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    डॉगी के लिए 3 साल लड़ी लड़ाई, अब सुकून:लापरवाही से कुत्ते की मौत पर 350 RTI, 7 विभागों में 200 प्रार्थना पत्र

    3 hours ago

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    350 RTI, 7 विभागों में 200 शिकायतें, प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक की दौड़, हर चौखट पर इंसाफ के लिए भटकना, तीन सालों तक लगातार इंसाफ के लिए लड़ना। यह लड़ाई इंसानी जिंदगी की नहीं बल्कि जान से भी प्यारे अपने डॉगी के लिए थी। जॉनी (डॉगी) की मौत से सदमे में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील ने एक मिसाल ही कायम कर दी। जिस डॉग केयर सेंटर की लापरवाही से उनके जॉनी की जान गई अब जाकर उसमें ताला लटक गया। पहले डाग केयर सेंटर का लाइसेंस निरस्त हुआ था अब पीडीए ने उसे सील कर दिया। वहां सरकारी ताला लटका तो लंबी लड़ाई लड़ने वाले अनुभव परिहार को सुकून मिला। हालांकि वे इस जंग को अभी भी जारी रखेंगे और लापरवाही करने वालों को सजा के लिए हाईकोर्ट में रिट करने की तैयारी में हैं। जानिये कुत्ते के लिए 3 साल तक लड़ी लड़ाई की कहानी प्रयागराज में कचहरी रोड पर रहने वाले हाईकोर्ट के वकील अनुभव परिहार शिमला से भूटिया ब्रीड का डॉगी लेकर आए और उसका नाम जॉनी रखा। ढाई साल के जॉनी से पूरा परिवार बेइंतहां प्यार करने लगा। वह घर के सदस्यों जैसा हो गया। अनुभव 10 सितंबर 2023 को जानी का बाल कटवाने इंडियन प्रेस चौराहे के पास पन्ना लाल रोड पर डाग केयर सेंटर ले गए। जानी को किसी प्रकार का रोग नहीं था। बाल कटवाने के बाद घर लेकर आए तो तड़पते हुए उसने दम तोड़ दिया। डॉगी की मौत से परिवार में मातम हुआ। उसे अंतिम विदाई देने के बाद वकील अनुभव ने 11 सितंबर को कर्नलगंज थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। अफसरों के पास पहुंचे लेकिन मुकदमा नहीं दर्ज हुआ। इसके बाद उन्होंने जानी की याद में सारे कामकाज रोक कागजी मुहिम शुरू की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही पीडीए, नगर निगम, पशुधन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन समेत अन्य विभागों के अधिकारियों शिकायती पत्र देना शुरू किया। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, औषधि महानियंत्रक भारत सरकार को शिकायत भेजा। आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। फिर परिवाद भी दाखिल किया। RTI की लड़ाई से मचा हड़कंप वकील ने अपनी लड़ाई की धार आरटीआई से और तेज कर दी। घटना के बाद से अब तक उन्होंने करीब 350 आरटीआई डाली। जवाब देते देते विभागों के होश उड़ गए। जवाब न आने पर शिकायतें करते रहे। जनसूचना अधिकार के तहत लगभग 350 पत्र भेजकर सूचनाएं मांगी। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। औषधि महानियंत्रक भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन की ओर से भी जांच शुरू कराई गई। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से डाग केयर सेंटर में संचालित मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त कर दिया। विभाग के सहायक आयुक्त संजय ने बताया कि लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। बिना अनुमति कुत्ते को बेहोशी का इंजेक्शन आरटीआइ की सूचना से अनुभव को पता चला कि उनके कुत्ते को बिना उनकी अनुमति के ही बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया था। यह इंजेक्शन सामान्य तौर पर आपरेशन के लिए प्रयोग किया जाता है। अनुभव परिहार का कहना है कि मैं एक वकील हूं इसलिए मैंने हार नहीं मानी। आरटीआई लगाई... एक नहीं, 350 आरटीआई अब तक फाइल कर चुका हूं। हर विभाग से जवाब मांगा। आरटीआई के जरिए यह सामने आई कि जिस क्लीनिक में उनका डॉग गया था, वह एक मेडिकल स्टोर था। वहां बैठा डॉक्टर 1976 से प्रैक्टिस कर रहा था, जबकि कानून के मुताबिक, कोई भी वेटरनरी डॉक्टर मेडिकल स्टोर पर प्रैक्टिस नहीं कर सकता। अनुभव परिहार की पत्नी ज्योति सिंह का कहना है कि “जॉनी हमारे लिए सिर्फ एक डॉगी नहीं था, वो हमारे परिवार का हिस्सा था... जैसे हम अपने बच्चों से प्यार करते हैं, वैसे ही उससे भी करते थे।”
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