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    फिरोजाबाद की यूनिवर्सिटी ने डिग्री जारी करने से किया इनकार:कानपुर फर्जी डिग्री केस में जांच तेज, मार्केटिंग करता था आरोपी विनीत

    3 hours ago

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    SIT की जांच में एक-एक कर डिग्रियां फर्जी निकल रही हैं। बुधवार को लिंग्या और मोनाड यूनिवर्सिटी ने अपने यहां से डिग्री जारी होने की बात से इंकार किया था। गुरुवार को फिरोजाबाद की जेएस यूनिवर्सिटी ने भी 11 डिग्रियां जारी करने से इंकार कर दिया है। इसके साथ ही मंगलायतन यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने फरार आरोपी विनीत को लेकर नई जानकारी दी। बताया कि वह मार्केटिंग में काम करता था, जिसके बाद उसका डाटा निकाला जा रहा है। SIT की पांच टीमें मंगलवार को फरीदाबाद की लिंग्या, हापुड़ की मोनाड, अलीगढ़ की मंगलायतन, सहारनपुर की ग्लोकल और फिरोजाबाद की जेएस यूनिवर्सिटी में जांच करने पहुंची थीं। लिंग्या और मोनाड यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने डिग्रियां अपने यहां की होने से स्पष्ट इंकार कर दिया था। लिंग्या की 100 और मोनाड की 3 डिग्रियां बरामद की गई थीं। अब फिरोजाबाद की जेएस यूनिवर्सिटी ने भी डिग्रियां जारी करने से इंकार कर दिया है। पुलिस को छापे में जेएस यूनिवर्सिटी से जारी 11 डिग्रियां मिली थीं। मार्केटिंग करता था विनीत SIT जांच की कड़ी में अलीगढ़ की मंगलायतन यूनिवर्सिटी पहुंची थी। यहां फर्जी डिग्री के मास्टर माइंड शैलेंद्र कुमार ओझा के साथ जेल भेजे गए और फरार आरोपियों के बारे में पूछताछ की गई। मंगलायतन यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने बताया कि विनीत कुछ साल पहले उनके यहां मार्केटिंग में काम करता था। SIT ने उसका पता पूछा तो वह गाजियाबाद का बताया गया। सर्विलांस को उसकी डिटेल दी गई है। इसके साथ ही फरार छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद निवासी मनीष उर्फ रवि, भोपाल निवासी शेखू और शुभम दुबे की तलाश में सर्विलांस टीम लगी है। यह है पूरा मामला किदवई नगर पुलिस ने गौशाला चौराहे के पास शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन में दबिश देकर चार युवकों को फर्जी डिग्रियों के साथ गिरफ्तार किया। यह लोग 2012 से यह काम कर रहे थे। इनके पास से 9 राज्यों की 15 यूनिवर्सिटी से जुड़ी 900 से ज्यादा डिग्री, माइग्रेशन, प्रमाण पत्र मिले थे। इसमें सीएसजेएमयू की भी 357 डिग्रियां शामिल हैं। गिरोह का मास्टर माइंड शैलेंद्र कुमार ओझा है जो पूरे नेटवर्क का संचालन करता है। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को पुलिस ने जेल भेजा था। SIT के मुताबिक शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के नाम पर खोले गए खाते की वर्ष 2021 से 2025 के बीच पांच साल की डिटेल निकाली गई तो करीब सात करोड़ का ट्रांजेक्शन मिला। खाते का संचालन शैलेंद्र कुमार ओझा करता था। एसआईटी अब यह पता लगा रही है कि खाते से कहां-कहां और कितनी धनराशि भेजी गई।
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