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    Cyprus बना India का नया यूरोपीय रणनीतिक साथी, भूमध्यसागर में भारत की एंट्री होते ही Turkey की बढ़ी टेंशन

    11 hours ago

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    भारत और सायप्रस के संबंधों ने एक नए ऐतिहासिक दौर में प्रवेश कर लिया है। सायप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से सामरिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने की घोषणा की। यह बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन, यूरोप के साथ भारत की नई रणनीति, पूर्वी भूमध्यसागर की राजनीति और भारत की समुद्री तथा व्यापारिक महत्वाकांक्षाओं से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि भारत और सायप्रस की मित्रता केवल मजबूत ही नहीं बल्कि भविष्य उन्मुख भी है। लोकतंत्र, कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों की साझेदारी का आधार है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और इसी कारण सायप्रस के प्रति उसका समर्थन लगातार मजबूत हुआ है।इसे भी पढ़ें: PM Modi की Council of Ministers संग मैराथन बैठक, बोले- Ease of Living पर हुई सार्थक चर्चादरअसल भारत और सायप्रस की नजदीकी को तुर्की के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। तुर्की लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुला समर्थन करता रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी रुख अपनाता रहा है। इसके जवाब में भारत ने पूर्वी भूमध्यसागर में तुर्की के प्रतिद्वंद्वी देशों सायप्रस और ग्रीस के साथ अपने संबंध तेजी से मजबूत किए हैं। भारत स्पष्ट रूप से सायप्रस गणराज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है तथा उत्तरी सायप्रस में तुर्क समर्थित अलगाववादी शासन को मान्यता नहीं देता। इस प्रकार भारत और सायप्रस की सामरिक साझेदारी तुर्की को एक मजबूत कूटनीतिक संदेश भी मानी जा रही है।इस यात्रा के दौरान रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह बनाने का समझौता किया। साथ ही 2026 से 2031 तक रक्षा सहयोग रोडमैप को भी अंतिम रूप दिया गया। समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई।भारत और सायप्रस के बीच समुद्री सहयोग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सायप्रस भूमध्यसागर के अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर स्थित है। भारत ने इंडो पेसिफिक महासागर पहल में सायप्रस को शामिल किया है, जहां वह व्यापार संपर्क और समुद्री परिवहन क्षेत्र का सह अध्यक्ष बनेगा। इससे हिंद महासागर और भूमध्यसागर के बीच भारत की रणनीतिक पहुंच और मजबूत होगी।आर्थिक दृष्टि से भी यह साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सायप्रस भारत में निवेश करने वाले शीर्ष देशों में शामिल है। वर्ष 2000 से अब तक सायप्रस से भारत में लगभग 16 अरब डॉलर का निवेश आया है। सेवा क्षेत्र, सॉफ्टवेयर, दवा उद्योग, जहाजरानी और वाहन निर्माण जैसे क्षेत्रों में यह निवेश हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने अगले पांच वर्षों में इस निवेश को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।भारत की गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने में भी सायप्रस अहम भूमिका निभा सकता है। दोनों देशों के बीच पूंजी बाजार सहयोग समझौता हुआ है। सायप्रस की कंपनी एलिनास फाइनेंस गिफ्ट सिटी में सूचीबद्ध होने वाली पहली विदेशी कंपनी बन चुकी है। इसके अलावा अगले वर्ष से सायप्रस में भारतीय डिजिटल भुगतान व्यवस्था यूपीआई भी शुरू होगी। यह दोनों देशों के बीच वित्तीय संपर्क को नई ऊंचाई देगा।भारत, मध्य पूर्व और यूरोप आर्थिक गलियारे के संदर्भ में भी सायप्रस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह गलियारा भारत को पश्चिम एशिया और यूरोप से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी संपर्क परियोजना है। सायप्रस यूरोप के प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है। यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभाल रहे सायप्रस की भौगोलिक स्थिति उसे भारत के लिए स्वाभाविक साझेदार बनाती है। भूमध्यसागर में स्थित होने के कारण यह समुद्री व्यापार, ऊर्जा परिवहन, बंदरगाह संपर्क और माल आपूर्ति श्रृंखला के लिए रणनीतिक केंद्र बन सकता है। भारत के लिए यह परियोजना चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के विकल्प के रूप में भी देखी जा रही है। ऐसे में सायप्रस इस गलियारे का महत्वपूर्ण समुद्री और निवेश केंद्र बन सकता है।इस यात्रा के दौरान शिक्षा, संस्कृति, प्रौद्योगिकी, शोध, कूटनीतिक प्रशिक्षण और खोज तथा बचाव सहयोग से जुड़े कई समझौते भी हुए। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा संवाद, वाणिज्य दूतावास संवाद और अंतरिक्ष सहयोग दिवस मनाने की भी घोषणा की। मुंबई में सायप्रस व्यापार केंद्र खोलने की योजना भी घोषित की गई।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और सायप्रस की यह नई सामरिक साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूरोप, भूमध्यसागर, पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने वाला बड़ा कदम है। इससे भारत को यूरोप तक नई आर्थिक पहुंच मिलेगी, जबकि सायप्रस को एशिया में एक विश्वसनीय और उभरती शक्ति का साथ प्राप्त होगा।
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