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    बदलते मौसम का असर बच्चों के सेहत पर:चाइल्ड ओपीडी में बढ़ें पेशेंट, डॉक्टर बोले- लापरवाही से हो रही दिक्कत

    17 hours ago

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    गोरखपुर में मौसम बदलने का असर बच्चों की सेहत पर देखा जा रहा है। वीमेन डिस्ट्रिक हॉस्पिटल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. अजय ने बताया- मौसम बदलने से न्यू बॉर्न ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं। बच्चों में ज्यादातर सर्दी, जुकाम और बुखार की समस्या सामने आ रही। साथ ही बच्चों में कब्ज बनने की शिकायत भी देखी जा रही, जिससे उनमें सुस्ती रहती है और भूख भी नहीं लगती। सर्दी, जुकाम और बुखार से संबंधित लगभग 25 परसेंट पेशेंट बढ़े हैं। साथ ही कब्ज के लगभग 10 परसेंट बच्चे रोज हमारे पास आते हैं। उन्होंने धूप देखकर लापरवाही न करने और खान- पान पर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। लापरवाही से हो रही समस्या डॉ. अजय ने बताया- मौसम बदल रहा है, ऐसे में दिन में धूप खिलने से बड़ो को गर्मी महसूस हो रही है। अब अक्सर लोग ये सोचते हैं कि अब गर्मी आ गयी है और बच्चों को भी कम या हल्के कपड़ें पहना देते है। यही कारण है कि उन्हें ठंड लग जाती है। ठंडी हवा नाक के रास्ते अंदर जाती है और बच्चा बीमार पड़ जाता है। दूसरी तरफ लोग खान पान में भी लापरवाही करने लगते हैं। कभी ठंडा कभी गर्म खाना खिलाने से भी बच्चा बीमार पड़ता है। नाक बंद होने से हो रही दिक्कत सर्दी जुकाम होने की वजह से नाक जाम कि समस्या काफी ज्यादा बढ़ गया है। जिससे बच्चे को सांस लेने में समस्या होती है। ऐसे में समय- समय पर उसे भाप देना पड़ता है और नोजल ड्राप का इस्तेमाल करना पड़ता है। सीने में होती घरघराहट उन्होंने बताया- सर्दी- खांसी से ग्रसित मरीजों में 'एलर्जिक कफ' की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है। ज्यादातर यह समस्या ठंडा पानी पीने या हल्के कपड़े पहनने की वजह से हो रहा है। एलर्जिक कफ होने से पेशेंट के सीने में जकड़न और घरघराहट होने लगती है। इसके अलावा सांस लेने में भी समस्या होती है। सुस्त पड़ जाता बच्चा कफ होने के बाद बच्चों लगातार खांसी आती है। ये खांसी सूखी या बलगम वाली दोनों हो सकती है। ऐसे में बच्चा पूरी तरह सुस्त हो जाता है। मिक्स सीजन होने की वजह से कभी ठंडी तो कभी गर्मी का असर बच्चों पर बुरी तरह पड़ रहा है। डॉक्टर अजय ने बताया- किसी भी बच्चे को सर्दी, जुकाम या बुखार होने का सबसे बड़ा रीजन यह मिक्स सीजन है। इस सीजन में सुबह-शाम की हवा बच्चों के नाक के रास्ते अंदर जाती है, जिसके कारण यह समस्या ज्यादा होती है। उनका कहना है कि इस मौसम में बड़ो को ठंड नहीं लगती तो उन्हें ध्यान ही नहीं रहता कि बच्चों को लग रही होगी। जिसकी वजह से लापरवाही हो जाती है और बच्चा बीमार पड़ जाता है। हफ्ते भर बाद ही राहत चाइल्ड स्पेशलिस्ट का कहना है कि इस मौसम में एक बार बीमार पड़ने के बाद बच्चे के हेल्थ में लगभग एक हफ्ते बाद ही सुधार देखने को मिलता है। उस बीच उसे बहुत ज्यादा झेलना पड़ता है। कई बार पेशेंट को एडमिट करने की नौबत आ जाती है। इसलिए लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने बचाव के उपाय भी बताएं। जिसपर ध्यान देने से इस समस्या से बचा जा सकता है। ऐसे करें बचाव
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