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    युद्ध की आग में झुलसा बरेली का जरी-जरदोजी कारोबार:10 लाख कारीगरों की ईद पर संकट, ईरान-इजरायल जंग ने तोड़ी 100 करोड़ के व्यापार की कमर

    2 hours ago

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    बरेली की विश्व प्रसिद्ध जरी-जरदोजी कला पर युद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने बरेली मंडल के करीब 10 लाख कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। रमजान और ईद के इस पीक सीजन में, जहां करोड़ों का कारोबार होता था, वहां आज सन्नाटा पसरा है। अनुमान के मुताबिक, युद्ध की वजह से अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार चौपट हो चुका है। गल्फ देशों में सबसे ज्यादा डिमांड, एयरपोर्ट और कारखानों में फंसा माल बरेली की नक्काशीदार जरदोजी की सबसे ज्यादा मांग दुबई, ईरान, तुर्की और सऊदी अरब जैसे गल्फ देशों में रहती है। रमजान के दौरान यहां से भारी तादाद में ऑर्डर मिलते हैं, लेकिन युद्ध के कारण लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है। आलम यह है कि तैयार माल या तो कारखानों में डंप पड़ा है या फिर एयरपोर्ट पर फंसा हुआ है। पूरी सप्लाई चेन हुई ध्वस्त, कच्चा माल देने वालों के भी फंसे पैसे सैलानी मार्केट के जरी कारोबारी शारिक के मुताबिक, यह केवल एक उत्पाद का नहीं बल्कि पूरी चेन का संकट है। कपड़ा सूरत से आता है और जरी का मटेरियल दिल्ली से मंगाया जाता है। जब तैयार माल आगे नहीं बिक रहा, तो कारीगरों को भुगतान करना मुश्किल हो रहा है। मंडल में करीब 7.5 लाख रजिस्टर्ड और कुल मिलाकर 10 लाख से ज्यादा कारीगर इस काम से जुड़े हैं, जिनके घरों में इस बार ईद की खुशियां फीकी रहने की आशंका है। हज और ईद के सीजन पर लगा 'युद्ध' का ग्रहण व्यापारियों का कहना है कि यह समय हज और ईद की तैयारियों का होता है, जिसमें बरेली की कढ़ाई वाले कपड़ों की विदेशों में भारी मांग रहती है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और व्यापारिक मार्गों पर युद्ध के असर ने इस पूरे सीजन को बर्बाद कर दिया है। न केवल बड़े निर्यातक, बल्कि छोटे मजदूर और मटेरियल सप्लायर भी इस आर्थिक तंगी की चपेट में आ गए हैं।
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