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    DDU में नेशनल सेमिनार:GST के भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई, टैक्स एक्सपर्ट्स, CA ने दी जानकारी

    2 hours ago

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    दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कॉमर्स डिपार्टमेंट की ओर से और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से जीएसटी पर आयोजित नेशनल सेमिनार दूसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान कुल 182 रिसर्च पेपर की प्रेजेंट किया गया। इस दिन तीसरे और चौथे सेशन का आयोजन किया गया। तीसरे तकनीकी सेशन का सब्जेक्ट “GST: इंडस्ट्री आधारित दृष्टिकोण” रहा। जबकि चौथे सेशन में GST के भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रोग्राम में विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के विशेषज्ञ, टैक्स एक्सपर्ट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, रिसर्चर्स और स्टूडेंट्स ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उद्योगों पर जीएसटी के प्रभाव का एनालिसिस किया गया तीसरे में 59 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इस सत्र के सत्र समन्वयक प्रो. अनिल कुमार यादव और सह-समन्वयक डॉ. राहुल मिश्रा थे। सत्र की अध्यक्षता प्रो. अखिल मिश्रा (वाणिज्य विभाग, बीएचयू, वाराणसी) और प्रो. आकाश अग्रवाल (आर.ई. कॉलेज, कन्नौज) ने की। इस सत्र के विशेषज्ञ वक्ता सी.ए. गौरव अग्रवाल रहे। सत्र में प्रस्तुत शोध-पत्रों में एमएसएमई, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, ई-कॉमर्स, निर्यात, पर्यटन, एफएमसीजी सहित विभिन्न उद्योगों पर जीएसटी के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। विशेषज्ञ वक्ता सी.ए. गौरव अग्रवाल ने जीएसटी की उपलब्धियों, वर्तमान चुनौतियों और कर प्रणाली में पारदर्शिता और अनुपालन बढ़ाने की आवश्यकता की जानकारी दी। GST के भविष्य की संभावनाएं पर हुई चर्चा तकनीकी सत्र–IV का विषय “GST के भविष्य की संभावनाएं” था, जिसमें 48 शोध-पत्रों की प्रस्तुति हुई। इस सत्र के सत्र समन्वयक प्रो. मनीष कुमार श्रीवास्तव तथा सह-समन्वयक डॉ. अंशु गुप्ता थे। सत्र की अध्यक्षता प्रो. नीरज शुक्ला (वाणिज्य विभाग, KMCL विश्वविद्यालय, लखनऊ) तथा प्रो. दीपक बाबू (वाणिज्य संकाय अध्यक्ष, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय) ने की। इस सत्र के विशेषज्ञ वक्ता सुनील जायसवाल (AC, SGST) और सी.ए. दीपक गुप्ता रहे। विशेषज्ञों ने जीएसटी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वचालन, पारदर्शिता तथा सरल व्यवसाय-अनुकूल ढांचे के विकास पर बल दिया। संगोष्ठी का समापन सत्र महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ में आयोजित हुआ। इस अवसर पर वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. एस. वी. पाठक ने स्वागत भाषण के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. जे. वी. वैषम्पायन (पूर्व कुलपति, CSJM कानपुर विश्वविद्यालय और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी), मुख्य अतिथि प्रो. संजीत कुमार गुप्ता (कुलपति, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया) के साथ उदित नारायण सिंह (S.B. Enforcement) उपस्थित रहे। जीएसटी से टैक्स में पारदर्शिता बढ़ती प्रो. जे. वी. वैषम्पायन ने अपने उद्बोधन में कहा कि राज्य के संचालन में कराधान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने जीएसटी को एक महत्वपूर्ण कर सुधार बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ती है, कर चोरी कम होती है और देश के बाजार को मजबूती मिलती है। मुख्य अतिथि प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि केवल विषयों को पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य उसे समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में व्यवहारिक रूप से उपयोग करना है। 'जीएसटी के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक' वहीं उदित नारायण सिंह (S.B. Enforcement) ने अपने संबोधन में कहा कि जीएसटी के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उपभोक्ताओं से प्रत्येक खरीद पर बिल लेने की अपील करते हुए कहा कि इससे कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ती है और देश के विकास में आम नागरिक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनको मिला बेस्ट पेपर अवॉर्ड समापन सत्र में प्रत्येक तकनीकी सत्र से एक-एक श्रेष्ठ शोध-पत्र को “Best Paper Award” से सम्मानित किया गया, जिसमें तकनीकी सत्र–I प्रीति यादव,तकनीकी सत्र–II आंचल, तकनीकी सत्र–III डॉ. पूर्णिमा मिश्रा, तकनीकी सत्र–IV में अपर्णा गुप्ता सम्मानित हुई। कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. अभिषेक कुमार ने सेमिनार की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंशिका मिश्रा ने किया। वहीं तकनीकी सत्रों का संचालन और मार्गदर्शन प्रो. ए. के. गुप्ता और डॉ. अंशु गुप्ता के नेतृत्व में संपन्न हुआ। सेमिनार के सफल आयोजन में कॉमर्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर्स, सहायक प्रोफेसर्स, बैंकिंग व इंश्योरेंस विभाग के शिक्षकों और विभाग के शोधार्थियों के सामूहिक प्रयासों से कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
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