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    Delhi High Court का DUSIB को निर्देश, Ramlila मैदान आवंटन के लिए बनाएं पारदर्शी गाइडलाइंस

    12 hours ago

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    दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि रामलीला और दूसरे सांस्कृतिक या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए पब्लिक ग्राउंड अलॉट करने का आधार सिर्फ़ पहले आओ, पहले पाओ (first come, first served) वाली पॉलिसी नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि इस तरीके से आवेदकों के लिए असमान मौके बन सकते हैं और यह संवैधानिक निष्पक्षता की ज़रूरतों को अपने-आप पूरा नहीं करता। जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि पब्लिक सुविधा के लिए सबसे पहले आवेदन करने वाले का दावा ही सबसे मज़बूत हो, यह ज़रूरी नहीं है। उन्होंने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) को निर्देश दिया कि वह अपने मौजूदा निर्देशों की समीक्षा करे और ग्राउंड अलॉटमेंट के लिए व्यापक सालाना गाइडलाइंस बनाए। कोर्ट ने कहा, किसी मानदंड का निश्चित होना और उसका तर्कसंगत होना दो अलग-अलग बातें हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी पॉलिसी को सिर्फ़ इसलिए सही नहीं ठहराया जा सकता कि आवेदन मिलने की तारीख और समय का पता आसानी से लगाया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: सुप्रीम कटघरे में अब CEC को मुकदमों से बचाने वाला 'अभयदान', क्या है धारा-16 का 'कवच' जिस पर SC करेगा सुनवाई?कोर्ट ने कहा कि 'पहले आओ-पहले पाओ' के तरीके से "जानकारी पाने की एक असमान होड़" पैदा हो सकती है। इससे उन आवेदकों को फ़ायदा मिल सकता है जिनकी प्रशासनिक जानकारी तक विशेष पहुँच है, जैसे कि सार्वजनिक मैदानों की उपलब्धता के बारे में जानकारी। यह टिप्पणी 'रेज़ ऑफ़ न्यू बिगिनिंग फ़ाउंडेशन' की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। फ़ाउंडेशन ने पश्चिमी दिल्ली के राजा गार्डन में शिवाजी प्लेस स्थित 'चंक-सी ग्राउंड' को अपने सालाना रामलीला-दशहरा महोत्सव के लिए आवंटित करने के अपने आवेदन को खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। हालाँकि कोर्ट ने मौजूदा आवंटन को रद्द करने या 2026 के उत्सव के लिए मैदान याचिकाकर्ता को सौंपने से इनकार कर दिया, लेकिन उसने अधिकारियों को भविष्य के आवंटन के लिए एक पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। इन निर्देशों के तहत, पहले तय कार्यक्रम से कम से कम 90 दिन पहले एक सालाना साइट-आवंटन नोटिस जारी किया जाना चाहिए। इस नोटिस में उपलब्ध मैदानों, बुकिंग की तारीखों, पात्रता की शर्तों, मूल्यांकन के मानदंडों, लागू शुल्क और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए।इसे भी पढ़ें: Supreme Court में वकीलों ने पढ़ी संविधान की प्रस्तावना, EC विरोध पर पुलिस एक्शन पर जताया रोषएक ही जगह और बुकिंग के समय के लिए आवेदन आम तौर पर एक तय समय-सीमा के अंदर ही मंगाए जाने चाहिए। जब ​​कई योग्य आवेदक एक ही मैदान के लिए आवेदन करें, तो उनके दावों की जांच पहले से तय और पब्लिश किए गए स्कोरिंग मैट्रिक्स या दूसरे पारदर्शी तरीकों से की जानी चाहिए। गाइडलाइंस में शिकायत दूर करने का सिस्टम भी होना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि इवेंट शुरू होने से काफी पहले ही अलॉटमेंट और आम शिकायतों से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएं। कोर्ट ने उन संगठनों को बार-बार वही मैदान अलॉट करके असल में एकाधिकार (monopoly) बनाने के खिलाफ चेतावनी दी, जिन्होंने पिछले सालों में वहां कार्यक्रम आयोजित किए थे। कोर्ट ने कहा कि निरंतरता और अनुभव अहम बातें हो सकती हैं, लेकिन दूसरे दावेदारों के दावों को नजरअंदाज करके सिर्फ़ इन्हीं के आधार पर फैसला नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि नियमों का ठीक से पालन करने वाले संगठन को थोड़ी प्राथमिकता मिल सकती है, लेकिन ऐसी प्राथमिकता से अलॉटमेंट का कोई पक्का अधिकार नहीं बन जाता।
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