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    राज्यमंत्री असीम अरुण ने शेयर की पुरानी यादें:सोशल मीडिया पर लिखा मेरठ से नाता, यादों का, सेवा का और परिवार का

    2 hours ago

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    मेरठ का प्रभारी मंत्री बनते ही राज्यमंत्री असीम अरुण ने इस शहर से जुड़ी पुरानी यादों को शेयर किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस शहर में बिताए वक्त और अनुभवों के साथ यादगार लम्हों को साझा करते हुए लिखा कि मेरठ से नाता…यादों का, सेवा का और परिवार का… पढ़िए… राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभारी असीम अरुण ने क्या लिखा आज एक ऐसी खुशी आप सबके साथ साझा कर रहा हूं, जो मेरे लिए बहुत विशेष है। आदरणीय योगी जी ने मुझे मेरठ जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है और मुझे मेरठ के बहनों-भाइयों की सेवा करने का अवसर दिया है। यह मेरे लिए केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि जीवन का एक अत्यंत सौभाग्यशाली पल है। इस विश्वास और स्नेह के लिए मैं योगी जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मेरठ से मेरा और मेरे परिवार का रिश्ता दशकों पुराना है, गहरा है और भावनाओं से भरा है। यह शहर मेरे जीवन की अनेक महत्वपूर्ण स्मृतियों का हिस्सा रहा है। पिताजी की विरासत और सेवा: मुझसे पहले, मेरे पूज्य पिताजी (स्व. श्रीराम अरुण जी) का मेरठ से गहरा जुड़ाव रहा। 1967 में वह मेरठ के 'एसपी देहात' (SP Rural) थे। यह वह दौर था जब आज का गाजियाबाद, बागपत, हापुड़ और गौतम बुद्ध नगर भी मेरठ जिले का ही हिस्सा हुआ करता था। इसके बाद, 1987 में जब मेरठ एक बहुत बड़े और कठिन दंगे की आग में झुलस रहा था, तब उन्हें 'डीआईजी मेरठ' नियुक्त किया गया। उन्होंने न केवल पूरी शक्ति से दंगे को नियंत्रित कर शांति बहाल की, बल्कि अगले 3 वर्षों तक मेरठ की अथक सेवा कर लोगों का अपार प्यार और सम्मान कमाया। मेरी पहली पोस्टिंग और जीवन की नई शुरुआत: साल 1996 से 1998 तक मुझे मेरठ में ही 'सहायक पुलिस अधीक्षक' (ASP) के रूप में काम करने का अवसर मिला। मेरी पहली पोस्टिंग थी... अल्हड़पन था, सीखने की ललक थी। काम के दौरान बहुत कुछ सीखा, युवा होने के नाते कुछ गलतियां भी हुईं, लेकिन मेरठ ने हमेशा एक अभिभावक की तरह सिखाया और अपनाया। जीवन का सबसे सुंदर मोड़: यह मेरठ ही है जिसने मुझे गृहस्थ जीवन का आशीर्वाद दिया। इसी पोस्टिंग के दौरान, 3 अक्टूबर 1997 को ज्योत्सना और मेरा विवाह हुआ। आज भी ज्योत्सना मेरठ को अपनी सच्ची ससुराल मानती हैं और यहाँ की यादें हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहती हैं। मेरठ ने दिया अनमोल रत्न: मेरठ से मेरा जुड़ाव सिर्फ नौकरी का नहीं रहा, बल्कि यह मेरी निजी खुशियों का गवाह भी है। हमारा छोटा बेटा अमन, जो काफी क्रांतिकारी प्रवृत्ति का है, उसका जन्म भी 2002 में इसी मेरठ की पावन धरती पर हुआ था। आज जब वर्षों बाद मुझे फिर से मेरठ की सेवा का अवसर मिला है, तो ऐसा लगता है जैसे मैं किसी पद पर नहीं, बल्कि अपने ही घर लौट रहा हूं। आइए, मिलकर मेरठ के विकास समृद्धि और खुशहाली के लिए पूरी निष्ठा से काम करें।
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