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    China की दोस्ती से चिढ़े ट्रंप ने फोड़ा पुल, ईरानियों ने फिर गजब कर दिया

    11 hours ago

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    ईरान और अमेरिका में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच 9 जुलाई की रात एक ऐसा हमला हुआ जिसने सैन्य रणनीति और युद्ध के लक्ष्यों को लेकर नई बहस छेड़ दी। ईरान के उत्तरी गोलस्तान प्रांत में अक काला के पास स्थित अक टेके खान रेलवे पुल पर अमेरिकी क्रूज मिसाइलों से हमला किए जाने की खबर सामने आई। यह पुल ना तो कोई सैन्य अड्डा था और ना मिसाइल साइलो और ना ही वायु रक्षा प्रणाली का हिस्सा था। सबसे अहम बात यह है कि यह स्थान संघर्ष के मुख्य केंद्र माने जाने वाले होमस जलडमरू मध्य से करीब 700 मील दूर स्थित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस नागरिक रेलवे पुल को निशाना क्यों बनाया गया? इसे भी पढ़ें: परमाणु हमला...NATO देश का मोदी पर होश उड़ाने वाला खुलासा, हिली दुनिया!ईरानी अधिकारियों के अनुसार हमले में सात क्रूज मिसाइलें दागी गई जिसमें गोरगन इंची बोरुण रेलवे लाइन का अहम हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पुल का महत्व केवल एक रेलवे संरचना तक सीमित नहीं था। अटेकी खान पुल गोरगन इंचे बोरुन रेलवे लाइन का मुख्य मार्ग है जो ईरान को तुर्कमेनिस्तान कजाकिस्तान और आगे मध्य एशिया के देशों से जोड़ता है। यह रेलवे नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे और अन्य यूरेशियाई व्यापार मार्गों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके जरिए ईरान, रूस, मध्य एशिया और चीन जैसे देशों के साथ व्यापारिक संपर्क मजबूत कर पाता है। यही वजह है कि कई रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पुल को निशाना बनाना केवल बुनियादी ढांचे पर हमला नहीं बल्कि ईरान की आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला और उसके यूरेशियाई संपर्कों पर दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है। इसे भी पढ़ें: POJK में गोलियां चलते ही कूदा भारत, हिल गई इस्लामाबाद की सत्ता!हालांकि अमेरिका ने इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक तौर पर नहीं बताया। इस रेलवे लाइन की अहमियत केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसके जरिए रसद, दवाइयों, खाद्यान्न, औद्योगिक सामान और आपातकालीन राहत सामग्री की आवाजाही भी होती है। युद्ध संकट के समय ऐसी रेल लाइनों की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इसके माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों तक आवश्यक वस्तुएं तेजी से पहुंचाई जा सकती है। यही कारण है कि इस मार्ग को ईरान की आर्थिक और रणनीतिक जीवन रेखा के रूप में देखा जाता है। लेकिन अमेरिका का सारा हमला धरा का धरा रह गया क्योंकि ईरान के गोलिस्तान प्रांत के अधिकारियों ने कहा कि मिसाइल हमले के महज 24 घंटे के भीतर पुल की मरम्मत पूरी कर ली गई और उसी रेलवे ट्रैक पर दोबारा ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया गया।इसे भी पढ़ें: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के आभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया ईरानी मीडिया ने मरम्मत के बाद पुल से गुजरती ट्रेन के वीडियो और तस्वीरें भी शेयर किए। अधिकारियों ने इसे ईरान की इंजीनियरिंग क्षमता और आपातकालीन प्रतिक्रिया का उदाहरण बताया। जानकार मानते हैं कि आधुनिक युद्धों में केवल सैन्य ठिकानों पर हमला ही रणनीति का हिस्सा नहीं होता बल्कि कई बार विरोधी देश की सप्लाई चेन, परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने के लिए भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाता है। 
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