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    China बॉर्डर पर भारत बना रहा 2 सुरंगे, जिनपिंग को लगेगा झटका!

    3 hours from now

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    चीन को झटका देने के लिए भारत ने एक बड़ा कदम उठाया। सीमा के पास ब्रह्मपुत्र नदी की लहरों के सैकड़ों फीट नीचे भारत सुरंग बनाने की तैयारी कर रहा है। यहां दो विशाल सुरंगे बनाई जाएंगी और चीन की हर चाल पर नजर रखी जाएगी। भारत का यह कदम चीन के लिए तगड़ा झटका है। दरअसल भारत सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली अंडर वाटर रोल रेल सुरंग बनाने की तैयारी में है। यह मेगा प्रोजेक्ट असम में गोपुर को नुमलीगढ़ से जोड़ेगा। इसकी अनुमानित लागत 18,600 से 19,000 करोड़ बताई जा रही है और जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ी बात कि यह सुरंग दो अलग-अलग ट्यूब में बनेगी। एक सड़क के लिए और दूसरी रेलवे लाइन के लिए। यानी गाड़ियां और ट्रेनें दोनों एक साथ नदी के नीचे से गुजर सकेंगी। इसे भी पढ़ें: अचानक हाइवे पर उतरा पीएम मोदी का ये भयंकर विमान, रच गया इतिहास!अभी ब्रह्मपुत्र पार करने में नाव या पुल के जरिए 4 से 6 1/2 घंटे तक लग जाते हैं। लेकिन सुरंग बनने के बाद यह दूरी सिर्फ 30 मिनट में तय की जा सकेगी। बाढ़, बारिश या प्राकृतिक आपदा का भी इस पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह पानी के नीचे सुरक्षित ढांचे के रूप में तैयार की जाएगी। आर्थिक नजरिए से देखें तो यह सुरंग असम और पूरे पूर्वोत्तर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। चाय, फल, सब्जियां और अन्य स्थानीय उत्पाद तेजी से देश के बाकी हिस्सों तक पहुंचेंगे। लॉजिस्टिक्स की लागत घटेगी क्योंकि ट्रकों और ट्रेनों का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से निजी कंपनियां निवेश करेंगी। फैक्ट्रियां लगेंगी और हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि सफर आसान और तेज हो जाएगा। इसे भी पढ़ें: PM Modi का Mission North-East: Guwahati में ब्रह्मपुत्र पर बने Bridge से विकास को मिलेगी नई रफ्तार इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे देश की रक्षा और मजबूत होगी। असम पूर्वी सीमा पर स्थित है और अरुणाचल के जरिए चीन से सटाक है। साथ ही बांग्लादेश और म्यांमार की सीमाएं पास हैं। ऐसे में सेना की तेज आवाजाही बेहद जरूरी है। सुरंग बनने के बाद आपात स्थिति में सैनिक हथियार और जरूरी सामान सिर्फ 30 मिनट में नदी पार कर सकेंगे। पुलों पर निर्भरता कम होगी जो बाढ़ या दुश्मन हमले में क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। यह सुलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक पर दबाव कम करने में मदद करेगा जो कहीं ना कहीं चीन के लिए एक बड़ा झटका साबित होने वाला है। यह परियोजना पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने वाली रणनीतिक जीवन रेखा बनेगी। यह सिर्फ एक सुरंग नहीं बल्कि भूगोल की चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश है। हाईवे, रेलवे और जलमार्ग के साथ यह परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास का हिस्सा है। 
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