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    चंद्रशेखर ने 1% आबादी वाले चेहरों को टिकट दिए:17 सीटों पर चौंकाने वाला दांव; क्या फेल होगा सपा का गणित

    16 hours ago

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    उत्तर प्रदेश की राजनीति को जाति के चश्मे से अलग करके नहीं देख सकते। राजनीतिक दल भी प्रत्याशियों के चयन में जाति के समीकरण को देखकर ही फैसले लेते हैं। पिछले शुक्रवार (31 जुलाई) को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की ओर से घोषित 45 प्रत्याशियों में 17 ऐसे चेहरे हैं, जिनकी आबादी उस क्षेत्र में अन्य जातियों से कम है। ऐसे में चंद्रशेखर की राजनीतिक समझ पर सवाल उठ रहे हैं। चंद्रशेखर ने प्रत्याशी चयन में अपनाई मायावती की रणनीति चंद्रशेखर ने 45 विधानसभा सीटों के लिए प्रभारी घोषित किए थे। फिलहाल इन्हें विधानसभा प्रभारी बनाया गया है। लेकिन, ये सभी क्षेत्र में प्रत्याशी के तौर पर ही जनसंपर्क कर रहे हैं। प्रत्याशी चुनने का यह तरीका बसपा की रणनीति से मिलता-जुलता है। बसपा में भी विधानसभा प्रभारियों को बाद में प्रत्याशी घोषित करने का चलन रहा है। अब चंद्रशेखर भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। जातीय समीकरण की बात करें, तो 45 में सबसे ज्यादा 18 दलित चेहरों को जगह मिली है। इनमें 5 सीटें सामान्य हैं। इसके बाद 16 ओबीसी, 10 मुस्लिम और 1 सिख प्रत्याशी को प्रभारी बनाया गया है। अब बात चंद्रशेखर के उन 17 प्रत्याशियों की, जिनकी जाति की आबादी उनके ही क्षेत्र में सबसे कम है… 1. जाफराबाद में प्रजापति चेहरे पर दांव, आबादी 1% से भी कम जौनपुर की जाफराबाद विधानसभा सीट पर पार्टी ने जियालाल प्रजापति को प्रभारी बनाया है। वह ओबीसी वर्ग से आते हैं। सीट के जातीय समीकरण को देखते हुए उनका चयन चर्चा में है। जाफराबाद में प्रजापति मतदाताओं की आबादी 1% से भी कम है। वहीं, ठाकुर 23%, जाटव 14%, यादव 13% और ब्राह्मण 10% हैं। निषाद, पटेल और वैश्य मतदाता भी 5% से ज्यादा हैं। राजनीतिक इतिहास की बात करें, तो यहां सबसे ज्यादा यादव, क्षत्रिय और ब्राह्मण समाज के विधायक चुने गए हैं। 2. बाह सीट पर गुर्जर चेहरे को बनाया प्रभारी, आबादी सिर्फ 1% आगरा की बाह विधानसभा सीट पर सरला सिंह गुर्जर को प्रभारी बनाया गया है। वह ओबीसी वर्ग से आती हैं। सीट के जातीय समीकरण को देखते हुए उनके चयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बाह में ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं की आबादी करीब 21-21% है। इसके बाद जाटव 18% और निषाद 15% हैं। वहीं, गुर्जर समाज की आबादी करीब 1% ही है। सीट के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें, तो यहां सबसे ज्यादा 12 बार क्षत्रिय विधायक चुने गए हैं। 3. मेरठ कैंट में 24% वैश्य, सिर्फ 2% पाल आबादी वाले संजीव पर दांव मेरठ कैंट विधानसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी ने संजीव पाल को प्रभारी बनाया है। वह ओबीसी वर्ग से आते हैं। सीट के जातीय समीकरण को देखें, तो यहां पाल समाज की आबादी करीब 2% ही है। मेरठ कैंट में वैश्य मतदाता सबसे ज्यादा 24% हैं। इसके अलावा पंजाबी 12%, ब्राह्मण और जाटव 9-9%, जबकि जाट और वाल्मीकि 7-7% हैं। इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी खास है। यहां से पिछले 8 विधायक वैश्य समाज से चुने गए हैं। ऐसे में कम आबादी वाले पाल समाज से चेहरे को आगे करने के फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 4. सिकंदराराऊ में 13-13% लोधी-ठाकुर, 3% यादव आबादी को मौका हाथरस की सिकंदरा राऊ विधानसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी ने बिजेंद्र सिंह यादव को प्रभारी बनाया है। वे ओबीसी वर्ग से आते हैं। इस सीट पर यादव मतदाताओं की आबादी करीब 3% ही है। सिकंदराराऊ में लोधी और ठाकुर 13-13%, जाटव 12% और मुस्लिम 10% हैं। वहीं, धनगर और कुशवाहा समाज की आबादी 8-8% है। 90 के दशक में यादव समाज के 4 विधायक जरूर चुने गए, लेकिन इसके बाद ठाकुर समाज के 5 और ब्राह्मण समाज के एक विधायक चुने गए। ऐसे में यादव चेहरे को आगे करने के पीछे पार्टी की रणनीति क्या है, यह अहम सवाल है। 5. पलिया में 18% मुस्लिम, सरदार मनोहर सिंह पर जताया भरोसा लखीमपुर खीरी की पलिया विधानसभा सीट पर पार्टी ने सरदार मनोहर सिंह को प्रभारी बनाया है। वह सिख समाज से आते हैं। पलिया में सिख मतदाताओं की आबादी करीब 3% ही है। सीट पर मुस्लिम 18%, कुर्मी 16%, ब्राह्मण 15%, थारू 14% और जाटव 12% हैं। वहीं, राजनीतिक इतिहास में इस सीट से अब तक 7 बार दलित विधायक चुने जा चुके हैं। ऐसे में 3% सिख आबादी वाले चेहरे पर दांव को लेकर पार्टी के जातीय समीकरण पर सवाल उठना स्वाभाविक है। 6. गोविंद नगर में 44% ब्राह्मण, 5% वाल्मीकि आबादी वाले तुलसी राम को बनाया प्रभारी कानपुर नगर की गोविंद नगर विधानसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी ने तुलसी राम वाल्मीकि को प्रभारी बनाया है। वे एससी वर्ग से आते हैं। इस सीट पर वाल्मीकि समाज की आबादी करीब 5% है। गोविंद नगर में ब्राह्मण मतदाता सबसे ज्यादा 44% हैं। वहीं, मुस्लिम और कुर्मी समाज की आबादी करीब 5-5% है। इस सीट से अब तक 14 बार ब्राह्मण और 3 बार भूमिहार विधायक चुने गए हैं। ऐसे में वाल्मीकि समाज से आने वाले चेहरे को आगे करने के फैसले को लेकर पार्टी की रणनीति चर्चा में है। 7. लखनऊ कैंट में 22% कायस्थ, 3.5% धानुक आबादी वाले अनिकेत पर दांव लखनऊ कैंट विधानसभा सीट पर अनिकेत धानुक को प्रभारी बनाया गया है। वह एससी वर्ग से आते हैं। चुनाव में पार्टी उन्हें प्रत्याशी बना सकती है। इस सीट पर धानुक समाज की आबादी करीब 3.5% है। लखनऊ कैंट में कायस्थ 22%, ब्राह्मण व यादव 19-19% और पंजाबी 14% हैं। मुस्लिम मतदाता करीब 8% हैं, जबकि कुर्मी और एक अन्य पिछड़ा वर्ग करीब 5-5% है। राजनीतिक इतिहास की बात करें, तो यहां सबसे ज्यादा 12 बार ब्राह्मण विधायक चुने गए हैं। 8. रोहनिया में 26% भूमिहार, 5% यादव आबादी वाले अनुद यादव पर दांव वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी ने अनुद यादव को प्रभारी बनाया है। वह ओबीसी वर्ग से आते हैं। इस सीट पर यादव मतदाताओं की आबादी करीब 5% है। रोहनिया में भूमिहार 26%, कुर्मी 21%, बनिया 10%, ब्राह्मण और जाटव 9-9% और राजभर 7% हैं। 2012 में सीट बनने के बाद यहां 3 बार पटेल और एक बार भूमिहार समाज के विधायक चुने गए हैं। 9. अयाह शाह में 18% ब्राह्मण, 8% निषाद आबादी वाले राजा राम पर भरोसा फतेहपुर की अयाह शाह विधानसभा सीट पर राजा राम निषाद को प्रभारी बनाया गया है। वह ओबीसी वर्ग से आते हैं। इस सीट पर निषाद मतदाताओं की आबादी करीब 8% है। अयाह शाह में ब्राह्मण 18% और ठाकुर 12% हैं। वहीं, मुस्लिम, यादव, पासवान, बनिया और रैदास समाज की आबादी 6% से कम है। 2008 में सीट बनने के बाद यहां 3 बार वैश्य और एक बार पाल समाज के विधायक चुने गए हैं। ऐसे में निषाद चेहरे को आगे करने का फैसला किस समीकरण को प्रभावित करेगा, यह देखने वाली बात होगी। 10. मधुबन में 19% जाटव को छोड़कर, 7% यादव आबादी वाले पर दांव मऊ की मधुबन विधानसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी ने शिव सागर यादव को प्रभारी बनाया है। वह ओबीसी वर्ग से आते हैं। इस सीट पर यादव समाज की आबादी करीब 7% है। मधुबन में जाटव 19%, ब्राह्मण 14%, मुस्लिम 9% और कुर्मी 8% हैं। इस सीट पर अलग-अलग जातियों के विधायक चुने जाते रहे हैं। 11. रुधौली में 16-16% ब्राह्मण-जाटव, मो. आकिब को बनाया प्रभारी बस्ती की रुधौली विधानसभा सीट पर पार्टी ने डॉ. मो. आकिब को प्रभारी बनाया है। वह मुस्लिम समाज से आते हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की आबादी करीब 13% है। रुधौली में ब्राह्मण और जाटव 16-16%, कुर्मी 14% और मौर्य 11% हैं। पासी, वैश्य और यादव मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। राजनीतिक इतिहास में यहां 5 बार कुर्मी और 2 बार वैश्य समाज के विधायक चुने गए हैं। एक बार ब्राह्मण समाज के विधायक भी रहे हैं। ऐसे में मुस्लिम चेहरे को आगे करने की पार्टी की रणनीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। 12. तमकुही राज में 14% ब्राह्मण, एडवोकेट रकीब आलम बने प्रभारी कुशीनगर की तमकुही राज विधानसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी ने एडवोकेट रकीब आलम को प्रभारी बनाया है। वह मुस्लिम समाज से आते हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की आबादी करीब 9% है। तमकुही राज में ब्राह्मण 14%, वैश्य 12%, जाटव 9% और मौर्य 8% हैं। राजनीतिक इतिहास की बात करें, तो यहां से सबसे ज्यादा बार वैश्य समाज के विधायक चुने गए हैं। ऐसे में मुस्लिम चेहरे को आगे करने का फैसला किस सामाजिक समीकरण को प्रभावित करेगा, यह अहम सवाल है। 13. जमानिया में 17% ठाकुर, जावेद इकबाल पर जताया भरोसा गाजीपुर की जमानिया विधानसभा सीट पर जावेद इकबाल अंसारी को प्रभारी बनाया गया है। वह मुस्लिम समाज से आते हैं। यहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी करीब 12% है। जमानिया में ठाकुर 17%, यादव 14%, जाटव 13%, भूमिहार 11%, ब्राह्मण 9% और कुशवाहा 8% हैं। इस सीट से सबसे ज्यादा 4 बार यादव समाज के विधायक चुने गए हैं। इसके अलावा एक-एक बार ठाकुर और दलित समाज के विधायक भी रहे हैं। ऐसे में मुस्लिम चेहरे को आगे करने का असर किस दल के समीकरण पर पड़ेगा, यह दिलचस्प होगा। 14. बबीना में 14% लोधी, 11% यादव आबादी वाले कुंज बिहारी पर दांव झांसी की बबीना विधानसभा सीट पर कुंज बिहारी यादव को प्रभारी बनाया गया है। वह ओबीसी वर्ग से आते हैं। इस सीट पर यादव मतदाताओं की आबादी करीब 11% है। बबीना में लोधी 14%, कुशवाहा 12% और यादव व अहिरवार/जाटव (SC) 11-11% हैं। वहीं, ब्राह्मण 8% और बनिया 5% हैं। इस सीट से 5 बार अहिरवार/जाटव (SC) समाज के विधायक चुने गए हैं। इसके अलावा 2 बार ठाकुर और एक बार लोधी समाज के विधायक भी रहे हैं। ऐसे में यादव चेहरे को आगे कर आजाद समाज पार्टी किस समीकरण को साधना चाहती है, यह अहम सवाल है। सपा के फार्मूले पर चंद्रशेखर ने अनारक्षित सीटों पर उतारे दलित प्रत्याशी चंद्रशेखर ने अनारक्षित सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारकर सपा के 2024 फार्मूले की नकल की है। चर्चा है कि इस बार सपा ऐसी गैर आरक्षित सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है, जहां दलित आबादी निर्णायक असर रखते हैं। इसी तरह चंद्रशेखर ने मुस्लिम बहुल सीटों पर इसी समाज के प्रत्याशी उतारकर दलित-मुस्लिम समीकरण को साधना चाहते हैं। वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद कासिम कहते हैं- चंद्रशेखर की राजनीति के केंद्र में मुस्लिम रहे हैं। जिस नगीना सीट से वे सांसद हैं, वहां 62 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। नगीना के अलावा उनके हर प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे। विधानसभा में तो खुद चंद्रशेखर भी जमानत नहीं बचा पाए थे। उपचुनाव में जरूर 2 सीटों पर उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर रही थी, लेकिन तब बसपा मैदान में नहीं थी। ऐसे में 2027 में दलित बसपा को छोड़कर और मुस्लिम सपा को छोड़कर चंद्रशेखर के साथ कितना जाएंगे, ये दिलचस्प होगा। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें- चंद्रशेखर ने चुनावी बिगुल फूंका, 45 विधानसभा प्रभारी उतारे,18 दलित, 10 मुस्लिम को जगह आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने शुक्रवार को 45 विधानसभा प्रभारियों की पहली सूची जारी की। इसमें पूर्व IPS आदित्य प्रकाश वर्मा को हाथरस (सुरक्षित) और अलीगढ़ की छर्रा सीट से पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह को विधानसभा प्रभारी बनाया गया है। पढ़िए पूरी खबर…
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