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    चीन-पाकिस्तान की उड़ी रातों की नींद! भारत आ रहे हैं AI से लैस 114 सुपर राफेल, फ्रांस भारत को देगा 'ब्रह्मास्त्र' बनाने की सीक्रेट तकनीक

    12 hours ago

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    भारत की 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल और भारत-फ्रांस रणनीतिक रक्षा साझेदारी को एक ऐतिहासिक मजबूती मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस की आगामी आधिकारिक यात्रा से ठीक पहले पेरिस ने संकेत दिया है कि वह भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 114 राफेल फाइटर जेट की मेगा-डीक के तहत शत-प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और इन विमानों में भारतीय स्वदेशी हथियारों के एकीकरण (Integration) के लिए पूरी तरह तैयार है। फ्रांसीसी कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, फ्रांस अब भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को केवल एक "ग्राहक-आपूर्तिकर्ता" (Buyer-Seller) के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक और तकनीकी सहयोगी के रूप में देखता है। इसे भी पढ़ें: Iran-US Ceasefire Confirmed | अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम समझौता तय, सप्ताहांत पर यूरोप में होंगे हस्ताक्षर, Donald Trump ने जारी किया बयान  फ्रांसीसी सूत्रों ने संकेत दिया कि "मेक इन इंडिया" इस डील का एक अहम हिस्सा होगा। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस की आगामी यात्रा से पहले हुआ है, जिसमें रक्षा सहयोग मुख्य एजेंडा में शामिल होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि PM मोदी शनिवार से फ्रांस और स्लोवाकिया की एक हफ्ते की यात्रा पर जाएंगे। फ्रांस में, वह G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्रों में भाग लेंगे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्वदेशी इंटीग्रेशनखबरों के अनुसार, फ्रांस ने कहा है कि राफेल प्रोग्राम के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) पूरी तरह स्वीकार्य है और राफेल जेट में भारत में बने हथियारों, मिसाइलों और गोला-बारूद को जोड़ना भी समझौते का एक अहम हिस्सा है।फ्रांस ने दोहराया है कि वह भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को केवल "ग्राहक-आपूर्तिकर्ता" के रिश्ते के तौर पर नहीं, बल्कि एक लंबी अवधि की रणनीतिक साझेदारी के तौर पर देखता है।114 राफेल की खरीद प्रक्रिया जारी114 नए राफेल जेट खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत ने 114 और राफेल फाइटर जेट खरीदने के लिए फ्रांस को एक औपचारिक 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' (LoR) भेजा है; यह सरकार-से-सरकार रक्षा खरीद प्रक्रिया शुरू करने के लिए ज़रूरी औपचारिक दस्तावेज़ है।ये नए विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए हैं और "मेक इन इंडिया" पहल के तहत डसॉल्ट एविएशन और एक भारतीय कंपनी के बीच साझेदारी के ज़रिए भारत में बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसे भी पढ़ें: बॉम्बे हाई कोर्ट की Salman Khan के पड़ोसी को नसीहत! 'सोशल मीडिया पर होने का मतलब यह नहीं कि किसी की मानहानि की जाए'भारत ने इस डील के लिए कुछ ऐसी शर्तें रखी हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, जिनमें स्वदेशी हथियार, भारतीय डेटा लिंक सिस्टम और डिजिटल नेटवर्किंग क्षमताएं शामिल हैं।प्रस्तावित समझौते में इंजन, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी शामिल होने की उम्मीद है।इसके अलावा, सभी 114 विमान भारतीय हथियार और मिसाइलें ले जाने में सक्षम होंगे। डसॉल्ट सुरक्षित डेटा लिंक भी देगा, जिससे राफेल जेट भारतीय रडार, सेंसर और ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम के साथ पूरी तरह से जुड़ सकेंगे।AI क्षमताओं वाले एडवांस्ड राफेल वेरिएंटभारतीय वायु सेना अभी 2015 की डील के तहत मिले 36 राफेल जेट के F3R वर्शन का इस्तेमाल कर रही है। डसॉल्ट ने इसके बाद F4 स्टैंडर्ड विकसित किया है, जबकि अगली पीढ़ी का F5 वेरिएंट अभी बन रहा है।भारत नई डील में F-4 और आने वाले F-5 वेरिएंट का मिश्रण चाहता है। इन नए वर्शन में अत्याधुनिक AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताएं, एडवांस्ड सेल्फ-प्रोटेक्शन सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइलें और बेहतर सैटेलाइट कम्युनिकेशन सुविधाएं होंगी।नई पीढ़ी के राफेल जेट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-आधारित एल्गोरिदम भी होंगे जो पायलटों को बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस (हालात की समझ) और निर्णय लेने में मदद करेंगे। इससे युद्ध के मैदान में विमान की प्रभावशीलता और जीवित रहने की क्षमता बढ़ेगी।55-60% स्वदेशी कंटेंटइस प्रोग्राम में 55-60 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट हासिल होने की उम्मीद है, जिसमें डसॉल्ट एविएशन, इंजन बनाने वाली कंपनी सैफरन और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में हिस्सा ले रही हैं।एक बार जब भारत में एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स के लिए मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी स्थापित हो जाएगी, तो प्रोजेक्ट में स्वदेशी कंटेंट 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे भारतीय वायु सेना की ताकत काफी बढ़ेगी। भारतीय वायु सेना पहले से ही 36 राफेल जेट का संचालन कर रही है, जबकि भारतीय नौसेना ने 26 नेवल राफेल वेरिएंट का ऑर्डर दिया है। अगर 114 नए विमानों की डील फाइनल हो जाती है, तो भारत के पास कुल 176 राफेल जेट होंगे।अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर राफेल के लिए ट्रेनिंग के साथ-साथ मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाएं पहले से ही चालू हैं। भारतीय वायु सेना के पास जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और ट्रेंड कर्मचारी हैं ताकि तुरंत दो अतिरिक्त स्क्वाड्रन (जिनमें लगभग 36 से 38 विमान होंगे) को ऑपरेशनल सर्विस में शामिल किया जा सके। Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi 
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