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    CSJMU की बड़ी पहल:कॉलेजों को NAAC ग्रेडिंग के लिए मिलेगी आर्थिक मदद, कुलपति ने लॉन्च की U-CARES योजना

    3 hours ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) अब अपने संबद्ध महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने व उनकी तस्वीर बदलने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) और महाविद्यालय विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कॉलेजों को NIRF रैंकिंग और NAAC मूल्यांकन के लिए तैयार करना रहा। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉलेजों को प्रोत्साहित करने के लिए 'U-CARES' योजना की एक बड़ी घोषणा की, जिसके तहत गुणवत्ता मानक पूरा करने वाले शुरुआती कॉलेजों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। गुणवत्ता सुधार अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि,किसी भी संस्थान की असली पहचान उसकी बिल्डिंग से नहीं, बल्कि वहां होने वाले शोध, नवाचार और छात्र प्रगति से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुणवत्ता आश्वासन को अब संस्थानों को अपनी स्थायी कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि,कॉलेज केवल डिग्री बांटने तक सीमित न रहें, बल्कि पारदर्शी प्रशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व के मानकों पर भी खुद को परखें। उन्होंने कॉलेजों को भरोसा दिलाया कि इस पूरी प्रक्रिया में विश्वविद्यालय उनके साथ खड़ा है। U-CARES योजना से खुलेगा नई रैंकिंग का रास्ता विश्वविद्यालय ने कॉलेजों में 'प्रत्यायन संस्कृति' विकसित करने के लिए 'यूनिवर्सिटी कॉलेज एक्रिडिटेशन, रिव्यू एंड एक्सीलेंस स्कीम' यानी U-CARES को लॉन्च किया है। इस योजना के तहत NAAC के लिए आवेदन करने वाले पहले 25 संबद्ध महाविद्यालयों को 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह सहायता राशि निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया के बाद कॉलेजों को उनके मनोबल को बढ़ाने और दस्तावेजीकरण में होने वाले शुरुआती खर्चों में मदद के लिए दी जा रही है। इसका सीधा उद्देश्य कॉलेजों को व्यवस्थित तैयारी और दीर्घकालिक सुधार के लिए प्रेरित करना है। दस्तावेजीकरण और शोध पर रहेगा विशेष ध्यान कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने बताया कि,NAAC और NIRF कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सतत सुधार का रास्ता है। IQAC निदेशक प्रो. संदीप कुमार सिंह ने डेटा और साक्ष्य-आधारित दस्तावेजीकरण के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि,कॉलेजों को अपने शिक्षण-अधिगम को छात्र-केंद्रित बनाने और विस्तार गतिविधियों पर ध्यान देने की जरूरत है। वहीं, NIRF सत्र में स्नातक परिणाम, प्लेसमेंट और संस्थागत छवि (Perception) जैसे बिंदुओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि सही और प्रमाणित डेटा ही राष्ट्रीय स्तर पर कॉलेज की रैंकिंग तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। क्षेत्रीय कॉलेजों की बड़ी भागीदारी और अगला चरण इस बैठक में कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा और औरैया जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक और IQAC समन्वयकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में वित्त अधिकारी अशोक कुमार त्रिपाठी, कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा और CDC निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अभियान का अगला चरण 27 फरवरी को आयोजित होगा, जिसमें फर्रुखाबाद, उन्नाव और कन्नौज जनपद के कॉलेजों को गुणवत्ता के गुर सिखाए जाएंगे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. प्रवीन कटियार द्वारा किया गया।
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