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    उद्योगपति Maganbhai Patel की बड़ी मांग, हर राज्य में बनें Louis Braille Memorial और ट्रेनिंग सेंटर

    3 hours from now

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    देश और दुनिया के नेत्रहिन् लोगों के भीष्म पितामह समान महात्मा लुईस ब्रेल की 217वीं जन्म जयंती और 174वें निर्वाण दिवस के अवसर पर गुजरात के अहमदाबाद से करीब 350 km दूर अमरेली जिले के कुकावाव तहसील के जंगर गांव में "बाल कलाज्ञान तिरंगा प्रतियोगिता" का आयोजन वर्ष 1967 से राष्ट्रसेवा में अपना जीवन समर्पित करनेवाले गुजरात के जाने-माने उद्योगपति एव ऑल इंडिया MSME फेडरेशन के अध्यक्ष मगनभाई पटेल ने की अध्यक्षता में किया गया।इस कार्यक्रम में विजेता बच्चो को कार्यक्रम के मुख्यदाता मगनभाई पटेल द्वारा पारितोषिक दिए गए। इस कार्यक्रम के ऑर्गनाइजर प्रज्ञाचक्षु पीयूषभाई गुना थे, जिनके पिता का अचानक स्वर्गवास होने के बावजूद उन्होंने इस प्रोग्राम में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। प्रज्ञाचक्षु पीयूषभाई गुना ईश्वरीय सरकारी प्राइमरी स्कूल, ता. कुकावाव में टीचर के तौर पर काम कर रहे हैं। उनकी लगातार कोशिश और मगनभाई पटेल के वित्तिय सहयोग से यह कार्यक्रम सफल रहा।इस कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं मुख्यदाता मगनभाई पटेल के साथ स्वामी आत्मानंद सरस्वती,सी.यू.शाह प्रज्ञाचक्षु महिला सेवा कुंज,सुरेन्द्रनगर के ट्रस्टी पंकजभाई दगली, अमरेली जिले के डिप्टी डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) निखिलभाई वसानी,अग्रणी बिल्डर राजेशभाई तढानी, मनसुखभाई पाघडाल, अश्विनभाई पानसुरिया, प्रज्ञाचक्षु चैरिटेबल ट्रस्ट,जूनागढ़ के ट्रस्टी मुकेशभाई मेघनाथी,भाणजी वनमाली ज्वैलर्स,अमरेली एव अन्य गणमान्य व्यक्ति विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे,साथ ही साथ कुकावाव तालुका शिक्षक संघ के अध्यक्ष विमलभाई देवानी,स्वैच्छिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष हितेशभाई खिमानी,कुकावाव बीआरसी (ब्लॉक रिसर्च कोऑर्डिनेटर) नीरवभाई सावलिया,जंगर गांव के युवा सरपंच विपुलभाई वसानी एव उपसरपंच भरतभाई वसानी,कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. भारतीबेन बोरड़ एव सारस्वत शिक्षक परिवार, कुकावाव का विशेष सहयोग रहा। पूरे कार्यक्रम का संचालन उदयभाई देसाई एव संजयभाई वसाणी ने किया था।इस कार्यक्रम में मगनभाई पटेल ने अपने प्रेरणादायी उदबोधन में कहा कि 4 जनवरी,1809 को एक ऐसे महान इंसान का जन्म हुआ,जिन्होंने एक ऐसी लिपि का आविष्कार किया,जिसकी वजह से विश्व के द्रस्टीहिन् यानि प्रज्ञाचक्षु लोगों का पढ़ना-लिखना मुमकिन हो पाया। उस महान इंसान का नाम है लुईस ब्रेल, जिन्होंने ब्रेल लिपि का आविष्कार किया,जिन्हें दुनिया के प्रज्ञाचक्षु लोगों के "भीष्म पितामह" के नाम से जाना जाता है। फ्रांस के रहनेवाले लुई ब्रेल जन्म से अंधे नहीं थे, लेकिन जब वे बहुत छोटे थे, तो एक हादसे में उनकी आंखों की रोशनी चली गई। लुई ब्रेल के पिता रैले ब्रेल शाही घोड़ों की जीनत बांधने का काम करते थे। एक दिन 3 साल की उम्र में लुई ब्रेल अपने पिता के औजारों से खेल रहे थे, तभी अचानक एक औजार उनकी आंख में लग गया, शुरुआत में इलाज करवाने के बाद थोड़ी राहत मिली, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी समस्या इतनी बढ़ गई कि कई इलाज के बावजूद उनकी आंखों की रोशनी ठीक नहीं हुई और केवल 8 साल की उम्र में उनकी आंखों की रोशनी चली गई और वे अंधे हो गए।मगनभाई पटेल ने आगे कहा कि आँखों की रोशनी चले जाने के बाद जब लुई ब्रेल 16 साल के हुए तब उन्होंने दृस्टिहिन् लोगों के पढ़ने और लिखने के लिए एक स्क्रिप्ट पर काम करना शुरू किया। पेरिस स्कूल फॉर द ब्लाइंड में पढ़ते समय, उन्हें फ्रेंच आर्मी के कैप्टन चार्ल्स बार्बियर के 'नाइट राइटिंग' तरीके के बारे में पता चला, जिससे सैनिक अंधेरे में मैसेज पहुंचाते थे जिसमे उभरे हुए डॉट्स का इस्तेमाल होता था। उनके इस आविष्कार से लाखों नेत्रहिन् लोगों को शिक्षा मिली और आज यह स्क्रिप्ट दुनिया भर में इस्तेमाल हो रही है जिसे ब्रेल लिपि के नाम से जाना जाता है।मगनभाई पटेल ने अपने वक्तव्य के अंत में कहा कि आज जब देश के लिए अपनी जान न्योछावर करनेवाले महान लोगों की मूर्तियां एव स्मारक बन रहे हैं,तो महान लुई ब्रेल का स्मारक देश एव दुनिया के सभी राज्यों में बनने चाहिए जिनकी कोशिशों से दुनिया के करोड़ों नेत्रहीन लोग आज पढ़ाई कर रहे हैं और नौकरी के लायक बन पाए हैं। लुई ब्रेल के नाम पर ट्रेनिंग सेंटर भी शुरू किए जाने चाहिए जहां प्रज्ञाचक्षु लोग, विकलांग लोग और नॉर्मल लोगों को विविध गृहउधोग की तालीम दी जाए ताकि वे रोजगारलक्षी बन सकें और सामान्य लोगों की तरह जीवन जी सके और उन्हें किसी पर आधार रहना न पड़े।मगनभाई पटेल ने वहां मौजूद सभी जाने-माने सामाजिक लोगो से इस प्रस्ताव में शामिल होने की अपील की, जिसका वहां मौजूद सभी लोगों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। इस अवसर पर सी.यु.शाह प्रज्ञाचक्षु सेवाकुज-सुरेन्द्रनगर के ट्रस्टी प्रज्ञाचक्षु पंकजभाई दगलीने भी अपने सुंदर विचार प्रस्तुत किये थे।यहां बताना जरूरी है कि गुजरात के अहमदाबाद में स्थित अंधजन मंडल,वस्त्रापुर में पहला ब्रेल लिपि प्रेस मशहूर कथाकार  प.पू.रमेशभाई ओझा (पू.भाईश्री) और मगनभाई पटेल ने इस संस्था को समर्पित किया था। इसके उद्घाटन समारोह में इस संस्था के संस्थापक पद्मस्वर्गीय जगदीशभाई पटेल और उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय भद्राबेन जगदीशभाई पटेल और दूसरे जाने-माने लोग शामिल थे।स्वर्गीय भद्राबेन सत्या जो एक सफल उद्योगपति की बेटी थीं, उन्होंने स्वर्गीय पद्मजगदीशभाई पटेल की सेवाभावना से प्रभावित होकर उनसे शादी की और उन्होंने कई सालों तक प्रज्ञाचक्षु लोगों की सेवा की।अंधजन मंडल,वस्त्रापुर आज भारत का सबसे बड़ा NGO है, जो प्रज्ञाचक्षु लोगों के साथ-साथ सभी तरह की विकलांगतावाले लोगों की तमाम प्रकर की सेवा प्रदान करता है। इस संस्था के गुजरात में 17 और राजस्थान में 1 कैंपस हैं, इसके अलावा 18 विजन सेंटर और 10 डे-केयर सेंटर हैं जहा मल्टीपल डिसेबिलिटी और बहरेपनवाले लोगों की देखभाल हो रही हैं।आज इस संस्था में करीब 300 द्रस्टीहिन् बच्चे,150 मानसिक रूप से विकलांग बच्चे और लगभग 800 अन्य प्रकार की क्षतिवाले बच्चों को ट्रेनिंग, शिक्षा, स्पीच और हियरिंग थेरेपी जैसी अलग-अलग तालीम दी जा रही है। आज यह संस्था एक स्कूल, ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और रोजगारलक्षी केन्द्र बन चुकी है। इस संस्था के कैंपस में एक सेल्स सेंटर भी चल रहा है जहाँ देखने में प्रज्ञाचक्षु  बच्चो के द्वारा बनाई गई अलग-अलग चीजें बेची जाती हैं, जिस में लकड़ी का फ़र्नीचर, घर की सजावट का सामान और होजरी समेत कई अलग-अलग चीजे बहुत ही कम दामों पर बेची जाती है। इस संस्था के फाउंडर स्वर्गीय पद्मजगदीशभाई पटेल और मगनभाई पटेल की लगातार कोशिशों से प्रज्ञाचक्षु लोगो के लिए यह संस्था आज देश की प्रथम कक्षा की संस्था बन चुकी है।मगनभाई पटेल के वित्तीय सहयोग से गुजरात के 40 से ज्यादा नेत्रहीन लोगो के लिए काम करनेवाले संगठन,मानसिक रूप से विकलांग बच्चों के लिए काम करनेवाले संगठन और विकलांग भाई-बहनों के लिए काम करनेवाले संगठनों को उनकी जरूरत के हिसाब से विविध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे पंखे,वॉशिंग मशीन, रेफ्रीजरेटर,राशन एव अन्य जरुरी सामान दिए जाते है साथ ही साथ इस संगठन के वहीवटी कार्य और फंडरेजिंग जैसे प्रोग्रामो में भी अहम योगदान रहा है ,जिसकी जानकारी हम पिछले आर्टिकल में प्रस्तुत कर चुके है।हाल ही में अहमदाबाद में धोलका रोड, न्यू फतेहवाड़ी के पास सी.यू. शाह प्रज्ञाचक्षु महिला सेवाकुंज-सुरेंद्रनगर द्वारा चलाए जा रहे “सी.यू.शाह प्रज्ञाचक्षु शिक्षा और पुनर्वास केंद्र” की नई ईमारत का दौरा किया गया। यहां खास बात यह है कि प्रज्ञाचक्षु भाई-बहनों की इस संस्थान का शिलान्यास मगनभाई पटेल और अन्य गणमान्य लोगों ने किया,जिसे तस्वीर में देखा जा सकता है।इस संस्था के भूमि पूजन के दौरान मगनभाई पटेल ने अपने वक्तव्य में कहा कि साल 1995 में सी.यू.शाह प्रज्ञाचक्षु सेवाकुंज-सुरेंद्रनगर संस्था, जिसे प्रज्ञाचक्षु पंकजभाई डगली और प्रज्ञाचक्षु श्रीमती मुक्ताबेन डगलीने शुरू किया था, इस संस्था में शुरू में 4 प्रज्ञाचक्षु बेटियां थीं। आज इस संस्था में 200 से ज्यादा प्रज्ञाचक्षु बेटियां हैं।मगनभाई पटेल ने सुरेंद्रनगर में स्थित इस संस्था के बारे में विस्तृत में जानकारी देते हुए कहा कि इस संस्था को शुरू करने की प्रेरणा संस्था की फाउंडर नेत्रहीन पद्मश्रीमती मुक्ताबेन पी. डगली को अपनी पढ़ाई के दौरान मिली। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने देखा कि जिन नेत्रहीन बच्चों के परिवार आर्थिक रूप से कमजोर थे, उन पर ध्यान नहीं दिया जाता था। जब ऐसे ही एक प्रज्ञाचक्षु बच्चे को उसकी माँ ने जहर देकर उसकी जान ली,तो उन्हें बहुत गहरा सदमा लगा और उन्होंने फैसला किया कि वह जिंदगी में और कुछ नहीं करेंगी और इन नेत्रहीन बच्चों के लिए एक अनोखा घर बनाएंगी। आज भी गांवों में नेत्रहिन् बेटियाँ सुरक्षित नहीं है। माता-पिता काम पर जाते समय अपनी बेटियों को घर पर अकेला छोड़ कर जाते हैं, जिसके कारण गांवों में असामाजिक तत्व इन बच्चों का शोषण करते हैं।वर्ष 1995 में शुरू हुई इस संस्थाने बहुत संघर्ष के बाद सरकारी दामों पर सरकारी जमीन हासिल करने में कामयाबी मिली। वर्ष 2006 में इस संस्थाने डोनर्स की मदद से एक सुंदर बिल्डिंग बनाई और आज इस संस्था में 200 से ज्यादा नेत्रहीन लड़कियां रह रही हैं। इस संस्था में रहनेवाली लड़कियां 1 से 12वीं तक पढाई करती हैं और संगीत विशारद तक की ट्रेनिंग भी लेती हैं। ये बच्चे ब्यूटी पार्लर और कंप्यूटर कोर्स भी कर रहे हैं जो ITI से अप्रूव्ड होते हैं। इसके अलावा ये बच्चे ड्रामा,डांस,योग और दूसरी ट्रेनिंग भी ले रहे हैं। इन बच्चों को काबिल बनाने के लिए, उन्हें घर के काम जैसे खाना बनाने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। इस संस्थाने सिर्फ़ संस्था की लड़कियों के बारे में ही नहीं सोचा बल्कि गुजरात राज्य की लड़कियों के बारे में सोचा है और उनकी तरक्की के लिए कई प्रतियोगिताए ऑर्गनाइज कि हैं। साल 2006 में इस संस्थाने प्रज्ञाचक्षु लड़कियों के लिए शक्ति एव ब्यूटी कॉम्पिटिशन "मिस गुजरात" ऑर्गनाइज करके दुनियाभर  धूम मचा दी थी। इसके अलावा ब्लाइंड लड़कियों की एक क्रिकेट टूर्नामेंट भी की और यह परंपरा आज भी जारी है। संस्थाने लगातार तीन बार जीत हासिल गुजरात का नाम देश में रोशन कर दिया है।मगनभाई पटेल शुरू से ही इस संस्था में योगदान देकर जुड़े हुए हैं। इस संस्था के संस्थापक प्रज्ञाचक्षु पंकजभाई डगली एवं उनकी धर्मपत्नी प्रज्ञाचक्षु पद्मश्रीमती मुक्ताबेन डगली अक्सर मगनभाई पटेल से मार्गदर्शन लेते रहते हैं और उन्हीं के मार्गदर्शन में आज इस भवन का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। यह संस्था लगभग 5000 वर्ग मीटर भूमि पर लगभग 1,52,500 वर्ग फीट क्षेत्र में निर्मित हो रही है । इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 40 करोड़ रुपये है, जिसमें से 11 करोड़ रुपये सी.यू. शाह प्रज्ञाचक्षु सेवाकुंज-सुरेन्द्रनगर संस्था से प्राप्त हो चुकी हैं और अन्य दानदाताओं द्वारा क्रमशः 3 करोड़, 2 करोड़, 1 करोड़, 50 लाख एवं 11 लाख रुपये के हिसाब से कुल 27 करोड़ रुपये पंजीकृत किए जा चुके हैं। 13 से 15 करोड़ की अभी आवश्यकता है जिसके लिए उम्मीद है कि समाज के दानदाताओं के सहयोग से यह जरूर पूरी हो जाएगी। इस संस्था का निर्माण कार्य साल 2026 के आखिर तक संपूर्ण रूप से पूर्ण हो जाएगा।मगनभाई पटेल ने इस संस्था के कंस्ट्रक्शन के काम के दौरे के दौरान एक इंटरव्यू में कहा कि एक सर्वे के मुताबिक अहमदाबाद शहर में करीब 1000 नेत्रहीन जोड़े रहते हैं। नेत्रहीन लोग अहमदाबाद शहर में लिफ्टमैन का काम करते हैं और छोटी-छोटी फैक्ट्रियों में मेहनत-मजदूरी करते हैं। उनके रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अकेले रहनेवाले और 8 से 10 हजार की छोटी कमाई करनेवाले यह दंपति किराए के मकानों में रहते हैं और उनकी कमाई का करीब 50% हिस्सा किराया देने में चला जाता है। मकान मालिक कभी भी घर खाली करा देता है, उन्हें बार-बार अपना सामान ले जाने और नए घर में रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर उन्हें दूर रहने की जगह मिलती है, तो उनका ज्यादातर समय आने-जाने में ही निकल जाता है। ऐसे जरूरतमंद नेत्रहीन जोड़ों के रहने के लिए यहां करीब 99 फ्लैट तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही इस संस्था में करीब 800 नेत्रहीन भाई-बहनों के रहने के लिए करीब 85 डॉरमेट्री रूम भी तैयार किए जा रहे हैं। प्रज्ञाचक्षु लोगों के लिए बनाई जा रही यह संस्था एक वरदान साबित होगी, जिसमे कोई संदेह नहीं है।इस संस्था की मुलाकात के दौरान मगनभाई पटेल ने कहा कि अहमदाबाद शहर न केवल गुजरात राज्य में बल्कि पूरे भारत के दृष्टिबाधित लोगों के विकास के लिए एक बहुत ही उपयोगी शहर बन गया है क्योंकि यहां दृष्टिबाधित लोगों को शिक्षा के लिए उचित सुविधाएं मिल रही हैं और साथ ही नौकरी और बिजनेस के अच्छे मौके भी मिल रहे हैं और इसीलिए अहमदाबाद पूरे भारत के दृष्टिबाधित लोगों की पहली पसंद बन गया है। अहमदाबाद में दृष्टिबाधित छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा है। जब गरीब परिवारों से आनेवाले दृष्टिबाधित छात्र शिक्षा की भूख के साथ बस स्टैंड या बगीचे की बेंचों पर नंगे पैर सोकर अपना गुजारा करते थे, तो आज यह संस्था उनके लिए एक वरदान साबित होगी, जिसमे कोई शक नहीं है। मगनभाई पटेल ने इस संस्था के निर्माण के लिए जमीन के मालिक प्रवीणचंद्र आत्मारामभाई शाह का विशेष आभार व्यक्त किया और कहा कि भारत भूमि दानदाताओं की भूमि है, प्रवीणभाईने सेवा के इस नेक काम के लिए भूमिदान करके समाज के अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा देनेवाला उदाहरण पेश किया है। साथ ही दूसरे डोनर्स डॉ. के.एल.महेता,पंकजभाई वोरा के वित्तीय सहयोग से इस संस्था का कंस्ट्रक्शन का काम जोरों पर चल रहा है। इस संस्था की फाउंडर और मैनेजिंग ट्रस्टी प्रज्ञाचक्षु पद्ममुक्ताबेन दगली जिन्हें साल 2019 में भारत के माननीय पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविदजीने उनकी नेक सेवाओं के लिए "पद्म अवॉर्ड" से सम्मानित किया था, जिसे तस्वीर में देखा जा सकता है।मगनभाई पटेल आज 84 साल की आयु में 50 से ज्यादा सोशल ऑर्गनाइजेशन में ऊंचे पदों पर रहकर राष्ट्रसेवा का काम कर रहे है और अपने वित्तीय सहयोग से इन ऑर्गनाइजेशनस को सक्रीय एव रोजगारलक्षी बनाने में मदद कर रहे हैं। गुजरात में 10वीं बार और अमरेली जिले में 5वीं बार द्रस्टीबाधित लोकगीत प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता और जनरल नॉलेज प्रतियोगिता जैसी तिरंगा प्रतियोगिता आयोजित कि गई। इस प्रतियोगिता में अमरेली जिले के 45 गांवों के 50 स्कूलों के 5वीं से 12वीं क्लास के कई बच्चोंने हिस्सा लिया, जिनमें से 150 बच्चे चुने गए। इस प्रोग्राम में 700 से ज्यादा लोग मौजूद थे।
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