Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    CJI बोले- शहरों में व्यक्ति भीड़ में भी अकेला:गांवों में समुदाय अब भी जीवन का केंद्र, हमें जीवन को बैलेंस करना सीखना होगा

    6 hours ago

    1

    0

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दैनिक भास्कर में एक आर्टिकल लिखा। उन्होंने लिखा- भारत के विकास की चर्चा महानगरों, उद्योगों, तकनीक और आधुनिक संरचना के संदर्भ में की जाती है। ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें और तीव्र आर्थिक गतिविधियां प्रगति का प्रतीक मानी जाती हैं, किंतु इस ​विकास यात्रा के बीच महत्वपूर्ण प्रश्न हमारे सामने खड़ा है- क्या हम अनजाने में गांवों की मूल आत्मा को खोते जा रहे हैं? क्या विकास का अर्थ यह होना चाहिए कि गांव धीरे-धीरे शहर का रूप ले लें? अथवा हमें ऐसा भारत निर्मित करना चाहिए, जहां गांव अपनी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक आत्मीयता और जीवन मूल्यों को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से भी सम्पन्न हों? यह पूरे भारत के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है, परंतु हरियाणा के गांवों का उल्लेख इसलिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वहां आज भी सामुदायिक जीवन, श्रम संस्कृति आत्मसम्मान और सामाजिक सहभागिता की परंपरा जीवंत है। यही स्थिति देश के अनेक राज्यों के गांवों में भी ​दिखाई देती है। भारत की वास्तविक शक्ति गांवों में बसती है। यदि गांवों का चरित्र ही बदल गया तो भारत की आत्मा भी प्रभावित होगी। आज चुनौती यह नहीं कि गांवों तक विकास कैसे पहुंचाया जाए असली चुनौती यह है कि विकास पहुंचाते समय गांवों को ‘शहर’ बनने से कैसे बचाया जाए। गांवों में सड़कें हों, आधुनिक विद्यालय, उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल सुविधाएं, रोजगार के अवसर हों, यह जरूरी है। परंतु यह भी उतना ही जरूरी है कि गांवों की सामाजिक संरचना, सामू​हिकता, पर्यावरणीय संतुलन व मानवीय निकटता सुरक्षित रहे। वर्तमान समय में बड़ी संख्या में ग्रामीण युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण केवल आर्थिक नहीं है। कई बार यह स्वाभाविक धारणा भी होती है कि सम्मानजनक जीवन, अवसर और आधुनिक सुविधाएं केवल शहरों में ही उपलब्ध हैं। यदि हमें गांवों को सशक्त बनाना है और इस सोच को बदलना है, तो हमें इस पलायन को हतोत्साहित करना होगा। जब युवाओं को यह अनुभव होगा कि वे अपने गांव में रहकर भी सम्मान, अवसर और प्रगति प्राप्त कर सकते हैं, तभी पलायन की प्रवृत्ति स्वाभाविक रूप से कम होगी। गांवों की सबसे बड़ी ताकत उनका सामा​जिक ताना-बाना ग्रामीण जीवन को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। गांवों की सबसे बड़ी शक्ति उनका सामा​जिक ताना-बाना है। शहरों में व्यक्ति अक्सर भीड़ के बीच भी अकेला हो जाता है, जबकि गांवों में समुदाय अभी भी जीवन का केंद्र बना हुआ है। परिवार, पड़ोस, सामू​हिक सहयोग, पारस्परिक उत्तरदायित्व...ये वे मूल्य हैं, जो भारतीय समाज को स्थिरता प्रदान करते हैं। यदि गांवों का भी अत्य​धिक नगरीकरण हो गया तो केवल भौतिक संरचना ही नहीं बदलेगी, हमारे सामाजिक संबंधों की प्रकृति भी बदल जाएगी। गांव केवल अतीत की स्मृति ही नहीं, भविष्य की संभावना भी भारत के गांव केवल अतीत की स्मृति नहीं हैं, वे भ​विष्य की संभावना भी हैं। आज विश्वभर में सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण व सामुदा​यिक जीवन के महत्व पर पुनः बल दिया जा रहा है। भारतीय गांव इन मूल्यों के स्वाभा​विक केंद्र रहे हैं। हम संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं तो गांव आधुनिक सुविधाओं व पारंपरिक सामाजिक शक्ति का उत्कृष्ट संगम बन सकते हैं। भारत की प्रगति का सही मापदंड सिर्फ यह नहीं होगा कि शहर कितने विकसित हुए, बल्कि यह होगा कि गांव कितने आत्म​विश्वासी, आत्मनिर्भर, सम्मानपूर्ण बने। यदि गांवों का युवा अपने भविष्य को गांव से जोड़कर देखे, किसान अपने श्रम पर गर्व अनुभव करे, महिलाओं को समान अवसर व सुरक्षा मिले और ​हर ग्रामीण परिवार को यह महसूस हो कि संविधान की शक्ति जीवन को स्पर्श कर रही है, तभी विकास वास्तव में समावेशी व सार्थक कहा जाएगा। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें…. बेरोजगारों को कॉकरोच कहना क्या सही: पूर्व CJI बोले- जज भी इंसान, कोई शब्द निकल जाता है, सोशल मीडिया पर गलत मतलब निकाला जाता है पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने गुरुवार को दैनिक भास्कर को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उनसे पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट में बेरोजगारों को 'कॉकरोच' और 'पैरासाइट' जैसे शब्द कहे गए, आप इसे कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा- इस बात को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। जज भी इंसान हैं। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    कॉकरोच जनता पार्टी बोली- CBSE चेयरमैन का ट्रांसफर सिर्फ दिखावा:सरकार से बातचीत को तैयार; दिल्ली में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, 6 जून को प्रदर्शन
    Next Article
    13 दिन में टूटी 28 साल पुरानी TMC:दिल्ली से शुरू हुआ बगावत का खेल, 58 विधायक अलग; शुभेंदु की बैठक में ममता के करीबी पहुंचे

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment