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    'चंपत राय बेदाग-निष्कलंक, उनका भोलापन मुसीबत बना':सब पर विश्वास करके गलती की; महासचिव बनने के बाद गोविंद देव गिरी का पहला इंटरव्यू

    3 hours ago

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    चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। उनका भोलापन उनके लिए बाधा बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास किया। व्यक्तियों की पहचान करने में उनसे चूक हुई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने ये बातें कहीं। जिम्मेदारी संभालने के बाद दैनिक भास्कर उन्होंने पहला इंटरव्यू दिया। चढ़ावा चोरी उन्होंने कहा- ट्रस्ट के दायित्व में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…. सवाल : राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की व्यवस्था पर सवाल उठे। क्या आपको लगता है कि व्यवस्था में कमियां थीं? जवाब- ट्रस्ट के दायित्व में कुछ कमियां तो रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार की आवश्यकता है। चोरी करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। हालांकि इसके पीछे हमें कुछ षड़यंत्र भी नजर आते हैं। घटना हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन घटना को जिस तरह पेश किया गया, उस पर ध्यान देने की जरूरत है। सवाल : चंपत राय लंबे समय तक ट्रस्ट के महासचिव रहे। उनके कार्यकाल को आप किस तरह देखते हैं? जवाब- चंपत राय जी के प्रति मन में आदर है। मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि चंपत जी बेदाग हैं। यह मेरा केवल विश्वास नहीं, मेरा अनुभव है। लेकिन उनका भोलापन उनके लिए बाधा बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करना शुरू कर दिया। व्यक्तियों की पहचान करने में भी उनसे चूक हुई। उनकी सज्जनता ही उनके लिए बाधा बन गई, ऐसा मेरा विचार है। सवाल : महासचिव के तौर पर आपकी तीन प्राथमिकता क्या होंगी? जवाब- मेरी पहली प्राथमिकता है कि यह मंदिर देव सेवा का केंद्र बने। केवल अयोध्या ही नहीं, देश के अन्य मंदिरों के लिए भी श्रीराम मंदिर एक आदर्श बने। मंदिर की व्यवस्था और देव सेवा ऐसी हो कि लोग यहां से प्रेरणा लेकर जाएं। देव सेवा का ऐसा वातावरण और व्यवस्था तैयार करना मेरी पहली प्राथमिकता होगी। मेरी दूसरी प्राथमिकता पारदर्शी व्यवस्था बनाना है। तीसरी प्राथमिकताअयोध्या के लोगों और मंदिर के बीच संवाद कैसे मजबूत हो, उनकी अपेक्षाओं और भावनाओं को कैसे समझा जाए, इसके लिए बेहतर संवाद व्यवस्था बनाना है। सवाल : आप अब तक राम मंदिर ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, अब महासचिव बनाए गए हैं। इस बदलाव को किस तरह देखते हैं? जवाब- प्रभु अपने चरणों में मुझे कहीं भी रखें, मेरे लिए दोनों बराबर हैं। कोषाध्यक्ष के रूप में भी मुझे समय देना पड़ता था, लेकिन अब महासचिव के रूप में अधिक समय देना पड़ेगा। मुझे अपनी व्यवस्था थोड़ी बदलनी पड़ेगी। लेकिन यह राम सेवा है। प्रभु राम की सेवा के लिए जितना समय देना पड़ेगा, मैं दूंगा। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं है, रामलला की सेवा महत्वपूर्ण है। सवाल : महासचिव की जिम्मेदारी संभालने से पहले आपके मन में कोई संकोच था? जवाब- प्रभु राम की सेवा के लिए किसी तरह का संकोच नहीं होता। लेकिन मेरे मन में चिंता जरूर थी। पूरे साल मेरे कार्यक्रम पहले से निर्धारित रहते हैं और मेरी व्यस्तता भी काफी रहती है। महासचिव का दायित्व बड़ा है, इसलिए अब मुझे अपने कार्यक्रमों में से समय निकालकर अयोध्या आना पड़ेगा। सवाल यह था कि समय कैसे निकाल पाऊंगा। लेकिन मैंने निश्चय किया कि प्रभु राम के लिए समय निकालना ही है। चाहे जैसे निकालना पड़े, राम सेवा के लिए समय देना होगा। सवाल : ट्रस्ट में पहली बार निर्मला यादव को महिला ट्रस्टी बनाया गया है। इसके पीछे क्या सोच है? जवाब- हमें माताओं को साथ लेकर चलना चाहिए। यही मेरी सोच है। निर्मला जी की प्रोफाइल मैंने पढ़ी है। उनके अनुभव और योग्यता के अनुसार यहां उनकी आवश्यकता है। वह संस्कृत से एमए हैं और हिंदी से भी एमए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बहुत काम किया है। उनकी योग्यता और अनुभव का लिया जाएगा। सवाल : मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपए के चढ़ावे की निगरानी और पारदर्शिता के लिए अब क्या नई व्यवस्था बनाई जाएगी? जवाब- : इसके लिए कई बैंकों के लोग आकर हमें सुझाव दे चुके हैं। जब ये सुझाव पूरी तरह सामने आ जाएंगे और व्यवस्था तय हो जाएगी, तब इसके बारे में विस्तार से बताया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी हो। सवाल : ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला CEO बनाया है। एक तरफ महासचिव और दूसरी तरफ CEO हैं। दोनों की जिम्मेदारियां कैसे तय होंगी? जवाब- CEO अकेले महासचिव के अधीन काम करने वाली व्यवस्था नहीं होगी। हमारा न्यास जो विचार करेगा, उस निर्णय को कैसे लागू करना है, उसकी जिम्मेदारी CEO की होगी। न्यास को क्या करना चाहिए और कौन-सी नीति बनानी चाहिए, यह न्यास का विषय है। उस नीति और निर्णय को लागू करना CEO का काम होगा। इसलिए दोनों के बीच तालमेल बहुत अच्छा होना चाहिए। जिम्मेदारियां अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है—रामलला की सेवा और मंदिर की व्यवस्था को बेहतर बनाना। सवाल : अगर महासचिव और CEO की राय किसी मुद्दे पर अलग होती है तो अंतिम फैसला कौन करेगा? जवाब- महासचिव की राय CEO से अलग होगी, ऐसा नहीं होगा। क्योंकि निर्णय महासचिव को अकेले नहीं लेना है। न्यास को जो निर्णय लेना है, उस निर्णय को लागू करने का काम CEO का है। जब पूरी प्रणाली इसी प्रकार निर्धारित है तो मतभेद का प्रश्न ही नहीं उठता। नीति और निर्णय न्यास करेगा और उसे लागू कराने की जिम्मेदारी CEO की होगी। इसलिए दोनों भूमिकाओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा होने का सवाल नहीं है। सवाल : क्या आने वाले समय में ट्रस्ट के फैसलों, चढ़ावे की रकम और खर्च को सार्वजनिक करने की कोई नई व्यवस्था बनेगी? जवाब- जरूर, हमारा प्लान है कि श्रद्धालुओं की संख्या, मंदिर में चढ़ने वाली रकम का ब्योरा रोज वेबसाइट पर डाला जाए। इसके लिए काम चल रहा है। धीरे-धीरे सभी व्यवस्थाओं को अपडेट किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि श्रद्धालुओं को मंदिर की व्यवस्थाओं के बारे में अधिक से अधिक जानकारी उपलब्ध हो और पारदर्शिता बनी रहे। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़िए… योगी ने कान्हा बने बच्चों को टेडी बियर दिया:मथुरा में गोद में लेकर खीर खिलाई, सांसद हेमा मालिनी मुस्कुराती रहीं सीएम योगी आदित्यनाथ गुरुवार को मथुरा पहुंचे। यहां वह बच्चों के अन्नप्राशन के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान योगी ने बच्चों का झुनझुना बजाया। कान्हा बने बच्चों को टेडी बियर गिफ्ट किए। उनको गोद में लेकर दुलारा और खीर खिलाई। इस दौरान पीछे खड़ी सांसद हेमा मालिनी मुस्कुराती रहीं। पूरी खबर पढ़िए…
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