Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    चल पड़ा 3rd US एयरक्राफ्ट कैरियर, आसमान में मंडराने लगे विमान, फिर भिड़ने वाले हैं अमेरिका-इजरायल और ईरान?

    23 hours ago

    1

    0

    मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। अमेरिकी नौसेना के दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले से ही इलाके में तैनात हैं और तीसरा भी रास्ते में है। दूसरी तरफ, भारत और अमेरिका ने ताजा ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है, जबकि इजरायल द्वारा ईरानी सीमा के पास सैन्य उड़ानें भरने की खबरें हैं। बीते कुछ हफ्तों के घटनाक्रम साफ इशारा कर रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल, ईरान पर फिर से बड़े हवाई हमलों की तैयारी में हैं और इस बार यह प्रहार पहले से कहीं ज्यादा घातक हो सकता है। बातचीत के रास्ते बंद हैं और दोनों ओर से तीखी चेतावनियों का दौर जारी है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी वक्त एक नया सैन्य टकराव भड़क सकता है। रक्षा और कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल में अगले दो हफ्तों के भीतर होने वाले चुनाव इस हमले के समय (टाइमिंग) को तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू 27 अक्टूबर को अपने राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन चुनावी चुनौती का सामना कर रहे हैं। वहीं, अमेरिका में होने वाले मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव यह तय करेंगे कि संसद (कांग्रेस) पर किसका नियंत्रण होगा। ऐसे माहौल में आइए नजर डालते हैं उन 5 बड़े संकेतों पर, जो इशारा कर रहे हैं कि मिडिल ईस्ट बहुत जल्द एक बड़े सैन्य टकराव का गवाह बन सकता है।चल पड़ा तीसरा अमेरिकी एयरक्रॉफ्ट करियरअमेरिका ने मध्य पूर्व में अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' भेजा है। इसके साथ 'यूएसएस माकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप' भी है, जिसमें दो एम्फीबियस लैंडिंग जहाज शामिल हैं। एपी (AP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन जहाजों पर कुल मिलाकर 7,000 से अधिक नाविक और 2,000 मरीन सवार हैं। इसका मतलब यह है कि नवंबर की शुरुआत तक, इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी असामान्य रूप से बहुत अधिक हो जाएगी। यहाँ 20,000 से अधिक नाविक और मरीन होंगे, साथ ही सैकड़ों विमान भी होंगे, जिनमें F-53 भी शामिल हैं। 'यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश' और 'यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन' पहले से ही इस क्षेत्र में मौजूद हैं। इससे ट्रम्प को ईरान पर हमले तेज करने के कई विकल्प मिल जाते हैं। साथ ही, अगर वे होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने का फैसला करते हैं, तो वे वहां जमीनी सेना भी तैनात कर सकते हैं। हालाँकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस क्षेत्र में और अधिक सैनिक भेजना, ईरान के साथ बातचीत के लिए ट्रम्प की एक रणनीति हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' (सभी बमों की जननी) कहे जाने वाले बम का इस्तेमाल करने का भी संकेत दिया है। GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट, जिसे MOAB भी कहा जाता है, अब तक बनाए गए सबसे बड़े गैर-परमाणु बमों में से एक है। लगभग 9,800 किलोग्राम वजनी यह बम सुरंगों, गुफाओं और मजबूत ढांचों को कुछ ही सेकंड में पूरी तरह से नष्ट कर सकता है।मिलिट्री एक्सरसाइज से ईरान कर रहा जोर-आजमाइशCNN की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान पूरे देश में सैन्य अभ्यास कर रहा है। इसमें एक साथ 30 बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण भी शामिल है। तेहरान से आ रही खबरों से संकेत मिलता है कि वहां के कमांडर फिर से शुरू होने वाले संभावित संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में जवाबी कार्रवाई के तौर पर IRGC ने एक नए हथियार सभी बमों का पिता (फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स) का प्रदर्शन किया। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहाबी ने स्थानीय मीडिया को बताया, दुश्मन के लिए यह कुछ नया है। IRGC ने यह भी धमकी दी है कि अगर सैन्य तनाव बढ़ता है, तो वे अपनी नई लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करेंगे। विश्लेषकों का मानना ​​है कि ये मिसाइलें ब्रिटेन में मौजूद अमेरिकी एयरबेस या जर्मनी के रामस्टीन स्थित लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंच सकती हैं। रामस्टीन, अमेरिका के बाहर स्थित सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य ठिकाना है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने ब्रिटेन में तैनात अपने सभी लंबी दूरी के बॉम्बर विमानों को वापस उनके घरेलू बेस पर बुला लिया था। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने कहा है कि इस बार कोई रेड लाइन नहीं होगी। रेज़ाई ने चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में तेल सुविधाओं, समुद्र के नीचे बिछी केबलों, डेटा सेंटरों और AI सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: सऊदी छोड़िए अब तो रेंज में UAE, हूती तो गजब कर रहे हैं, कांप गए अंसारुल्लाह के दोनों दुश्मनअमेरिका ने सुरक्षा परामर्श जारी कियाएक और अहम संकेत जो संघर्ष के फिर से शुरू होने की संभावना की ओर इशारा करता है, वह है मध्य पूर्व में अमेरिकी राजनयिक मिशनों द्वारा अमेरिकी नागरिकों के लिए जारी की गई नई सुरक्षा चेतावनियाँ। सऊदी अरब, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अमेरिकी दूतावासों ने चेतावनी जारी की है कि हालात तेजी से और बिना किसी पूर्व सूचना के बिगड़ सकते हैं। इन परामर्शों में अमेरिकियों से कहा गया है कि वे उड़ानों के रद्द होने और हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) के बंद होने की स्थिति के लिए तैयार रहें। सऊदी अरब में ईरान समर्थित हूती हमलों ने तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे इस संघर्ष में एक नया मोर्चा खुल गया है। 21 अक्टूबर को अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब में मौजूद अपने मिशनों से कुछ राजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों को वापस जाने का आदेश दिया। इस क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी मिशनों से भी परिवारों को वापस बुलाने की योजना बनाई जा रही है। इसी तरह के व्यापक परामर्श मार्च में भी जारी किए गए थे, जब अमेरिका-इजरायल हमलों के जवाब में तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए थे।इसे भी पढ़ें: United Nations Day 2026: संयुक्त राष्ट्र की साख पर सवाल, सुधार से ही बचेगी प्रतिष्ठाभारत ने जारी की एडवाइजरीसंघर्ष के पिछले दौरों में, भारत अक्सर सुरक्षा एडवाइजरी जारी करने वाले पहले देशों में से एक रहा है; कई बार तो लड़ाई शुरू होने से पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी गई। इस हफ्ते की शुरुआत में भी ऐसी ही एक एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें भारत ने सऊदी अरब में मौजूद अपने नागरिकों से "पूरी सावधानी" बरतने को कहा और हवाई हमलों को लेकर चेतावनी दी। यह एडवाइजरी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमले के बाद जारी की गई, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इसके अलावा, सभी भारतीय एयरलाइनों ने 31 अक्टूबर तक सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं, और कुछ ने तो 30 नवंबर तक के लिए रद्द कर दी हैं। मक्का और मदीना में फंसे लगभग 4,000 भारतीय तीर्थयात्रियों को भी वहां से वापस लाया जा रहा है।इसे भी पढ़ें: जेल की सलाखों के पीछे ट्रंप? अजीबो-गरीब हरकते करते दिखें, जानें सच्चाईईरान के आसमान के ईर्ग-गिर्द मंडराने लगे इजरायली विमानइस बीच, इजरायल चुप नहीं बैठा है। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते की शुरुआत में इजरायल के दर्जनों लड़ाकू विमानों ने ईरानी सीमा के पास उड़ानें भरीं। यह घटनाक्रम अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई एक गुप्त मुलाकात के समय ही हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायल के इस अभ्यास में दर्जनों लड़ाकू विमान और ईंधन भरने वाले विमान शामिल थे। इन विमानों का उड़ान मार्ग ऐसा था, जिससे ईरान पर संभावित हमले का संकेत मिलता है; ये विमान सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र से होकर गुजरे। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका को इन उड़ानों की जानकारी थी। इजरायल ने इसे एक 'प्रशिक्षण अभ्यास' बताया है, जिसका मकसद अपनी 'ताकत का प्रदर्शन' करना था। 
    Click here to Read more
    Prev Article
    West Asia में अस्थिरता की वजह इजराइल: Regional Four बैठक में बोले चार देशों के विदेश मंत्री
    Next Article
    France Protests: नए उपद्रव की आशंका से Paris के प्रमुख संग्रहालय बंद, 70000 पुलिसकर्मी तैनात

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment