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    बदायूं में अवैध कटान मामला:वनरक्षक निलंबित, बड़े अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल

    1 hour ago

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    बदायूं के बिसौली सामाजिक वानिकी प्रभाग में सामने आए अवैध कटान और लकड़ी भंडारण के मामले में वनरक्षक के निलंबन के बाद भी सवाल लगातार उठ रहे हैं। 12 राजकीय वृक्षों की कटाई और लगभग 200 क्विंटल लकड़ी के अवैध भंडारण जैसे गंभीर प्रकरण में अब तक की कार्रवाई केवल एक कर्मचारी तक सीमित रहने से विभागीय कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा गया है। दरअसल, प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) निधि चौहान ने 8 जनवरी को बिसौली रेंज के वनरक्षक शगुन पाराशर को निलंबित कर दिया था। शगुन पर सरकारी पेड़ों का अवैध कटान कराने का आरोप है। यह अवैध गतिविधि कोई तात्कालिक घटना नहीं थी, बल्कि लगभग चार महीनों से लगातार चल रही थी। इतने लंबे समय तक कटान, ढुलाई और भंडारण की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के चलती रही, लेकिन विभागीय तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी। निलंबन आदेश में बीट प्रभारी द्वारा सूचना न देने और समय रहते कार्रवाई न करने की बात कही गई है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि अकेले वनरक्षक के स्तर पर इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी का अवैध कारोबार संभव नहीं है। यदि कटान हुआ, तो ढुलाई भी हुई होगी, वाहन भी चले होंगे और भंडारण स्थल भी तय किया गया होगा। ऐसे में यह सब किसकी अनुमति या संरक्षण में हुआ, यह सवाल गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि ईंट भट्ठा परिसर में लंबे समय से लकड़ी का ढेर लगा हुआ था। इसके बावजूद न तो नियमित गश्त में कोई कार्रवाई हुई और न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी की नजर पड़ी। ऐसे में यह सीधे तौर पर बड़े जिम्मेदारों की मिलीभगत का संकेत देता है। यदि सलीके से जांच हुई, तो रेंज और प्रभाग स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी कठघरे में आएगी और खरीद-फरोख्त करने वाले भी बेनकाब होंगे। अब वन विभाग की साख दांव पर लगी है। यदि जांच का दायरा सीमित रखा गया और कार्रवाई केवल निलंबन तक सिमट गई, तो यह संदेश जाएगा कि बड़े मामलों में भी छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी तय कर दी जाती है।
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