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    चाइनीज मांझे से 12 दिन में 10 की गर्दन कटी:लखनऊ में ड्रोन से निगरानी, उड़ रहीं पतंगें; लोग बोले- सड़क पर चलने से डर लगता है

    5 hours ago

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    लखनऊ में 12 दिन के अंदर चाइनीज मांझे से 10 लोगों की गर्दन कट गई। इनमें से एक ने तड़प-तड़पकर दम भी तोड़ दिया। फरवरी में यह पहली घटना 5 फरवरी को हुई। उसके बाद सीएम योगी ने अफसरों को सख्त निर्देश दिए कि अगर किसी की जान पतंग के मांझे से गई तो इसे न रोक पाने के जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके बाद पुलिस ने लखनऊ के बाजारों में अभियान चलाया। कहीं से मांझा जब्त किया तो कहीं दुकानदारों को चाइनीज मांझा न रखने की चेतावनी भी दी। यहां तक की पतंगबाजों की पहचान के लिए ड्रोन भी उड़ा दिया। हासिल कुछ नहीं हुआ। लोकभवन से विधानसभा सभा तक के ऊपर भी पतंग पड़ती दिख जाती है। इसी को लेकर 18 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी फटकार लगाई कि मांझे पर बैन केवल आदेश तक सीमित न रखें। चाइनीज मांझे को रोकने के लिए कानून बनाने के निर्देश दिए। इसकी रिपोर्ट भी 11 मार्च को तलब की है। इन हालिया घटनाक्रमों के बाद दैनिक भास्कर रिपोर्टर पुराने लखनऊ के बाजारों में मांझों की हकीकत जानने पहुंचा। चाइनीज मांझे के बारे में जैसा बताया गया है उस तरह के मांझे दुकानों में नहीं मिले। दुकानदारों ने भी दावा किया कि वे केवल हाथ से बने मांझे ही बेचते हैं। पतंग के शौकीनों से बात की तो उन्होंने सुझाया कि सरकार पतंग उड़ाने की जगह फिक्स कर दे। इससे जहां-तहां मांझे फंसे नहीं मिलेंगे। पढ़िए यह रिपोर्ट… पहले 3 तस्वीरें देखिए… पहले दुकानदारों और पतंग-शौकीनों की बात… हमारी दुकान में केवल सूती मांझा, चाइनीज वाला ऑनलाइन मिल रहा कैसरबाग में हम पतंग और मांझों की एक दुकान पर रुके। यहां बैठे फरमान अहमद से दुकान के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह अपने दादा, पिताजी के बाद खुद दुकान में बैठ रहे हैं। दुकान करीब 75 साल पुरानी है। फरमान ने कहा- हमारे यहां केवल सूती का मांझा बिकता है। इसमें कई वैरायटी हैं। ‘123’ छाप मांझा सबसे टिकाऊ होता है। इसमें कारीगरी में समय लगता है इसलिए थोड़ा महंगा है। आजकल जो चाइनीज मांझा चल रहा है, वह प्लास्टिक और नायलॉन से बनता है। उसका बहुत मजबूत होना ही सबसे बड़ी समस्या है। जल्दी टूटता नहीं है और अगर कहीं फंस जाए तो फंसा ही रहता है। पतला होने की वजह से दिखाई नहीं पड़ता जिससे दुर्घटना की आशंका रहती है। हमारा सूती का हाथ से बनता है तो महंगा है और चाइनीज मशीन से बनता है तो सस्ता है। चाइनीज वाला दुकानों में बंद है लेकिन लोग ऑनलाइन खरीद रहे हैं। देसी मांझा महंगा नहीं, सप्लाई कम होने से रेट ज्यादा रहता है चौक में हमें पतंग के शौकीन मोहम्मद बिलाल मिले। बिलाल ने कहा- चाइनीज मांझा नायलॉन का बना होता है। जल्दी टूटता नहीं है। यह भी कह सकते हैं कि आदमी ही नहीं, यह पेड़ को भी खींच सकता है। इसके उलट देसी सूती मांझा अगर कहीं फंसता है तो फंसते ही टूट जाता है। आप उसे कहीं से भी तोड़ दीजिए, ज्यादा जोर नहीं लगाना पड़ता। हमें पता है कि इससे दूसरों को खतरा हो सकता है। यही वजह है कि हम चाइनीज मांझा इस्तेमाल नहीं करते। हम तो यही चाहते हैं कि चाइनीज मांझा पूरी तरीके से बैन हो जाए और इसका इस्तेमाल करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए। कुछ लोग कहते हैं कि देसी मांझा महंगा होता है, लेकिन असल में यह सप्लाई पर निर्भर करता है। सप्लाई कम होने से रेट ज्यादा रहता है। कई बार सस्ता भी मिल जाता है। वहीं, चाइनीज मांझा दुकानों में नहीं मिलता, लेकिन बहुत दुकानदार चोरी-छिपे बेच रहे हैं। इसीलिए प्रतिबंध के बावजूद यह पूरी तरह बंद नहीं हो पा रहा है। रोज गला कट रहा है, दहशत है पर सब मजाक में चल रहा गोमतीनगर के अमरजीत कुमार सिंह ने कहा- चाइनीज मांझे से रोज किसी-न-किसी का गला कट रहा है। दहशत फैली हुई है पर सब मजाक में चल रहा है। आम आदमी के अनमोल जीवन को कुछ नहीं समझा जा रहा है। आए दिन कट रहे गले को रोकने के लिए शासन-प्रशासन को ठोस और कड़ा एक्शन लेना चाहिए। पतंग उड़ाने से किसी आम आदमी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मैं भी बाइक से चलता हूं और मेरे साथ भी हादसा हो चुका है। कभी-कभी मांझा अचानक दिखाई पड़ता है तो अचानक ब्रेक मारना पड़ता है। कई बार समझ ही नहीं आता कि सामने क्या है। इंदिरानगर, गोमतीनगर और पुराने लखनऊ के लगभग हर इलाके में यह समस्या बढ़ती जा रही है। सरकार को पतंग उड़ाने के लिए शहर के बाहर कहीं जगह फिक्स कर देनी चाहिए। सख्त निगरानी तंत्र भी बनना चाहिए। मैदान में पतंग उड़ानी चाहिए, न कि रिहायशी इलाकों में कैसरबाग के नबी अहमद ने कहा- मांझे से आए दिन हादसे होते हैं। इधर बीच ज्यादा हादसे हुए। हमारे भाई शोएब की अभी मौत भी हो गई। पतंग उड़ाने की रील 2 तरह से आती है। एक नॉर्मल होती है, दूसरी प्लास्टिक की रील होती है। प्लास्टिक वाली से नुकसान होता है। उससे पतंग नहीं उड़ानी चाहिए। पतंग मैदान में ही जाकर उड़ानी चाहिए। रिहायशी इलाकों में उड़ाने से अगर पतंग कहीं कटती है तो उसका मांझा गिरकर जहां-तहां फंस जाता है। अगर मैदान में पतंग उड़ाई जाए तो कटने के बाद रील गिरेगी तो वह मैदान में ही पड़ी रहेगी। अगर सूती की रील होगी तो वैसे भी नुकसान नहीं होता। अब पढ़िए हालिया घटनाएं... हैदरगंज से शुरू हुआ गर्दन कटने का सिलसिला, युवक की मौत 5 फरवरी 2026 को हैदरगंज फ्लाईओवर पर 33 वर्षीय मेडिकल कर्मी मोहम्मद शोएब बाइक से गुजर रहे थे। वहीं पर चाइनीज मांझा फंसा हुआ था। वह शोएब को दिखा नहीं और उनका रेत गया। अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन शोएब नहीं बचे। घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। उसी दिन गोमतीनगर विस्तार में बिजली विभाग के संविदा कर्मी की गर्दन में मांझा लगा। उसे 4 टांके लगे। वह मरम्मत के काम से खंभे पर चढ़ा था। उसके अगले ही दिन मांझे से रिटायर्ड फौजी का जबड़ा करीब 10 इंच तक कट गया। गनीमत रही कि मांझा उनकी गर्दन से थोड़ी दूर लगा। 14 घंटे में 4 गंभीर मामले, 9 दिन में नौवीं दुर्घटना हो गई 9 फरवरी को कुड़िया घाट, बंधा रोड (ठाकुरगंज), हिवेट रोड और नाका फ्लाईओवर के पास 14 घंटे के भीतर 4 लोग मांझे से घायल हुए। किसी की गर्दन कटी, किसी का चेहरा लहूलुहान हुआ। 12 फरवरी को गोमतीनगर के हैनीमेन क्रॉसिंग पर 29 वर्षीय डॉ. सुरभि मांझे से घायल हुईं। वह स्कूटी से जा रही थीं, मांझा अचानक माथे और कान के पास गहरा घाव कर गया। 14 फरवरी को अलीगंज में अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार घायल हुए। 15 फरवरी को आलमबाग के पकरिया पुल के पास पत्रकार ध्रुव नारायण पांडेय मांझे की चपेट में आ गए। 16 फरवरी को हुसैनगंज फ्लाईओवर के पास मोहम्मद मुशर्रफ और उनकी पत्नी भी घायल हुए। 48 घंटे में छापेमारी, 700 से अधिक जगहों पर जांच की मांझे से लखनऊ में एक मौत के बाद पुलिस ने 5 और 6 फरवरी को बड़े पैमाने पर छापेमारी की। दावा किया कि करीब 700 दुकानों और स्थानों का निरीक्षण किया गया। कई जगहों से मांझा जब्त किया गया, चेतावनी दी गई और FIR भी दर्ज की गईं। ड्रोन से भी उड़ती पतंगों के मांझे ट्रेस किए। बाजार खाला पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया जिनके पास से चाइनीज मांझा बरामद होने का दावा किया गया। युवक बाइक से कहीं जा रहे थे, पुलिस ने उन्हें मुखबिरों की सूचना पर पकड़ लिया। दावा किया कि वे पतंगबाजी करने जा रहे थे। पुलिस की ये कार्रवाइयां 2-4 दिनों में ही ढीली पड़ गईं। हाईकोर्ट भी सख्त… केवल शासनादेश पर्याप्त नहीं, कानून बनाना जरूरी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चाइनीज मांझे की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाया। 10 फरवरी को सुनवाई में न्यायालय ने कहा- इसे रोकने के लिए केवल शासनादेश पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानूनी प्रावधान बनाने होंगे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि मांझों की बिक्री और इस्तेमाल जारी रहा, तो पीड़ितों को सरकार को मुआवजा देना होगा। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चाइनीज मांझा कहे जाने वाले लेड-कोटेड और नायलॉन मांझों पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए मजबूत कानूनी ढांचा जरूरी है। कोर्ट ने यूपी सरकार को 11 मार्च तक जवाबी शपथपत्र दाखिल करने को कहा है। पूर्ण प्रतिबंध लगाइए, मौत की सुर्खियों पर सक्रिय न होइए हाईकोर्ट को सरकार ने यह भी तर्क दिया कि ये सिंथेटिक मांझे हैं और इन्हें 'चाइनीज मांझा' गलत नाम दिया गया है, जिससे यह भ्रम होता है कि ये चीन से आयात होते हैं। हालांकि, न्यायालय सरकार की इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल शासनादेश जारी करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। ज्यादा ठोस कदम उठाने की जरूरत है। न्यायालय ने कहा- जब भी ऐसे मांझे से गंभीर चोटें या मृत्यु की घटनाएं घटित होती हैं। वे मीडिया की सुर्खियां बनती हैं, तभी अधिकारी सक्रिय होते हैं। सुर्खियों पर सक्रिय न होइए। नया शपथपत्र दाखिल कर ऐसे मांझों के बनाने, बेचने और इस्तेमाल की रोकथाम के लिए कानून बनाइए। इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाइए। विधिक प्रावधान लागू करने का प्रस्ताव पेश करें। अभियान चलाया जा रहा है: डीसीपी डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित का कहना है कि समय-समय पर अभियान चलाकर पतंग बेचने वाले दुकानदारों की चेकिंग की जा रही है। चाइनीज मांझे से संबंधित जो भी प्रकरण आ रहे हैं, उसकी जांच का उचित कार्रवाई की जा रही है। -------------------------------- संबंधित खबरें भी पढ़िए… ग्राउंड रिपोर्ट - चाइनीज मांझे से इकलौते बेटे की मौत, लिपटकर रोई मां:लखनऊ में लाश देख पत्नी बोली- देखो, कितने स्मार्ट लग रहे लखनऊ में चाइनीज मांझे की वजह से जान गंवाने वाले शोएब का जनाजा गुरुवार को उठा। घर के इकलौते बेटे की लाश देखने के बाद बूढ़ी मां बदहवास हैं। पत्नी का रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी। सुध-बुध खो बैठी पत्नी होश में आने पर बस इतना ही कह पा रही थी कि देखो, सोते हुए कितने स्मार्ट लग रहे हैं। कोई इन्हें उठाओ। (पूरी खबर पढ़िए) गर्दन के ऊपर लगा मांझा, 10-इंच से लंबा गहरा घाव : 30 टांके लगे, बची जान; लखनऊ में 24 घंटे में दूसरी दुर्घटना लखनऊ में एक पूर्व फौजी को मांझा गर्दन से थोड़ा ऊपर जबड़े और होंठ में लग गया। इससे उनके चेहरे पर 10 इंच लंबा गहरा घाव हो गया। मांझा गर्दन में न लगने से पूर्व फौजी की जान बच गई। 30 टांके लगे हैं। यह दुर्घटना शहीद पथ पर गुरुवार दोपहर हुई। यह मांझे से हुई 24 घंटे में दूसरी दुर्घटना थी। इससे पहले बुधवार को मांझे से पुराने लखनऊ में 2 मासूम बेटियों के पिता की मौत हो गई थी। (पूरी खबर पढ़िए) लखनऊ में चाइनीज मांझे से बिजली कर्मी की गर्दन कटी : बाइक से ड्यूटी जाते समय हुआ हादसा, 26 घंटे में 3 घटनाएं लखनऊ में एक और युवक चाइनीज मांझे की चपेट में आ गया। उसकी गर्दन कट गई। उसे डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के बाद उसे छुट्‌टी दे दी गई। घायल की पहचान संविदा बिजली कर्मी सुधीर कुमार के रूप में हुई है। यह घटना 5 फरवरी की शाम करीब 5 बजे गोमती नगर विस्तार में हुई। इसके कुछ घंटे पहले गोमती नगर विस्तार में ही शहीद पथ पर रिटायर्ड फौजी का गाल और होंठ कट गया था। उसे 30 टांके लगे हैं। 4 फरवरी को पुराने लखनऊ में 2 मासूम बेटियों के पिता की मौत हो गई थी। (पूरी खबर पढ़िए) 'चाइनीज मांझा रोकने को शासनादेश काफी नहीं' : लखनऊ हाईकोर्ट ने कहा- कानून बनाएं, वरना पीड़ितों को मुआवजा देना होगा इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चाइनीज मांझे की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने कहा- इसे रोकने के लिए केवल शासनादेश पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानूनी प्रावधान बनाने होंगे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि मांझों की बिक्री और इस्तेमाल जारी रहा, तो पीड़ितों को सरकार को मुआवजा देना होगा। (पूरी खबर पढ़िए)
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