। दरोगा के पिता बोले- किडनैपिंग के बाद हत्या हुई दरोगा अजय गोंड के पिता रामचंद्र प्रसाद ने बताया कि यह घटना 5 तारीख को शाम 6 बजे हुई थी। हमें इसकी जानकारी बहू रंजीता ने 6 तारीख को सुबह 10 बजे दी। अब तक यह साफ नहीं है कि पुलिस क्या कार्रवाई कर रही? हमे आशंका है कि वह परशुरामपुर थाने से अकेले बाइक पर अपने घर आ रहे थे। इसके कुछ दूर पहले उनकी किडनैपिंग हो गई और फिर हत्या की गई। पुलिस विभाग, सीओ और एसपी सभी इस मामले में लगातार संपर्क में थे। परिवार में छोटे भाई एडीएम, बड़े सुपरवाइजर देवरिया के मूड़ाडीह गांव के रहने वाले अजय गोंड 2016 बैच के दरोगा थे। उनकी शादी 2006 में रंजीता के साथ हुई थी। उनके 2 बेटे अमित राज और उत्कर्ष राज हैं। बड़ा बेटा कानपुर में पढ़ाई कर रहा, जबकि पत्नी और छोटा बेटा उनके साथ बस्ती के मिश्रौलिया मोहल्ले में किराए के मकान में रहते हैं। अजय के पिता भी रिटायर्ड दरोगा हैं। अजय 4 भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। बड़े भाई दिलीप कुमार गोंड स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर पद पर कार्यरत हैं। छोटे भाई अरुण कुमार गोंड ADM हैं। उनकी बहन शशि प्रभा सरकारी टीचर हैं। शशिप्रभा की शादी फिक्स हो चुकी थी। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में लगे थे। -------------------- ये खबर भी पढ़ें 100 फीट ऊंचे टावर से गिरकर युवक की मौत, VIDEO:कन्नौज में बोला- मेरी शादी करा दो, नहीं तो कूद जाऊंगा; प्रेमिका से करना चाहता था शादी कन्नौज में 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर से नीचे गिरने से युवक की मौत हो गई। प्रेमिका से शादी कराने की जिद में वह टावर पर चढ़ा था। टावर पर चढ़ने के बाद प्रेमिका नाम लेकर चिल्लाने लगा कि मेरी शादी करा दो, नहीं तो कूद जाऊंगा और मर जाऊंगा। वह करीब 2 घंटे तक टावर पर बैठा रहा। टावर पर चढ़े युवक को लोग समझा ही रहे थे कि अचानक उसका बैलेंस बिगड़ गया। वह खुद को संभाल नहीं पाया और नीचे जमीन पर आ गया। आनन फानन में लोग उसे अस्पताल लेकर भागे। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पूरी खबर पढ़ें
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