Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    बेटे के डॉक्टर पिता को अंतिम शब्द ‘टेक केयर’:झांसी में दादा बोले- ये सुसाइड नहीं, ट्रेन एक्सीडेंट में चीत्थड़े हो जाते; पोते को मारकर फेंका

    2 hours ago

    1

    0

    ‘मेरा पोता सोनीपत में जिंदल कॉलेज से LLB कर रहा था। शनिवार को उससे फोन पर बात हुई थी। तब सब ठीक था। अगले दिन घर के पास रेलवे पटरी पर उसकी लाश मिली। वो बिना बताए 500Km दूर झांसी क्यों आया? अगर आया भी तो सोनीपत-झांसी रूट की जगह झांसी-कानपुर रूट की पटरी पर शव कैसे पहुंचा? यही कुछ सवाल मन को परेशान कर रहे हैं। ये सुसाइड नहीं है। न ही ट्रेन एक्सीडेंट। अगर एक्सीडेंट होता तो शरीर के चीत्थड़े हो जाते। मगर सिर्फ उसके सिर में चोट है। मेरे पोते को मारकर पटरी पर फेंका गया है।’ ये कहना है डॉ. प्रमोद मिसुरिया का। जिनके पोते संचय मिसुरिया (19) का शव रविवार को रेलवे पटरी पर मिला। संचय के पिता डॉ. सुमित मिसुरिया बबीना सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। संचय की मौत की गुत्थी उलझ गई है। पुलिस ने एक्सीडेंट, सुसाइड समेत अन्य एंगलों पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने संजय का मोबाइल बरामद किया है और कॉल रिकॉर्ड खंगाली जा रही है। उम्मीद है कि इससे पुलिस की जांच को दिशा मिल जाएगी। पिता बोले- अपनी केयर करो दादा डॉ. प्रमोद मिसुरिया ने आगे बताया- मेरा पोता संचय मिसुरिया पढ़ने में बहुत होशियार था। उसे स्कॉरशिप भी मिली थी। अभी होली पर वो घर आया था। जब कह रहा था कि सब ठीक है। शुक्रवार को मेरी उससे फोन पर बात हुई थी। मैंने पूछा कोई परेशानी तो नहीं है? तब बोला- नहीं। अगले दिन शाम को उसकी अपने पापा से अंतिम बार बात हुई थी। फोन काटने से पहले अपने पापा से बोला- टेक केयर। पापा ने सोचा कि ऐसे ही कह रहा होगा। पापा ने भी कह दिया कि हम तो अपनी केयर कर रहे हैं, तुम अपनी केयर करो। उसके बाद फोन कट गया। वो कुछ नहीं बताता था कि डिप्रेशन में हूं या नहीं? मैं भीड़ देखकर बढ़ गया, वहां पोता का शव पड़ा था दादा डॉ. प्रमोद मिसुरिया ने आगे बताया- रोजाना की तरह मैं रविवार सुबह अपने क्लीनिक पर बड़ागांव जा रहा था। रास्ते में उनाव बालाजी रोड पर सुदर्शन गार्डन के पास रेलवे पटरी पर भीड़ लगी थी। ड्राइवर कहने लगा कि कोई ट्रेन से कट गया। वो गाड़ी रोकना चाहता था, मगर मैं जल्दी में था और बिना रुके ही आगे बढ़ गया। बाद में पता चला कि वहां ट्रेन से मेरा पोता ही कट गया था। यह सुनते ही मेरे पैरों की तले जमीन खिसक गई। बाद में मुझे बहुत पछतावा हुआ कि रुकना चाहिए था। होली पर घर आया था संचय डॉ. सुमित मिसुरिया अपने परिवार के साथ सिद्धेश्वर मंदिर के आगे पीताम्बरा एनक्लेव में रहते हैं। डॉ. सुमित बबीना सीएचसी में अधीक्षक पद पर तैनात हैं। संचय (19) उनका इकलौता बेटा था। उससे छोटी एक बेटी सैर्या (15) है। डॉ. सुमित मिसूरिया ने बताया- मेरा बेटा संचय हरियाणा के सोनीपत स्थित जिंदल कॉलेज में एलएलबी फस्ट ईयर का स्टूडेंट था। वह कॉलेज कैंपस में बने हॉस्टल में रहता था। शनिवार शाम को बेटे ने मामा के घर दिल्ली जाने के लिए गेटपास बनवाया था। थोड़ी देर बाद वापस कॉल आया और कहने लगा कि कुछ असाइनमेंट रह गया, इसलिए अभी नहीं जा रहा हूं। कल रविवार को जाऊंगा। हम लोगों को लगा कि वो हॉस्टल में ही है। आधार कार्ड लेकर घर पहुंची पुलिस पिता ने आगे बताया- रविवार सुबह पुलिस को मेरे घर से लगभग डेढ़ किलाेमीटर दूर रेलवे ट्रेक पर बेटे का शव मिला। उसके पास आधार कार्ड मिला। जिसे लेकर पुलिस घर पर आई तो मैंने कह दिया कि मेरा बेटा तो दिल्ली में हैं। जब शव मिलने की खबर मिली तो शक हुआ। मैंने अपने बेटे के नंबर पर कॉल लगाया। तब किसी पुलिसकर्मी ने कॉल उठाई और घटना की जानकारी दी। तब हम लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। वहां मेरे बेटे का शव पड़ा था। ये पता नहीं कि बेटा बिना बताए यहां कैसे पहुंचा? मुझे मामला डाउटफुल लग रहा है। अब पुलिस इंवेस्टीग्रेशन करे। कॉल डिटेल आदि निकाली जाए। वो किसी तरह के दबाव में रहा होगा। दिल्ली से झांसी क्यों आया? किन परिस्थितियों में आया। ये जांच होनी चाहिए। पढ़ने में बहुत होशियार था पिता ने आगे बताया- मेरा बेटा संचय पढ़ने में बहुत ही होशियार था। उसकी मौत डाउनफुल लग रही है। क्योंकि वह बिना बताए झांसी क्यों आया। शव भी झांसी-दिल्ली ट्रैक पर न मिलकर झांसी-कानपुर रेलवे ट्रैक पर कैसे पहुंचा? चोट भी सिर्फ सिर में आई है। इसलिए जांच होनी चाहिए। संचय की मौत की खबर सुनकर मां अर्चना रो-राेकर बेसुध हो गई। बहन सैर्या, पिता डॉ. सुमित और दादा डॉ. प्रमोद मिसुरिया का रो रोकर बुरा हाल है। दादा डॉ. प्रमोद मिसुरिया भी बड़ागांव में क्लीनिक चलाते हैं। मां अर्चना हाउसवाइफ हैं। पिता-दादा से अलग राह चुनी थी परिजनों के अनुसार संचय पढ़ाई में होनहार था। पिता और दादा दोनों डॉक्टर हैं, लेकिन उसने पैतृक पेशे से अलग अपनी राह चुनते हुए वकालत की पढ़ाई शुरू की थी। परिवार और परिचितों का कहना है कि वह मिलनसार स्वभाव का था और आसानी से सभी के साथ घुलमिल जाता था। जांच कर रहे हैं सीपरी बाजार थाना प्रभारी जेपी चौबे का कहना है कि ट्रेन की चपेट में आने से संचय मिसुरियों की मौत हुई है। वह किन परिस्थितियों को चपेट में आया, इसकी जांच की जा रही है। संजय का मोबाइल फोन बरामद कर लिया है। अब उसकी कॉल डिटेल निकाली जा रही है। इसके बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो पाएंगे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    शादी समारोह में युवती पर फब्तियां कसने से बवाल:इटावा के मैरिज होम में कुर्सियां चलीं, मारपीट हुई, सलाह समझौते के बाद मामला शांत
    Next Article
    मलिहाबाद नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि पर ताबड़तोड़ फायरिंग:बाल-बाल बचे, ईदगाह की सफाई व्यवस्था देखने गए थे

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment