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    CSJMU और VSSD कॉलेज में समझौता ज्ञापन:अब यूनिवर्सिटी की शिक्षा को दिशा दिखाएगा 'गीता का दर्शन'

    1 hour ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) की 'श्रीमद्भगवद्गीता एवं वैदिक शोध पीठ' और विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म (VSSD) कॉलेज के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक दर्शन को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है। समझौते के तहत, विद्यार्थियों को गीता के प्रबंधन कौशल, योग और मानसिक स्वास्थ्य के सूत्रों को वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान शोध पीठ के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 'प्रथम गीता सेवारत्न सम्मान' से सम्मानित किया गया। प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी ने इस अवसर पर कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश आज के वैश्विक दौर में अत्यधिक प्रासंगिक है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं पर जोर देते हुए कहा कि गीता का उपदेश विद्यार्थियों को निराशा और अवसाद से बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति रखता है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक वैज्ञानिक पद्धति है। वरिष्ठ समाजसेवी और उद्यमी बलराम नरूला ने स्पष्ट किया कि गीता का आध्यात्मिक दर्शन सार्वभौमिक है और यह संपूर्ण मानव जाति के लिए उपयोगी है। समाजसेवी डॉ. उमेश पालीवाल और सह-संयोजक अनिल गुप्ता ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए गीता के सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. नीरू टंडन ने भारतीय दर्शन और संस्कृत की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिसे आज दुनिया 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' और 'माइंडफुलनेस' कहती है, उसका मूल सिद्धांत 'कर्मण्येवाधिकारस्ते' में निहित है। इसी तरह, 'योग: कर्मसु कौशलम्' प्रोफेशनल एक्सीलेंस और पीक परफॉर्मेंस का मूल सूत्र है। प्रो. टंडन ने यह भी कहा कि आज की न्यूरोसाइंस भी ध्यान और मस्तिष्क के संतुलन के बीच गहरे वैज्ञानिक संबंध को मानती है। उन्होंने पाणिनि की अष्टाध्यायी के नियमों और संस्कृत के ध्वनि शास्त्र को आज के 'कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स' और 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के लिए आधार बताया। प्राचार्य ने कार्यक्रम को महज एक आयोजन न बताकर एक नई दिशा का निर्धारण बताया। उन्होंने कहा कि गीता और संस्कृत को नेतृत्व विकास और आत्मनिर्भरता से जोड़ना ही वर्तमान समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. शोभा मिश्रा और संयोजन प्रो. प्रदीप कुमार दीक्षित द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता सोनकर, डॉ. अंशु सिंह सेंगर, डॉ. आर.के. पांडेय, डॉ. राकेश शुक्ला, डॉ. अनिल मिश्रा, डॉ. मनोज अवस्थी और डॉ. आर.पी. प्रधान सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और छात्र उपस्थित रहे।
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