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    ड्रग से भी खतरनाक है AI और मोबाइल का एडिक्शन:आगरा में बोले इस्कॉन के मोटिवेशनल स्पीकर अमोघ लीला प्रभु, सूरसदन में हुआ सेशन

    3 hours ago

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    आगरा के सूरसदन सभागार में शनिवार को इस्कॉन के वरिष्ठ उपदेशक और मोटिवेशनल स्पीकर HG अमोघ लीला प्रभु का विशेष स्पिरिचुअल और एआई, सोल और व्यक्ति के भविष्य पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत “हरे कृष्ण” महामंत्र के साथ हुई, जिसके बाद पूरा हॉल भक्तिमय माहौल में डूब गया। बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं से सभागार खचाखच भर गया और पूरे सत्र के दौरान उत्साह बना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ आंबेडकर युनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. आशू रानी ने दीप प्रल्वलित कर किया। सेशन HG अमोघ लीला प्रभु ने युवाओं के साथ इंटरैक्टिव प्रश्न-उत्तर सत्र भी किया, जिसमें करियर, रिलेशनशिप, तनाव और डिजिटल लत जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। इससे पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने एआई और मोबाइल के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के समय में एआई और मोबाइल का एडिक्शन ड्रग्स से भी ज्यादा खतरनाक बनता जा रहा है। “एआई का सही उपयोग जरूरी है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल के प्रभावों के बारे में भी जागरूकता उतनी ही जरूरी है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि आज के कई बड़े इन्फ्लुएंसर्स एआई के कोर्स तो करा रहे हैं, लेकिन इसके नकारात्मक प्रभावों पर उतना ध्यान नहीं देते। सरकार को भी इस दिशा में स्पष्ट नियम और उचित शिक्षा व्यवस्था लागू करनी चाहिए, ताकि युवाओं को संतुलित जानकारी मिल सके। जैन-जी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी सोशल मीडिया पर भले ही बहुत एक्टिव दिखती है, लेकिन असल जिंदगी में सामाजिक रूप से काफी हद तक निष्क्रिय होती जा रही है। “सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जिंदगी अक्सर दिखावा होती है, जबकि परिवार और दोस्तों के साथ वास्तविक समय बिताना कम हो गया है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है,” उन्होंने कहा। मोबाइल के दुष्प्रभावों पर बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि इसके अत्यधिक उपयोग से न केवल मानसिक तनाव बढ़ रहा है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। HG अमोघ लीला प्रभु ने युवाओं को संदेश दिया कि सही और गलत के बीच चुनाव करने की ताकत आध्यात्म और भक्ति से आती है। “जब गलत करने का मौका आता है, तब खुद को रोकने की जो शक्ति चाहिए, वह स्पिरिचुअलिटी से ही मिलती है,” उन्होंने कहा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे तकनीक का संतुलित उपयोग करें और जीवन में आध्यात्म को अपनाकर मानसिक शांति और स्थिरता हासिल करें।
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