Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Donald Trump और Xi Jinping शिखर वार्ता: व्यापार, ताइवान और तकनीक पर रहेगा जोर

    10 hours ago

    1

    0

    (राना मित्तेर, हार्वर्ड केनेडी स्कूल) कैंब्रिज, 22 सितंबर (द कन्वरसेशन) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली आगामी शिखर बैठक में तीन प्रमुख मुद्दे- व्यापार, तकनीक और ताइवान (थ्री टी) फिर चर्चा के केंद्र में रहेंगे। हालांकि, किसी बड़े बदलाव वाले समझौते की संभावना कम दिखाई दे रही है। अमेरिका में 24 सितंबर से शुरू होने वाली इस बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पिछली मई 2026 की बैठक में भी यही विषय प्रमुख रहे थे। इस बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण तकनीक का मुद्दा अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।----- व्यापार में मामूली बदलाव की संभावना ----- सबसे तात्कालिक लेकिन अपेक्षाकृत आसान मुद्दा व्यापार का होगा। करीब एक साल पहले दक्षिण कोरिया के बुसान में ट्रंप और शी के बीच हुए समझौते के तहत अमेरिका ने उच्च तकनीक वाले उत्पादों पर कुछ निर्यात नियंत्रण हटाने और चीनी सामानों पर लगे भारी शुल्क कम करने पर सहमति जताई थी। इसके बदले चीन ने अमेरिका को महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति सीमित नहीं करने का वादा किया था। अब इस समझौते के नवीनीकरण का समय है। दोनों पक्ष मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना चाहेंगे और कुछ छोटे बदलावों के साथ नया समझौता पुराने जैसा ही रह सकता है। दोनों देशों ने पहले गैर-संवेदनशील अमेरिकी-चीनी कारोबारी हितों का आकलन करने के लिए एक ‘‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’’ बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इसके स्वरूप को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। एक प्रस्तावित ‘‘बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट’’ पर भी अभी अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। चीन इस बैठक में प्रमुख चीनी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को शामिल करने का प्रस्ताव दे सकता है, जैसा कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा में एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और टेस्ला के एलन मस्क शामिल हुए थे।----- ताइवान का मुद्दा अधिक जटिल ----- ताइवान ऐसा मुद्दा है जिस पर किसी समाधान की संभावना कम है। ट्रंप ने चीन की ओर से हमले की स्थिति में ताइवान की रक्षा करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता से दूरी बनाए रखी है और अमेरिका की पुरानी ‘‘रणनीतिक अस्पष्टता’’ वाली नीति को दोहराया है। चीन भी फिलहाल युद्ध के बजाय ऐसे तरीकों को प्राथमिकता देता है, जिनसे ताइवान को उसके नियंत्रण में लाया जा सके। ताइवान में जनवरी 2028 का राष्ट्रपति चुनाव वहां के भविष्य के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर यदि चीन के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखने वाली कुओमिन्तांग पार्टी सत्ता में आती है। बीजिंग ताइवान के आसपास अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाता रहेगा, लेकिन साथ ही आर्थिक प्रोत्साहन और दबाव के जरिए ताइवान के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर सकता है। अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा सीमित रहने की संभावना है। चीन ईरान युद्ध को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकता है, जबकि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून का उल्लेख कर सकता है। हालांकि, इन मुद्दों से तत्काल बड़े बदलाव की संभावना कम है।----- एआई पर बातचीत, लेकिन प्रगति सीमित ----- तकनीक, खासकर एआई के क्षेत्र में दोनों देश वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप कूटनीति बनाने की कोशिश करेंगे। मई की बैठक में एआई नियमन पर चर्चा ने कई लोगों को चौंकाया था। दोनों देशों ने माना था कि एआई के बढ़ते महत्व और अनिश्चितताओं को देखते हुए इसके नियमन पर बातचीत संभव और जरूरी हो सकती है। 20 सितंबर को अमेरिका और चीन ने एआई से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की जानकारी साझा करने के लिए ‘‘हॉटलाइन’’ बनाने के विचार पर भी चर्चा की थी। अमेरिका में अनियंत्रित एआई को लेकर चिंता बढ़ रही है। वहीं, चीन में स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में एआई के लाभों के कारण लोगों का नजरिया कुछ नरम हुआ है, लेकिन वहां भी यह चिंता है कि एआई से अर्थव्यवस्था को कितना फायदा होगा और रोजगार पर इसका क्या असर पड़ेगा। दोनों देशों के पास एआई नियमन पर बातचीत करने के कारण हैं। अमेरिका में डेटा केंद्रों को लेकर लोगों की चिंताएं हैं, जबकि चीन में एआई से जुड़ी अनियंत्रित स्थिति को लेकर राजनीतिक चिंताएं भी हैं। हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच एआई क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा जारी है और दोनों देशों की सरकारें तथा निजी कंपनियां ऐसे समझौते करने को तैयार नहीं दिखतीं, जिनसे दूसरे पक्ष को लाभ मिल सके। इसलिए एआई पर बातचीत जारी रहने की संभावना है, लेकिन निकट भविष्य में किसी बड़े समझौते की उम्मीद कम है।----- संवाद बनाए रखना भी अहम ----- ट्रंप-शी बैठक किसी बड़े नीतिगत बदलाव से ज्यादा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया की दो सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं के बीच संवाद बनाए रखने का संकेत है। दोनों नेता आने वाले समय में जी20 और एपीईसी शिखर सम्मेलनों में भी मिल सकते हैं। छह महीने से कुछ अधिक समय में चार मुलाकातें होना संवाद बनाए रखने का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, व्यापार, तकनीक और ताइवान जैसे तीनों मुद्दों पर दोनों देशों के हितों में मूलभूत अंतर बना हुआ है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Donald Trump से मिलेंगे British PM Andy Burnham, UN में उठाएंगे AI और Middle East का मुद्दा
    Next Article
    Turkey School Shooting में 11 घायल और 2 की हालत गंभीर, Bullying दावों की होगी जांच

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment